सहचर्य परीक्षण - associative test

 सहचर्य परीक्षण - associative test


इस परीक्षण कुछ पहले से ही निश्चित उद्दीपक शब्द होते है। इन पूर्व निश्चित शब्द उद्दीपकों को एक-एक करके प्रयोज्य को सुनाया जाता है। इन सभी शब्दों को सुनने के बाद उस व्यक्ति या प्रयोज्य के मन में जो शब्द सर्वप्रथम आता है, उस शब्द को उसे प्रयोगकर्ता को बताना होता है। इस परीक्षण का उपयोग रूप से सिगमण्ड फ्रायड और उनके शिष्य कार्ल युंग द्वारा किया गया। शब्द साहचर्य परीक्षण के माध्यम से युंग ने व्यक्ति की सांवेगिक समस्याओं का सफलतापूर्वक निदान किया। इस सफलता से प्रभावित होकर अमेरिका में केन्ट तथा रोजेन्फ द्वारा सन् 1910 में तथा रैपपोर्ट द्वारा सन् 1946 में दूसरे शब्द साहचर्य परीक्षण का निर्माण किया गया।

इन परीक्षणों का प्रयोग साधारण मानसिक रोग से ग्रसित व्यक्तियों के व्यक्तित्व को मापने में मुख्य रूप से किया गया।


1. रोशार्क परीक्षण प्रक्षेपण परीक्षणों में रोशार्क परीक्षण सर्वाधिक लोकप्रिय परीक्षण है। इस परीक्षण का प्रतिपादन स्विट्जरलैण्ड के मनोश्चिकित्सक हरमान रोशार्क द्वारा सन् 1921 में किया गया था।


2. संरचना परीक्षण


मनोवैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्षेपी विधियों में दूसरी महत्वपूर्ण विधि संरचना परीक्षण है। संरचना परीक्षण में व्यक्ति को परीक्षण उद्दीपकों के आधार पर एक कहानी अथवा अन्य समान चीजों की संरचना करनी होती है। संरचना परीक्षणों में सर्वाधिक लोकप्रिय परीक्षण कोनजर है?

विषय आत्मबोध परीक्षण जिसको TAT (Thematic Apperception Test) के नाम से जाना जाता है। सबसे अधिक प्रसिद्ध संरचना परीक्षण है। TAT का विस्तृत विवेचन निम्नानुसार है TAT (The Tatic Apperception Test) TAT का निर्माण मरे द्वारा सन् 1935 में हारवर्ड विश्वविद्यालय में किया गया था। इसके बाद सन् 1938 में मोर्गन के साथ मिलकर उन्होंने इस परीक्षण का संशोधन किया। TAT परीक्षण से संबंधित मुख्य बातें निम्नानुसार हैं-


1. TAT में उद्दीपक या परिस्थितियों रोशार्क परीक्षण की तुलना में अधिक स्पष्ट होती है। अत: यह रोशार्क परीक्षण से थोड़ा भिन्न है।


2. इस परीक्षण में कुल 31 कार्ड होते है, जिनमें से 30 कार्ड पर चित्र बने होते हैं तथा एक कार्ड साद होता है।


3. TAT परीक्षण का प्रयोग करते समय, जिस व्यक्ति के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है। उसकी आयु तथा यौन के अनुसार 31 में से 20 कार्ड को चुन लिया जाता है।


4. इन 20 कार्ड में 19 कार्ड पर चित्र होते हैं तथा एक कार्ड सादा होता है।


5. किसी एक व्यक्ति को 20 कार्ड से अधिक नहीं दिये जाते हैं।


6. प्रयोज्य को प्रत्येक कार्ड के चित्र को देखकर एक कहानी लिखने को कहा जाता है। इस कहानी में चित्र से संबंधित घटना के भूत, वर्तमान, एवं भविष्य तीनों कालों का वर्णन होता है।


7. टैट का क्रियान्वयन परीक्षणकर्ता दो सत्रों में करता है।


8. प्रथम सत्र में 10 कार्ड और द्वितीय सत्र में भी 10 कार्ड देकर प्रयोज्य को उन कार्ड के आधार पर में कहानी लिखने को कहा जाता है। 


9. 19 कार्ड देने के बाद सबसे अन्त में सादा कार्ड दिया जाता है और उस कार्ड पर अपने मन से किसी चित्र को मानकर उस आधार पर कहानी लिखने को कहा जाता है।


