शोध समस्या की परख - Assay of Research Problems
शोध समस्या की परख - Assay of Research Problems
शोध समस्या को चयनित करने के उपरांत उसके निर्वचन की समस्या सम्मुख आती है। शोधकर्ता समस्या के निरूपण से पूर्व तक इस बात से अनजान रहता है कि वस्तुतः उसे क्या करना है एवं किन तथ्यों को खोजना है। डॉ सुरेंद्र सिंह द्वारा रचित पुस्तक 'सामाजिक अनुसंधान' में शोधकर्ता को निम्न प्रश्न स्वयं से पूछने के लिए कहा गया है-
1. जिस तरह की जानकारी हम प्राप्त करना चाहते हैं इसकी प्राप्ति किन-किन साधनों, स्रोतों एवं तरीकों का उपयोग करते हुए हो सकती है?
2. इस जानकारी से जिसे हम उपलब्ध कराना चाहते हैं, कितने लोग लाभान्वित हो सकते हैं? क्या यह ज्ञान प्राप्त करना इस पर होने वाले की नजर से ठीक है?
3. इस जानकारी की पृष्ठभूमि में अगर कोई हो, क्या जानकारी और अर्जित करना चाहते हैं तथा क्यों यह जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं?
4. इस जानकारी के अलग-अलग स्रोत क्या हैं तथा उनकी विश्वसनीयता एवं प्रमाणिकता की हद क्या है?
5. क्या इन परिकल्पनाओं के अंदर प्रयुक्त किए जाने वाले अवधारणाओं, चरों, वाक्य-विन्यासों इत्यादि की स्पष्ट परिभाषाएं प्राप्त हो सकेंगी तथा क्या ये प्रायोगिक नजरिए से उपयुक्त होंगी?
6. जो जानकारी हम प्राप्त करना चाहते हैं उसकी प्राप्ति के लिए किए जाने वाले प्रयासों का पथ प्रदर्शन किस तरह की मान्यताओं एवं परिकल्पनाओं द्वारा किया जाएगा?
7. शोध समस्या के संबंध में उसकी जानकारी कितनी है?
8. जिस तरह की जानकारी हम प्राप्त करना चाहते हैं इस पर कितने धन, समय एवं प्रयासों के व्यय की आवश्यकता होगी तथा क्या व्यय के अनुसार हमें परिणाम मिलेंगे?
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