शैक्षणिक जीवन - academic life

शैक्षणिक जीवन - academic life


इनके जीवन की परिस्थितियाँ कुछ भी रहीं हो, परंतु इन्होंने अपने अध्ययन के कार्य को जारी रखा। अर्थशास्त्र में इनकी रुचि उत्पन्न करने का श्रेय रोम विश्वविद्यालय के राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर पैंटालिवोनी को था। प्रोफेसर पैटालिवोनी उस समय के प्रख्यात अर्थशास्त्री वालरस के सच्चे प्रशंसक तथा भक्त थे और उन्होंने वालरस के सिद्धांतों पैरेटो बिल्कुल भी प्रभावित नहीं थे, परंतु जब उन्होंने प्रो. पैंटालिवोनी के लेखों को पढ़ा तो पैरेटो वालरस के प्रति अत्यधिक आकर्षित हुए. विशेषकर उनके (आर्थिक संतुलन के सिद्धांत) (Theory of Economic Equilibrium) से वे बहुत प्रभावित थे। वालरस के प्रति अपने विचारों में इस प्रकार के परिवर्तन के बारे में स्वयं पैरेटो ने लिखा है. "मैने वालरस को पढ़ा परंतु, उनकी कृतियों में मुझे तात्विक तर्कों के अतिरिक्त और कुछ भी न मिल सका, इस कारण निराश होकर मुझे उनका परित्याग करना पड़ा, परंतु फिर जब मैंने पैंटालिवोनी की पुस्तक में उनके बारे में पढ़ा तो मुझे अपना पहले वाला विचार बदलना पड़ा मैंने वालरस की कृतियों का फिर से अध्ययन किया और इस बार मुझे उसमें सोने का श्रोत मिला। "


इस समय सन् 1889 में माँ की मृत्यु ने पैरेटो के जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तन ला दिया था। माँ एवं चाचा की मृत्यु के बाद पैरेटो को पर्याप्त धन उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त हुआ, जिसके कारण इन्होंने लौह-उद्योग में प्रबंध निदेशक के पद का इस्तीफा दिया और जीजान से अध्ययन कार्य में लग गए। इसी बीच इन्होंने रूसी मूल कि युवती एलेसान्द्रिता से विवाह कर लिया तथा फीजोल (Fiesole) में जाकर बस गए। यहाँ उन्होंने न केवल विभिन्न भाषाओं के प्रमुख ग्रंथों का अध्ययन आरंभ किया, बल्कि वह अर्थशास्त्र के गंभीर अध्ययन में लग गए। इस अवधि में पैरेटो के गणितीय तथा सैद्धांतिक अर्थशास्त्र पर कुछ शोध पत्र भी प्रकाशित हुए। इनकी बहुत इच्छा थी कि ये इटली में राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हो जाएँ और इसलिए भी ये इन विषयों का गहन अध्ययन आरंभ कर दिए थे। कुछ संयोग भी ऐसा हुआ कि उनकी यह इच्छा बहुत दिनों तक अपूर्ण न रही। इस समय स्वीजरलैंड के तयुसाँना विश्वविद्यालय (Lausanne University) में वालरस राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे. परंतु अपनी अत्यधिक अस्वस्थता के कारण उन्हें बाध्य होकर अवकाश ग्रहण करना पड़ा। वे पहले से ही पैरेटो के गुणों से प्रभावित थे,

इस कारण उन्होंने अपने पद पर पैरेटो को नियुक्त करने की सिफारिश की यह बात पैरेटो के अनुकूल थी, क्योंकि जैसा इनका अतीत रहा है कि इनका और इटली सरकार के मध्य संपर्क पर्याप्त कटु था और दोनों ही एक दूसरे से छुटकारा पाना चाहते थे। इस कारण प्रो. वालरस के स्थान पर स्विजरलैंड के ल्युसाँना विश्वविद्यालय में राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के पद के लिए पैरेटो की नियुक्ति से इटली की सरकार तथा पैरेटो दोनों को ही राहत मिली। इस प्रकार सन् 1893 में उन्हें ल्युसाँना विश्वविद्यालय में राजनीतिक अर्थशास्त्र के अवशिष्ट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति दे दी गई। इससे इनके जीवन को नई दिशा मिली। एक तो वे इटली सरकार के विरोध से बच गए और दूसरे यहाँ इन्हें अर्थशास्त्र के सिद्धांतों का अध्ययन करने का व्यापक अवसर मिला यहीं मुसोलिनी एक विद्यार्थी के रूप में पैरेटो के संपर्क में आए थे। यह वही मुसोलिनी थे, जो कि आगे चलकर इटली के भाग्य विधाता फासिस्ट शासक बने थे।


