ब्रुसेल्स, महत्वपूर्ण कृतियाँ - Brussels, Important Works
ब्रुसेल्स, महत्वपूर्ण कृतियाँ - Brussels, Important Works
कार्ल मार्क्स ने अपने जीवन में खूब लेखन का काम किया। संभवतः उनकी प्रथम गंभीर पुस्तक अर्थशास्त्र एवं दर्शन संबंधी पांडुलिपि 1844 थी जो कुछ समय बाद खो गई वह बाद में मिली एवं 1932 में उसे गुद्रीसे नाम से प्रकाशित किया गया। 1845 में एंगेल्स के साथ मिलकर मार्क्स ने पहले जर्मन दार्शनिकों की आलोचना करते हुए द होली फैमिली और फिर जर्मन आइडियोलॉजी नामक पुस्तकें लिखी। 1847 में उन्होंने प्रुदो की पुस्तक द फिलासफी ऑफ पावर्टी की निर्मम आलोचना करते हुए दि पावर्टी ऑफ फिलासफी पुस्तक लिखी। 1848 में मार्क्स और एंगेल्स ने कम्युनिष्ट मैनीफेस्टो लिखा। इसके बाद 1850 में रेवोलुशन ऑफ दि एन्टीथ ब्रुमेयर लिखा
1859 में उन्होंने द कंट्रीब्यूशन टु दि क्रिटिक आफॅ पोलिटिकल इकोनॉमी लिखी।
इस पुस्तक में उन्होंने समाजशास्त्रीय आधारों की विस्तार से चर्चा की। 1867 में उनकी सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक दास कैपिटल का प्रकाशन हुआ।
उनके जीवनकाल में उनकी कोई अन्य पुस्तक प्रकाशित न हो सकी। उनकी तैयारी पांडुलिपियों के आधार पर उनके मित्र फ्रेडरिक एंगेल्स ने पूँजी का द्वितीय एवं तृतीय खंड प्रकाशित किया। इन्हीं पुस्तकों से जुड़ी हुई मार्क्स की एक पुस्तक दि थियरी ऑफ सरप्लस वैल्यू का प्रकाशन भी एंगेल्स ने करवाया।
1. दर्शन की दरिद्रता (Poverty of Philosophy)- मार्क्स के समकालीन विचारकों में प्रोधों (Prodhon) एक प्रमुख अराजकतावादी विद्वान थे। प्रोधों पर कोपोकिन के विचारों का प्रभाव पड़ा था। अतः प्रोधों तथा दूसरे अराजकतावादी विद्वान सत्ता को एक आवश्यक बुराई के रूप में देखते थे। संभवतः इसीलिए यह विद्वान मार्क्स के इस विचार से सहमत नहीं थे प्रोधों ने एक पुस्तक लिखी जिसका नाम दरिद्रता का दर्शन ( Philosophy of Poverty) था। इस पुस्तक में प्रोधों ने दरिद्रता के बारे में अपने तार्किक विचार प्रस्तुत किए थे। मार्क्स ने यह महसूस किया कि प्रोधों की यह पुस्तक सर्वहारा वर्ग की क्रांति में बाधक हो सकती है। अतः इस पुस्तक के प्रन्युत्तर में उन्होंने 'दर्शन की दरिद्रता' नामक पुस्तक लिखी जिसमें उन्होंने न केवल प्रोधों के विचारों का खंडन किया बल्कि यह भी बताया कि प्रोधों का अराजकतावादी दर्शन कितना दुर्बल है। मार्क्स की इस पुस्तक का प्रकाशन सर्वप्रथम सन् 1847 में हुआ।
2. साम्यवादी घोषणा-पत्र ( Communist Manifesto) साम्यवादी लोग की दूसरी बैठक सन् 1847 में हुई। इस बैठक में मार्क्स ने कुछ प्रस्ताव रखे जिनका प्रारूप (Draft) मार्क्स तथा ऐंगेल्स ने मिलकर तैयार किया था। बाद में इस प्रस्ताव पत्र को संशोधित रूप में प्रकाशित किया गया। सन् 1848 में प्रकाशित यह लघु पुस्तिका साम्यवादीयों के लिए सबसे प्रमुख मार्गदर्शन है जिसमें अनेक विचारोत्तेजक बातें लिखी हुई हैं। यह विश्व भर के साम्यवादियों के लिए एक आचरण संहिता के समान है तथा पूँजीवादी व्यवस्था के विरूद्ध एक खुली चुनौती है। रेमंड ऐरों ने लिखा है कि इस पुस्तक के द्वारा मार्क्स के विचार पहली बार विश्व के सामने स्पष्ट हुए। इस आधार पर ऐरों ने इस पुस्तक को प्रचार का मसाजशास्त्रीय साहित्य' के नाम से संबोधित किया। इस पुस्तक के मुख पृष्ठ पर मार्क्स के विचारों का निचोड़ इस एक वाक्या में अंकित है कि दुनिया का आज तक का इतिहस वर्ग-संर्घष का इतिहास है।'
