जीवन परिचय एवं कृतियाँ - Biography and Works
जीवन परिचय एवं कृतियाँ - Biography and Works
अमेरिका के प्रसिद्ध समाजशास्त्री राबर्ट के. मर्टन का जन्म फिलाडेल्फिया, पेन्सिलवेनिया में 5 जुलाई. 1910 को हुआ। उनके माता-पिता पूर्वी यूरोप के मूल निवासी थे। वे पोलैंड के दक्षिणी हिस्से के रहने वाले थे। मर्टेन के पिता लंबे समय तक ट्रक ड्राइवर का कार्य करते रहे। कुछ समय तक उन्होंने बढ़ई का भी कार्य किया। मर्टन के आठ बहन-भाई थे। इनका बाल्यकाल दक्षिण फिलडेल्फिया की गंदी बस्तियों में बीता। वे अपनी बस्ती के युवा गिरोह के सदस्य थे तथा बस्ती में होने वाली लड़ाई-झगड़ों में शामिल रहते थे, लेकिन ज्ञान व अध्ययन की उन्हें आकांक्षा थी, जिसके लिए वह स्थानीय सार्वजनिक पुस्तकालय जाते थे। आठ वर्ष की अवस्था में ही उन्होंने कई विषयों में व्यापक अध्ययन किया विशेष रूप से जीवन कृतियाँ पढ़ने में उनकी काफी रुचि थी. कभी-कभी पैसा कमाने के उद्देश्य से बस्ती के सामाजिक समारोहों में वह जादू के खेल भी दिखाया करते थे।
मर्टन ने फरवरी, 1927 में साउथ फिलाडेल्फिया हाईस्कूल से परीक्षा पास की। वे मेधावी छात्र थे, एक छात्रवृत्ति के आधार पर टेंपलटन विश्वविद्यालय में अध्ययन करने का अवसर मिला। वह इस विश्वविद्यालय के कुशाग्र छात्र साबित हुए। पहले वर्ष उन्होंने दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया और उन्हें टेंपल युनिवर्सिटी के डीन व दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर जेम्स डनहम का संरक्षण मिला। बाद में उन्होंने अपने अध्ययन का विषय बदलकर समाजशास्त्र किया। 1931 में वे स्नातक हो गए तथा हावर्ड विश्वविद्यालय आ गए. हावर्ड में स्नातक कार्य के लिए फेलोशिप से सम्मानित किया गया।
इसके पहले उन्होंने जार्ज ई. सिपसन के साथ समाज की प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की थी। बाद में वे सिंपसन के रिसर्च असिस्टेंट बन गए। हावर्ड विश्वविद्यालय में मर्टन को टॉलकट पारसन्स जार्ज सरटॉन, पितरिम सोरोकिन और एल. के. हेंडरसन जैसे उच्च कोटि के प्रोफेसरों के साथ अध्ययन करने का अवसर मिला जिसका उन्होंने पूरा-पूरा लाभ उठाया और अपने अध्ययन में श्रेष्ठता अर्जित की।
टेंपलटन में पढ़ते समय मर्टन की सुजैन एम. कारहट से मुलाकात हुई। वे एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं। 8 सितंबर, 1934 को उन्होंने उनसे विवाह किया. विवाह के तुरंत बाद वे हार्वड में अध्यापक के पद पर नियुक्त हो गए। मर्टन एक पारिवारिक व्यक्ति रहे उनके दो पुत्रियाँ व एक पुत्र हैं। इनका जुड़ाव अपने परिवार के प्रति अधिक रहा. उनकी एक पुस्तक (On the Shoulders of Joints) (1965) अपने बच्चों को समर्पित की गई है।
1936 में उन्होंने पी.एच.डी. का सफल शोध पत्र प्रस्तुत किया। मर्टन बौद्धिक जीवन की गतिविधियों के कारण अपना पारिवारिक जीवन कभी भी बाधित नहीं किया।
एक समाजशास्त्री के रूप में इनकी सोंच अलग-अलग क्षेत्रों में रही है, जैसे विज्ञान और व्यवसाय का समाजशास्त्र, समाजशास्त्रीय सिद्धांत और लोक संचार आदि।
1939 से 1941 के बीच आर. के. मर्टन ने न्यू आर्लीन्स राज्य के टूलैन विश्वविद्यालय में संकाय सदस्य के रूप में कार्य किया। 1941 में वे कोलम्बिया विश्वविद्यालय में शिक्षक हो गए तथा 1947 में पूर्ण प्रोफेसर बने। 1963 में कोलम्बिया विश्वविद्यालय में एफ. एच. गिडिंग्स चेयर के प्रोफेसर नियुक्त हुए। 1942 से 1971 तक उन्होंने (युनिवर्सिटी ब्यूरो ऑफ एप्लाइड सोशल रिसर्च) के एसोसिएट डायरेक्टर के रूप में कार्य किया।
कोलम्बिया में इनकी जोड़ी पाल. एफ. लजस फेस्ट के साथ खूब जमी, इसका प्रमुख कारण यह भी था कि दोनों ही अमेरिका में पूर्वी यूरोप मूल के बाहरी थे। लजस फेस्ट की तर्क स्पष्टता की अवधारणा और परिमाणात्मक तथा गुणात्मक अनुसंधान की उसकी विचार पद्धति ने मर्टन के ऐतिहासिक अध्ययन के दृष्टिकोण को प्रभावित किया।
इस सहयोग और बौद्धिक आदान-प्रदान से उन्होंने सामाजिक विज्ञानों का स्तर सुधारने के तरीके पर महत्वपूर्ण शोध कार्य किया तथा शोध लेख लिखे।
इस प्रकार मर्टन और लाजर्सफेल्ड ने लगभग 1941 से 1976 तक कोलम्बिया विश्वविद्यालय में एक प्रतिभाशाली टीम बनाई और बहुत से विद्यार्थियों को प्रेरणा दी। 23 फरवरी 2003 में आर. के. मर्टन की मृत्यु हो गई।.
वार्तालाप में शामिल हों