इस प्रकार इंजीनियर पैरेटो अर्थशास्त्री पैरेटो बन गए। इस जीवन में इन्हें अत्यधिक सुख व शांति का अनुभव हुआ तथा इन्होंने स्वयं को पूरी तरह से अध्ययन व अध्यापन कार्य के प्रति समर्पित कर दिया।

इनका यह बौद्धिक परिश्रम सफल भी हुआ। अगले ही वर्ष अर्थात् सन् 1894 में इन्हें स्थायी प्रोफेसर बना दिया गया। पहले पहल एक वर्ष तक ये विशुद्ध अर्थशास्त्र (Pure Economics) व्याख्यान देते रहे, उसके पश्चात (Applied Economics) व्यावहारिक अर्थशास्त्र के विषय को पढ़ाते रहे। सन् 1896 में जब उनकी पुस्तक (कोर्स डि इकॉनोमी पॉलिटिक) (Course D Economics Politics) प्रकाशित हुई तब उन्हें इस विषय में संसार के प्रमुख विद्वानों में गिना जाने लगा। सन् 1887 से लेकर सन् 1898 तक इन्होंने के अर्थशास्त्र व समाजशास्त्र दोनों ही विषय को पढ़ाया। समाजशास्त्र संबंधी पैरेटो के विचार सर्वप्रथम सन् 1900 में रिविस्ता इटालियाना सोशियोलोजिया (Rivista Italiana Sociologia) में लिखे एक लंबे लेख में प्रकट हुए मिला। इनके इस लेखक को पढ़ने के पश्चात यह स्पष्ट होता है कि किस प्रकार सामाजिक क्रिया आर्थिक परिप्रेक्ष्य को प्रभावित करती है।


अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में पैरेटो यद्यपि उदारतावादी नीतियों के समर्थक रहे, लेकिन इस दौरान इनके जीवन में घटित अनेक घटनाओं के कारण वे स्वयं अपने विचारों को एकांकी समझने लगे। इसी बीच इन्हें दूसरा गहरा आघात तब पहुँचा जब एक भ्रमण से वापस लौटने पर इन्हें ज्ञात हुआ कि इनकी पत्नी बहुत से बहुमूल्य सामानों के साथ घर छोड़कर जा चुकी थी।

संभवतः इस घटना के प्रभाव से मनुष्य के बारे में इनकी भावना कुछ कठोर बनने लगी थी। इस आधार से पैरेटो 1890 में गंभीर रूप से के विमार पड़े और लगातार चार वर्षों तक शारीरिक व मानसिक रूप से बीमार रहें।


इस गंभीर अस्वस्थता के पश्चात ये स्वस्थ होकर वापस लौटे तथा पुनः ल्युसॉना विश्वविद्यालय में अपना कार्यभार ग्रहण किए। वापस आने के पश्चात इनकी विचार करने व समझने की प्रवृति में काफी परिवर्तन आ चुका था। ये मानव व्यवहार की विविधता को स्वीकार करते हुए इन्होंने सामाजिक अर्थशास्त्र (Social Economcis) विषय पर व्याख्यान देना प्रारंभ किए परंतु धीरे-धीरे इनके व्याख्यानों का मुख्य विषय अर्थशास्त्र से हटकर समाजशास्त्र पर केन्द्रित होता चला गया इसी बीच इनका यह भी प्रयत्न रहा कि सामाजिक अध्ययनों के पाठ्यक्रम में सुधार करने के साथ ही उसे इस तरह संयोजित किया जाये जिससे व्यक्ति का ध्यान उन सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारकों की ओर भी आकर्षित हो जो आर्थिक व्यवहारों के श्रोत हैं। इस समय अर्थशास्त्र के बारे में उन्होंने एक अवसर पर कहा कि (एक ही विषय वस्तु को बार-बार पढ़ने से मुझे लगता है कि जैसे मैं एक रटने वाला तोता बन गया हूँ।

यही से पैरेटो का जीवन अर्थशास्त्र से समाजशास्त्र की ओर बढ़ने लगा। अपनी इस स्थिति एवं परिवर्तन के कारणों को समझाते हुए पैरेटो ने लिखा है कि, (राजनीतिक अर्थशास्त्र में शोध कार्य को कुछ सीमा तक करने के पश्चात मुझे प्रतीत हुआ कि अब मैं आगे नहीं बढ़ सकता है। अनेक बाधाएँ मेरे सम्मुख थी और उनमें से सर्वप्रमुख बाधा समस्त प्रकार की सामाजिक घटनाओं में पाई जाने वाली अंतर निर्भरता और अन्तः संबंध थी। जिस प्रकार आज यह अनुभव किया जाता है कि रसायनशास्त्र और विद्युत-विज्ञान के सिद्धांतों में अन्तः संबंध है उसी प्रकार यह स्पष्ट है कि किसी भी एक सामाजिक घटना का अध्ययन दूसरों से पृथक करके नहीं किया जा सकता। तथा किसी एक कारक के आधार पर ही समाज की विवेचना नहीं की जा सकती। ( दूसरे शब्दों में, किसी भी सामाजिक घटना का वास्तविक अध्ययन तभी सम्भव है जबकि दूसरी घटनाओं से संबंधित मानकर उसका अध्ययन किया जाये। इस प्रकार पैरेटो के बौद्धिक जीवन ने एक करवट बदली और अर्थशास्त्री विल्फ्रेडो पैरेटो समाजशास्त्री विल्फ्रेडो पैरेटो में परिवर्तित हो गए।


