टालकट पारसन्स का शैक्षणिक जीवन - The Academic Life of Talkat Parsons
टालकट पारसन्स का शैक्षणिक जीवन - The Academic Life of Talkat Parsons
पारसन्स का जन्म अमेरिका में सन् 1902 में हुआ था। उसका पालन-पोषण परिवार में हुआ। इसलिए बचपन से ही पारसन्स बौद्धिक रूप से प्रखर था। उसमें बचपन में ही विभिन्न दृष्टियों से जिज्ञासाएँ विकसित हो गई थीं। सन् 1924 में पारसन्स ने एम्हार्ट कालेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त कर ली थी। आरंभ में उसकी रुचि प्राणीशास्त्र की ओर आकृष्ट हुई। इस दृष्टि से उसने अपनी उपधि लेने के उपरांत स्पेंसर के विचारों का गहन अध्ययन करना प्रारंभ दिया था। इसी समय में वह प्रमुख अर्थशास्त्र वाल्टन हेमिल्टन के संपर्क में जाएगा। परिणामस्वरूप उसने अर्थशास्त्र के अध्ययन में अपनी रुचि विकसित की। बब्लेन व मार्क्स के विचारों का उसने इस दृष्टि से गहन अध्ययन किया। उसने आध्यात्मक अर्थशास्त्र में अनेक पुस्तकें पढ़ी। इसके बाद उसने अध्यापन कार्य की अपना ध्यान आकर्षित किया। इसके फलस्वरूप उसे येल (Yale) विश्वविद्यालय के कानून के स्कूल में अध्यापक कार्य मिल गया। यहाँ उसने अर्थशास्त्र का विषय ही पढ़ाया।
सन् 1927 में पारसन्स ने अपनी शोधप्रबंध प्रेषित कर दिया। इस शोध प्रबंध पर पारसन्स को पी एच.डी. की उपाधि से विभूषित किया गया। यह उपाधि उसे हैडलवर्ग विश्वविद्यालय से प्राप्त हुई। इसके शोध का विषय (दी कानसेफ्ट ऑफ केपिटेलीज्म इन दी थ्योरीज ऑफ मैक्स वेबर एंड सोमबार्ट) था। इसके पूर्व पारसन्स सन् 1924 ई. में लंदन गया। वहाँ उसने हाबहाउस, जिन्सबर्ग और मेलिनोवास्की आदि समाजशास्त्रियों से संपर्क एवं चर्चाएँ कीं। पारसन्स लंदन में एक वर्ष रहा। इस अवधि में उसने लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स में प्रवास किया यहाँ उसने मानवशास्त्रीय ग्रन्थों का पठन किया। लंदन में पारसन्स मेलिनोवास्की से बहुत प्रभावित हुआ।
लंदन में प्रवास के उपरानत पारसन्स को जर्मनी जाने का अवसर मिला। लंदन में वह अध्ययन समाप्त ही कर पाया था कि उसे जर्मनी के हैडलबर्ग विश्वविद्यालय में फेलोशिप प्राप्त हो गई।
यहाँ एक वर्ष तक पारसन्स ने मैक्स वेबर के विचारों का अध्ययन किया। इस दृष्टि से पारसन्स ने मैक्स वेबर के प्रोटेस्टेट धर्म और पूँजीवाद के संबंधों का व्यापक और गहन विश्लेषण किया। इस प्रकार पारसन्स ने अपने अध्ययन और अध्यापन काल में समाजशास्त्र के सभी प्रमुख विद्वानों के विचारों का गहन अध्ययन कर लिया। इसी अध्ययन पर कालांतर में पारसन्स का सारा कृतित्व विकसित हुआ।
सन् 1927 ई. में जर्मनी से शोध उपाधि प्राप्त करने के बाद पारसन्स अमेरिका चला गया। यहाँ उसकी हारवर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति हो गई। सन् 1927-1931 तक पारसन्स इसी विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य करते रहे। सन् 1936 ई. में इसी विश्वविद्यालय में पारसन्स को समाजशास्त्र का प्राध्यापक बना दिया गया। इस प्रकार सन् 1936 ई. में सन् 1944 तक पारसन्स ने समाजशास्त्र विभाग में विभिन्न पदों पर कार्य किया है। सन् 1946 ई. में हारवर्ड विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभा के अंतर्गत एक नया संस्थान खोला गया। इस संस्थान में सामाजिक संबंधों का विशेष अध्ययन करने का निश्चय किया गया। पारसन्स की इस संस्थान में समाजशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति हो गई।
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