विवाह के उद्देश्य या महत्व - Aims or Importance Marriage

विवाह के उद्देश्य या महत्व - Aims or Importance Marriage


मरडाक ने 250 समाजों का अध्ययन करने पर सभी समाजों में विवाह के तीन उद्देश्यों का प्रचलन पाया।


(1) यौन संतुष्टि 


(2) आर्थिक सहयोग


(3) संतानोत्पत्ति समाजीकरण एवं लालन-पोषण। 


संक्षेप में विवाह के उद्देश्यों को हम निम्न प्रकार से प्रकट कर सकते हैं -


1. यौन इच्छाओं की पूर्ति एवं समाज में यौन क्रियाओं का नियमन करना।


2. परिवार का निर्माण करना एवं नोतदारी का विस्तार करना।


3. वैध संतानोत्पत्ति करना व समाज की निरंतरता को बनाए रखना।


4. संतानों का लालन-पालन एवं समाजीकरण करना।


5. स्त्री पुरुषों में आर्थिक सहयोग उत्पन्न करना।


6. मानसिक संतोष प्रदान करना।


7. माता-पिता एवं बच्चों में नवीन अधिकारों एवं दायित्वों को जन्म देना। 


8. संस्कृति का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरण करना।


9. धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक उद्देश्यों की पूर्ति करना।


10. सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना।


इस प्रकार स्पष्ट है कि विवाह केवल वैयक्तिक संतुष्टि का साधन मात्र ही नहीं है वरन् यह एक सामाजिक क्रियाविधि भी है। जिससे समाज की संरचना को सुदृढता प्राप्त होती है। मजूमदार और मदान का कहना है कि विवाह से वैयक्तिक स्तर पर शारीरिक (यौन) और मनोवैज्ञानिक (संतान प्राप्ति) संतोष प्राप्त होता है।