इस प्रकार उपर्युक्त परिवर्तन के पश्चात पैरेटो ने (राजनीतिक समाजशास्त्र) के क्षेत्र में अध्ययन आरंभ किया. यद्यपि कुछ सीमा तक उनकी रुचि आर्थिक और सामाजिक सिद्धांतों के इतिहास में भी बनी रही।

इस समय तक पैरेटो की यह धारणा बनने लगी कि मानव व्यवहारों का अधिकांश भाग विवेक से संचालित न होकर अनेक भावनाओं, संवेगों, अन्ध विश्वासों और इसी तरह के अतार्किक विचारों से प्रभावित होता है। उन्होंने यह अनुभव किया कि आर्थिक उदारतावाद के प्रति उसके परिवार तथा मित्रों द्वारा जिन तर्कों पर उनका विरोध किया जाता रहा. वे पूरी तरह से अतार्किक है। साथ ही जनसाधारण के व्यवहार जिन तर्कों पर आधारित होता है वे अनेक अतार्किक विश्वासों, भावनाओं, भय और इसी तरह के संवेगों से प्रभावित होते हैं।


पैरेटो के इन कथनों व विचारों की संपुष्टि तथा इन धारणाओं का स्पष्ट रूप इनकी पुस्तक (सामाजिक व्यवस्था) (Le systems Socialist ) द सोशल, सिस्टम में देखने को मिलता है जो सन् 1802 में प्रकाशित हुई थी। अपनी बिमारी से पुनः विश्वविद्यालय लौटने पर इन्होंने एक अन्य पुस्तक (मैनुअल ऑफ पॉलिटिकल इकॉनमी) (Manual of Political Economy) लिखना प्रारंभ किया जो सन् 1906 मे प्रकाशित हुई,

जिसका सन् 1909 में फ्रेंच भाषा में अनुवाद कर प्रकाशित किया गया। इस पुस्तक में भी पैरेटो ने अतार्किक भावनाओं, विश्वासों व अंधविश्वासों के संदर्भ में लिखा है।


समय बीतने के साथ पैरेटो बहुत ज्यादा कमजोर हो गए तथा अस्वस्थ रहने लगे। शारीरिक कमजोरी के कारण आखिरकार 1909 में उन्हें ल्युसॉना विश्वविद्यालय से प्रोफेसर पद से इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने ल्युसाँना नगर के पास ही सेलिगनी (Celigny) में जिस ग्रामीण ढंग के बंगले का निर्माण कराया था. उसी में जाकर रहना आरंभ कर दिया। यही उनकी रुचि निरंतर समाजशास्त्र के अध्ययन की ओर अग्रसारित होती गई। इस समय इन्होंने समाजशास्त्रीय चिंतन में जो योगदान किया वह 1915 में प्रकाशित उनकी पुस्तक (ट्रीटीज इन जनरल सोशियोलॉजी) (Treatise on General Sociology) यानि सामान्य समाजशास्त्र पर लेख में देखने को मिलता है। बाद में अंग्रेजी भाषा में यह पुस्तक (The Mind and Society) के नाम से सन् 1935 में प्रकाशित हुई।


अपने जीवन के अंतिम दिनों में पैरेटो व्यक्तिगत समस्याओं में ज्यादा उलझे रहें। सन् 1900 में पैरेटो की प्रथम पत्नी उन्हें छोड़कर चली गई थी। उस समय इटली के कानून के अनुसार विवाह-विच्छेद को मान्यता नहीं प्राप्त था। अतः इन्होंने न्यायायिक पृथक्करण प्राप्त किया। तब उनके जीवन में एक नई स्त्री जेन रेगिस (Jane Regis) आई। उसी के स्नेहपूर्ण देखभाल के उपलक्ष्य में पैरेटो ने (ट्रीसीज) उसे समर्पित किया। अपने इस नये संबंध को वैधानिकता देने के लिए पैरेटो ने नगर राज्य (सिटी स्टेट) फियूम (Fiume) की नागरिकता ग्रहण की. क्योंकि वहाँ विवाह विच्छेद स्वीकृत था। इस प्रकार 1923 में इन्होंने जेन रेगिस को अपनी पत्नी बना लिया। अन्ततः 75 वर्ष की आयु में, रोम में फासिस्टों के प्रवेश के दस माह बाद 1923 में ही इनकी मृत्यु हो गई ।