आधुनिकीकरण एवं शिक्षा के आयाम - Aspects of Education and Modernzation
आधुनिकीकरण एवं शिक्षा के आयाम - Aspects of Education and Modernzation
यह स्पष्ट है की समाज को आधुनिक बनाने में एक आधारभुत एवं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा आधुनिकीकरण कराती है एवं स्वयं भी आधुनिक बनती है। आधुनिकीकरण यह शिक्षा और समाज की व्यवस्थाओं के अंतःक्रियाओं का प्रतिफल है। राष्ट्रिय शिक्षा आयोग (1964-66) के अनुसार शिक्षा, आधुनिकीकरण एवं सामाजिक व्यवस्थाओं के संबंध में आधारभूत तत्व निम्नांकित है
1. ज्ञान का विस्फोट
ज्ञान में दिन प्रतींदिन हो रही बढ़ोतरी के कारण ज्ञान का विस्तार हो रहा है। नावनविन शोध के कारण ज्ञान का प्रस्पोट हो रहा है। ज्ञान के विस्तार के कारण समाज के मूल्य, आदर्श, उपव्यवस्थाओं में परिवर्तन हो रहा है। यह परिवर्तन आधुनिकीकरण की ओर समाज को ले जा रहा है।
शिक्षा में नवीनीकरण की प्रक्रिया समाज में नवीनीकरण की प्रक्रिया को गतिमान करती है जिससे आधुनिकीकरण की प्रक्रिया अधिक गतिमान होती है।
2. सामाजिक परिवर्तन में होनेवाली जल्दबाजी
ज्ञान के प्रस्पोट के कारण समाज में परिवर्तन होता है। समाज की आकांक्षा एवं आवश्यकता के अनुसार शिक्षा को स्वयं में परिवर्तन करना अनिवार्य होता है। समाज की आवश्यकता के अनुसार शिक्षा को भी जल्दी- जल्दी आधुनिक बनाना आवश्यक है। आधुनिक समाज की आवश्यकता एवं आकांक्षा के अनुसार शिक्षा नीतियों में बदलाव लाना जरूरी होता है।
लोकतांत्रिक भारतीय समाज की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, राजनैतिक आदि क्षेत्र की आवश्यकता की पूर्ति हेतु शिक्षा में नवीनीकरण का स्वीकार करना अनिवार्य है। अभिवृत्ति अभिरुचि, तर्क क्षमता, जिज्ञासा आदर्श मूल्य नेतृत्व क्षमता, निर्णय क्षमता, आधुनिक शिक्षण प्रशिक्षण आदि उद्देश्यों पर आधारित नवीनतम शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना आधुनिकीकरण के निर्माण के लिए आवश्यक है।
3. शीघ्र उन्नति की आवश्यकता
आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का आरंभ एवं पूर्ति के दरम्यान जो संक्रमणकाल होता है वह अधिक महत्वपूर्ण होता है। संक्रमणकाल में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को गति प्रदान करना आवश्यक है। संक्रमणकाल में पारंपारिकता नवीनीकरण पर हावी हो सकता है। राष्ट्रिय शिक्षा आयोग के अनुसार संक्रमणकालिन समस्याओं का समाधान के लिए गति से नवीनीकरण का क्रियान्वयन करना आवश्यक है।
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