3. पूँजी ( Das Capital)& 'पूँजी' नाम से प्रकाशित मार्क्स की यह पुस्तक साम्यवादियों की वाइबिल के रूप में प्रतिष्ठित है। रेमंड ऐरों ने इस पुस्तक के बारे में लिखते हुए कहा है कि यह पुस्तक मार्क्स के विचारों का हृदय' है।
इस पुस्तक तीन खंडों में प्रकाशित हुई। पहला खंड मार्क्स के जीवन काल में सन् 1867 में ही प्रकाशित हो गया था जबकि दूसरा तथा तीसरा खंड मार्क्स की मृत्यु के बाद सन् 1885 तथा 1894 में ऐंगेल्स द्वारा प्रकारशित करवाया गया। इस पुस्तक में दिए गए सभी विचार स्वयं में दतने सारगर्भित तथा तार्किक है कि केवल कुछ शब्दों में ही उनका उल्लेख नहीं किया जा सकता। इससे संबंधित कुछ अंशों का उल्लेख हम मार्क्स द्वारा प्रस्तुत सिद्धांतों के आगामी विवेचन के अंतर्गत करेंगे।
4. राजनैतिक अर्थ-व्यवस्था की समालोचना में योगदान' (Contribution to Critique of Political Economy) - इस पुस्तक में मार्क्स ने राजनैतिक तथा आर्थिक संरचना के बीच पाए जाने वाले संबंधों की विस्तृत विवेचना की है। पुस्तक में दिए गए सभी विचार मार्क्स के चिंतन को दृढ़ता प्रदान करने वाले महत्त्वपूर्ण आधार सिद्ध हुए। इस पुस्तक का प्रकाशन सन् 1859 में हुआ था। उपर्युक्त मुख्य ग्रंथों के अतिरिक्त मार्क्स द्वारा लिखित कुछ अन्य प्रमुख ग्रंथों तथा लेखों में निम्नांकित का नाम अधिक महत्त्वपूर्ण है:
o पवित्र परिवार (Holy Family )
o जर्मन वैचारिकी (The German Ideology )
०राइन गजट में प्रकाशित लेख (Published matter in Rhine Gudget)
० अराजकतावादियों को लिखे गए पत्र (Letters to anarchists )
० फ्रांस में वर्ग संघर्ष (Class struggle in France)
उपर्युक्त पुस्तकों, लेखों तथा पत्रों के अतििरक्त कुछ अन्य कृतियाँ भी मार्क्स के स्पष्ट विचारों तथा सशक्त लेखनी को स्पष्ट करती हैं। अपने संपूर्ण जीवन में मार्क्स ने जो कुछ भी कहा और लिखा, वह सब सर्वहारा वर्ग की क्रांति के लिए समर्पित हैं।
मार्क्स के चिंतन के स्रोत ( Sources of Marxian Thought) मार्क्स का चिंतन किसी एक समाज की दशाओं अथवा चिंतन की किसी विशेष धारा से ही प्रभावित नहीं हुआ बल्कि संसार के विभिन्न समाजों की अनेक दशाओं ने मार्क्स के चिंतन को प्रभावित किया है। इनमें से कुछ प्रमुख स्रोतों को समझकर ही सामाजिक चिंतन में मार्क्स के योगदान का वास्तविक मूल्यांकन किया जा सकता हैं।मार्क्स की वे कृतियाँ जिनका अंग्रेजी में अनुवाद हो चुका है. हम यहाँ प्रस्तुत करते हैं।:
• Capital ed. Frederick Engles and trans Samual Moore and Edward Aveling.
3 Vols. ( London ( Lawrence and Wishart. 1954-60.
• A Contribution to the Critique of Political Economy trans. N.I. Stone,
Chicago: Charles M. Kerr, 1904.
• Economic and Philiosophic Manuscripts of 1844. ed.Dirk J. Struik and trans. Mart in Milligan Londonl Lawrence and Wishart, 1959,
• The Poverty of philosophy, Londonl Lawrence and Wishart, 1956.
• Marx Engles Selected works. 2 vols ( moscow ( Foreign Languages Publishing House, 1955,
• Marx Engles. Selected Correspondence 1846-1895 Londonl Lawrence and Wishart, 1956.
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