10. मरे का मत है कि TAT के इन दो सत्रों के बीच कम से कम 24 घंटे का अन्तर होना चाहिये। 11. जब प्रयोज्य कहानी लिखने का कार्य पूरी कर लेता है तो परीक्षणकर्ता एक साक्षात्कार लेता है। इस साक्षात्कार का उद्देश्य यह जानना होता है कि कहानी लिखने में व्यक्ति की कल्पना शक्ति का स्रोत क्या हैं? कार्ड पर अंकित चित्र अथवा चित्र के अतिरिक्त अन्य कोई घटना अथवा परिस्थिति।


कहानी लेखन के उपरान्त परीक्षणकर्ता इन कहानियों का विश्लेषण करके उस व्यक्ति के व्यक्तित्व का आंकलन करता है। मेरे के मतानुसार इस परीक्षण का विश्लेषण इन आधारों पर किया जाता है-


1. नायक सर्वप्रथम परीक्षणकर्ता प्रत्येक कहानी में नायक या नायिका कौन है. इस बात का पता लगाता है। कहानी में जिस पात्र की मुख्य भूमिका होती है उसको नायक या नायिका कहते हैं। ये भी संभव है कि कभी-कभी एक ही कहानी में एक से अधिक नायक या नायिका हो। इस परीक्षण में ऐसा माना जाता है कि प्रयोज्य नायक अथवा नायिका के साथ आत्मीकरण (identification) स्थापित कर लेता है और अपनी महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को अभिव्यक्त करता है।


2. आवश्यकता नायक या नायिका का पता लगाने के बाद यह जानने की कोशिश की जाती है कि उस नायक या नायिका का प्रमुख आवश्यकतायें क्या-क्या हैं क्योंकि अप्रत्यक्ष रूप से नायक-नायिका के माध्यम से उस व्यक्ति की आवश्यकतायें अभिव्यक्त होती है, जिसमें व्यक्तित्व का मापन किया जा रहा है। मरे के अनुसार टैट द्वारा 28 प्रकार की आवश्यकताओं का मापन संभव है। कुछ प्रमुख आवश्यकतायें निम्न हैं- 


1 उपलब्धि की आवश्यकता


2 प्रभुत्व की आवश्यकता


3 संबंधन की आवश्यकता


3. प्रेस मर्रे के अनुसार प्रेस से यहाँ पर आशय वातावरण संबंधी बलों से है। इनके कारण कहानी के नायक या नायिका की आवश्यकतायें या तो पूरी हो जाती हैं अथवा पूरी होने से वंचित रह जाती है। मर्रे के अनुसार ऐसे वातावरण संबंधी बलों की संख्या 30 से भी ज्यादा है, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नानुसार हैं-


1 शारीरिक खतरा


2 आक्रमण या आक्रामकता- ये दो महत्वपूर्ण प्रेस हैं।


4. थीमा प्रेस के निर्धारण के बाद टैअ के अगले चरण में थीमा का निर्धारण किया जाता है। थीमा से क्या आशय है? थीमा का तात्पर्य हैं- “नायक या नायिका की आवश्यकता तथा पेरस (वातावरण संबंधी बल) में हुयी अन्तः क्रिया से उत्पन्न घटना। मर्रे के अनुसार थीमा द्वारा व्यक्तित्व में निरन्तरता का ज्ञान होता है।


5. परिणाम TAT के अगले चरण में कहानी के परिणाम का पता लगाया जाता है अर्थात् कहानी का समापन किस प्रकार से किया गया है. कहानी का निष्कर्ष किस प्रकार का है? निश्चित अथवा अनिश्चित । कहानी का परिणाम यदि निश्चित एवं स्पष्अ है तो इससे प्रयोज्य के व्यक्तित्व की परिपक्वता एवं वास्तविकता का ज्ञान होने की क्षमता का बोध होता है। आपकी जानकारी के लिये बता दें कि TAT का हिन्दी अनुकूलन कलकत्ता के प्रो, उमा चौधरी ने किया है। भारतीय संदर्भ में अधिकांशतः उसी का प्रयोग किया जा रहा है। TAT के अतिरिक्त भी कुछ अन्य संरचना परीक्षण है, जो हैं