शिक्षा का उद्देश्य - aim of education

 शिक्षा का उद्देश्य - aim of education


उद्देश्यों के दृष्टिकोण से शिक्षा के उद्देश्यों को मुख्यतः दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है. पहला व्यापक रूप में तथा दूसरा संकुचित रूप में व्यापक रूप में शिक्षा किसी समाज में सदैव चलने वाली सोद्देश्य सामाजिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा मनुष्य की जन्मजात शक्तियों का विकास, उसके ज्ञान एवं कौशल में वृद्धि एवं व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है और इस प्रकार उसे सभ्य, सुसंस्कृत एवं योग्य नागरिक बनाया जाता है। मनुष्य क्षण प्रतिक्षण नए-नए अनुभव प्राप्त करता है व करवाता है, जिससे उसका दिन-प्रतिदन का व्यवहार प्रभावित होता है। उसका यह सीखना सिखाना विभिन्न समूहों, उत्सवों, पत्र-पत्रिकाओं, दूरदर्शन आदि से अनौपचारिक रूप से होता है। यही सीखना सिखाना शिक्षा के व्यापक तथा विस्तृत रूप में आते हैं।

संकुचित परिप्रेक्ष्य में शिक्षा किसी समाज में एक निश्चित समय तथा निश्चित स्थानों (विद्यालय, महाविद्यालय) में सुनियोजित ढंग से चलने वाली एक सोद्देश्य सामाजिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा छात्र निश्चित पाठ्यक्रम को पढ़कर अनेक परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना सीखता है।


प्राचीन भारत में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य मुक्ति की कामना रही है शंकराचार्य ने शिक्षा या जिसे विद्या के रूप में भी जाना जाता रहा हैं के सन्दर्भ में कहा है कि सा विद्या या विमुक्तये' अर्थात विद्या उसे कहते हैं जो विमुक्त कर दें। बाद में समय के रूप बदलने से शिक्षा ने भी उसी तरह उद्देश्यों में परिवर्तन कर लिया।