विशिष्ट चालकों की श्रेणियाँ - Categories of specific drivers

विशिष्ट चालकों की श्रेणियाँ - Categories of specific drivers


पैरेटों के पहले लेखों में भी कुछ ऐसी शक्तियों का उल्लेख मिलता है जो सामाजिक सन्तुलन की व्याख्या करती है। अतः हम कह सकते है कि भूतकाल में भी समाजशास्त्रियों द्वारा विशिष्ट चालकों को खोजा गया है, परन्तु उन खोजों का कोई वैज्ञानिक स्पष्टीकरण उनके लेखों में नहीं मिलता है। पैरेटो ने उनकी कमी को दूर करने का सचेत प्रयत्न किया. यद्यपि उनके लेखों में भी इस विषय का कोई विशेष स्पष्टीकरण नहीं मिलता है। 


फिर भी यथा सम्भव इन्होंने विशिष्ट चालकों की प्रकृति को स्पष्ट करने के लिए लगभग 50 विशिष्ट चालकों पर चर्चा की तथा उन्हें 60 श्रेणियों में विभाजित करके इनकी व्यापकता पर प्रकाश डाला। प्रत्येक श्रेणी के विशिष्ट चालक अनेक उपवर्गों में तथा प्रत्येक उपवर्ग कुछ उपखण्डों में विभाजित है। इसी कारण रेमण्ड ऐरा ने पैरेटो द्वारा प्रस्तुत विशिष्ट चालकों के वर्गीकरण को (त्रिस्तरीय वर्गीकरण) कहा है। विशिष्ट चालक के इन सभी श्रेणियों को निम्नांकित रूप से समझा जा सकता है


(1) संयोजन या सम्मिलन के विशिष्ट चालक (Residuse of Commination)


पैरेटो ने स्वीकार किया है कि संयोजन के विशिष्ट चालक मानव की एक ऐसी प्रवृत्ति में देखने को मिलती है जिसमें वह कुछ विशेष विचारों और वस्तुओं के बीच संबंध स्थापित करने में लिए कुछ सिद्धान्त खोजने की कोशिश करता है। ये सभी परस्पर समान या विरोधी तत्वों को मिलाने वाली प्रेरणाएं होती है। परन्तु इस प्रकार के सम्मिलन का प्रायः कोई तर्कसंगत कारण नहीं होता, यद्यपि हम उनमें अपने विश्वास को उत्पन्न करने और बनाये रखने के लिए कोई न कोई उल्टा-सीधा तर्क ढूँढ़ने का प्रयत्न अवश्य ही करते हैं। इन विशेष विचारों एवं वस्तुओं में सम्मिलन या संयोजन की यह प्रवृत्ति विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिलती है जिसको विशिष्ट चालकों का उपवर्ग कहा जा सकता है। पहले उपवर्ग में व्यक्ति उन विचारों और वस्तुओं के बीच संयोजन करता है जिनके गुण लगभग एक-दूसरे से समान होता है। दूसरे उपवर्ग में उन वस्तुओं अथवा घटनाओं के बीच संयोजन किया जाता है जो असमान विशेषताओं से युक्त होती हैं। तीसरे उपवर्ग का संयोजन अज्ञात वस्तुओं अथवा अज्ञात शक्तियों से संबंधित होता है।

चौथे तथा अंतिम उपवर्ग में पैरेटो ने एक विशेष प्रकार की प्रेरणा का कुछ अन्य प्रेरणाओं से संयोजन करने की मानव प्रवृत्ति को स्पष्ट किया है। पैरेटो का कथन है कि संयोजन के विशिष्ट चालक हमारे दैनिक जीवन में विद्यमान रहते हैं। उदाहरण- हम कुछ विचारों और वस्तुओं में इस तरह का संयोजन करते हैं कि सुन्दर और स्वच्छ घर में रहने वाला व्यक्ति परिष्कृत विचारों का होगा। इसी तरह से स्वपन में कोई सुन्दर चीज देख लेने का अर्थ भविष्य में अच्छे भाग्य का परिचायक है। इसी तरह शव यात्रा देखने का संबंध दीर्घायु होने से जोड़ना अथवा स्वपन में सोना देखना और उसे किसी आर्थिक हानि से जोड़ना असमान विशेषताओं के संयोजन का उदाहरण है। कुछ लोग शत्रु की मूर्ति का निर्माण कर उस पर चोट पहुँचाकर शत्रु को घायल व मारने की चेष्टा करते हैं। उसी प्रकार जनजातियों के लोग वर्षा लाने के लिए आग जलाते हैं और खूब धुआं करते हैं क्योंकि उनका विश्वास है कि धुआँ और बादल में समानता है इसलिए समान वस्तु (धुआँ) सदैव समान वस्तु (बादल) उत्पन्न करेगी और वर्षा होगी। इस प्रकार के विश्वासों का कोई तार्किक आधार नहीं होता है। 


( 2 ) सामूहिकता के स्थायित्व के विशिष्ट चालक

(Residues of the Resistance Aggregates)


पैरेटो के अनुसार यह विशिष्ट चालक वे हैं जो समाज में सामूहिकता को स्थायित्व प्रदान करते है।

