मनोवृत्ति - attitude

मनोवृत्ति - attitude


मनोवृत्ति एक महत्वपूर्ण सम्प्रत्यय है जिसका अध्ययन मनोविज्ञान में वर्षों से हो रहा है। मनोवृत्ति व्यावहारिक रूप से मनोविज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है जैसे. पूर्वाग्रह एवं भेदभाव, अनुपालन, अनुरूपता, अन्तर्वैयक्तिक आकर्षण इत्यादि / मनोवृत्तिको प्रारम्भ में एक विमा के आधार पर परिभाषित किया गया था। प्रारंभ में, मूल्यांकन पक्ष के आधार पर मनोवृत्ति को इस प्रकार परिभाषित किया किया (Gergen.1974)- “विशिष्ट वस्तुओं के प्रति विशेष रूपों में व्यवहार करने की प्रवृत्ति को मनोवृत्ति कहते हैं।"


इस प्रकार दूसरे विद्वानों जैसे कि फिशवीन और आजिन(1975) ने “किसी वस्तु के प्रति संगत रूप से अनुकूल या प्रतिकूल अनुक्रिया करने की अर्जित पूर्ववृत्ति को मनोवृत्तिकहा है।" मनोवृत्ति वस्तु’ से शब्द के अंतर्गत व्यक्ति, घटना, मुद्दों आदि को शामिल किया जा सकता है। जब हम पसंद ना पसंद इत्यादि शब्दों का उपयोग करते हैं तब हम मनोवृत्तिका वर्णन कर रहे होते हैं। इस दृष्टि कोण के मनोवृत्ति किसी व्यक्ति, समूह, क्रिया, वस्तु या घटना का मूल्यांकन है। अनुसार,


समाज मनोवैज्ञानिकों का एक समूह ऐसा भी है जिसने मनोवृत्तिको भाव पक्ष (affect-aspect) के आधार पर परिभाषित किया है जैसे- एडवार्डस (1957) के अनुसार किसी मनोवैज्ञानिक वस्तु से सम्बद्ध सकारात्मक या नकारात्मक भाव की मात्रा को मनोवृत्ति कहा जाता है।"


थर्स्टन (1946) ने भी मूल्यांकन के आयाम पर मनोवृत्तिको परिभाषित किया है। थर्स्टन के अनुसार, "किसी मनोवैज्ञानिक वस्तु के पक्ष या विपक्ष में धनात्मक या ऋणात्मक भाव की तीव्रता को मनोवृत्तिकहते हैं।" बाद के मनोवैज्ञानिको ने मूल्यांकन आयाम को मनोवृत्ति के तीन घटकों में शामिल किया है जिसे भावात्मक सं घटक कहते हैं। मनोवृत्तिको दो संघटकों के आधार पर भी परिभाषित किया गया है। वे दो आयाम है भावात्मक संघटक तथा संज्ञानात्मक संघटक भावात्मक संघटक से तात्यर्य किसी वस्तु, प्राणी या घटना इत्यादि के प्रति सुखद या दुखद भाव की तीव्रता से है जबकि संज्ञानात्मक संघटक से तात्पर्य किसी वस्तु, प्राणी या घटना इत्यादि के प्रति विश्वास से है।


आधुनिक मनोवैज्ञानिकों ने मनोवृत्तिको तीन आयामों के आधार पर परिभाषित किया है। इन तीन आयामों में पूर्व के दोनों आयाम अर्थात भावात्मक संघटक तथा संज्ञानात्क संघटक को तो शामिल किया ही गया है साथ ही एक अन्य तीसरा आयाम भी जोड़ा गया है जिसका नाम है:


व्यवहारात्मक संघटक व्यवहारात्मक संघटक से तात्पर्य किसी वस्तु प्राणी या घटना इत्यादि के प्रति क्रिया या व्यवहार करने की तत्परता से है। सियर्स और उनके साथियों (Scarsetal. 1991)ने मनोवृत्तिके उपरोक्त तीनों आयामों को ध्यान में रखकर परिभाषित किया है। इनके अनुसार, "मनोवृत्तिवह स्थायी प्रतिक्रिया की प्रवृत्ति है, जिसमें संज्ञानात्मक, भावात्मक तथा व्यवहारात्मक संघटक शामिल होते हैं।"