ये वे प्रेरणाएं होती है जो मनुष्य के पारस्परिक सम्बन्धों, मनुष्य एवं स्थानों के बीच सम्बन्धों, जीवित और मृत्यु व्यक्तियों के बीच सम्बन्धों को स्थायित्व प्रदान करती है। ये विशिष्ट चालके मनुष्य की भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है और एक पीढ़ि से दूरी पीढ़ि को हस्तानान्तरित होती है इनके प्रति लोगों के दिल में आदर भाव होता है। इन्हीं विशिष्ट चालकों से चालित होकर हम अपने परिवार, नगर, देश, प्रजाति या इनके सदस्यों के साथ अपने सम्बन्धों को बनाये रखते है और उन्हें सम्मान प्रदान करते हैं।


सामूहिकता को स्थायित्व देने वाले अथवा इसमें वृद्धि करने वाले विशिष्ट चालकों को पैरेटो ने 8 उपवर्गों में विभाजित करके स्पष्ट किया है। पहले उपवर्ग में उन विशिष्ट चालकों का समावेश हैं जो कुछ व्यक्तियों, स्थानों तथा सामाजिक वर्गों से व्यक्ति के संबंध को स्थायित्व प्रदान करते हैं। इन्हीं के प्रभाव से हमे अपने माता-पिता, नातेदारों या मित्रों से स्थायी संबंध रखने की प्रेरणा मिलती है। हम अपने मकान या गाँव को छोड़कर नहीं जाना चाहते।

दूसरे और तीसरे उपवर्ग में पैरेटो ने उन विशिष्ट चालकों की चर्चा की जो हमें मृत व्यक्तियों की यादों और वस्तुओं को सुरक्षित रखने की प्रेरणा देकर उनसे अपना भावनात्मक संबंध बनाये रखते हैं। चौथे उपवर्ग में वे विशिष्ट चालक आते हैं जो हमें अपनी संस्कृति, विश्वासों और मूल्यों को स्थायी बनाये रहने की प्रेरणा देकर सामूहिकता में वृद्धि करते हैं। पांचवे वर्ग के चालक वे है जो व्यक्ति को अपने आस-पास की वस्तुओं और घटनाओं से समरूपता स्थापित करने की प्रेरणा देते हैं। छठे वर्ग में पैरेटो ने उन विशिष्ट चालकों का उल्लेख किया है जिनके प्रभाव से व्यक्ति अपनी भावनाओं को यथार्थ में बदलकर सामूहिक जीवन के लिए त्यागपूर्ण कार्य करता है। तथा साँतवें व आठवें में उन विशिष्ट चालकों से सम्मिलित किया जा सकता है जो क्रमशः वैयक्तिक सम्बन्धों की स्थापना तथा नये विश्वासों के सृजन को प्रोत्साहन देते हैं।


स्पष्ट है कि इस श्रेणी के सभी विशिष्ट चालक सामूहिक जीवन को स्थायित्व प्रदान करने में विशेष भूमिका निभाते हैं। यदि पहली श्रेणी के विशिष्ट चालकों से इनकी तुलना की जाये तो यह कहा जा सकता है

कि प्रथम श्रेणी के विशिष्ट चालक जहाँ नये विचारों और सैद्धान्तिक युक्तियों में वृद्धि करते हैं वही दूसरी श्रेणी के विशिष्ट चालक वे हैं जो समाज की यथास्थिती को बनाये रखने में योगदान करते हैं। इस प्रकार विशिष्ट चालकों की प्रथम श्रेणी कुछ सीमा तक परिवर्तनवादी है जबकि दूसरा जनवादी इसी कारण पैरेटो ने लिखा है कि समाज में परिवर्तन और क्रांति लाने के प्रयास तभी सफल हो सकते है जब दूसरी श्रेणी में विशिष्ट चालकों के प्रभाव को कम से कम किया जाये।


( 3 ) बाह्य क्रियाओं द्वारा संवेगों की अभिव्यक्ति के विशिष्ट चालक (Residues of the Manifestation of Sentiments through Exterior Acts)


इस श्रेणी में पैरेटो ने उन विशिष्ट चालकों को सम्मिलित किया है जो व्यक्ति को अपने संवेगों को बाह्य क्रियाओं द्वारा अभिव्यक्त करने की प्रेरणा देते हैं। उन्हें दो उपवर्गों में विभाजित किया गया है। पहले उपवर्ग में पैरेटो ने उन विशिष्ट चालकों का उल्लेख किया है जो सामूहिक जीवन में व्यक्ति के संवेगात्मक व्यवहारों को स्पष्ट करते हैं। उदाहरण के लिए कोई कार्यक्रम पसन्द आने पर दर्शकों द्वारा ताली बजाना अथवा कार्यक्रम पसन्द न आने पर बीच में ही उठकर चले जाना, शोर मचाना या विरोध प्रदर्शित करना इसी तरह के विशिष्ट चालक है।

दूसरा उपवर्ग में उन चालकों से संबंधित है जिनके द्वारा व्यक्ति विभिन्न क्रियाओं के द्वारा ईश्वर के प्रति अपनी धार्मिक आस्थाओं को प्रकट करता है। स्पष्ट है कि इस श्रेणी के विशिष्ट चालक वे हैं जो व्यक्ति को अपने संवेगों की अभिव्यक्ति के लिए कुछ बाह्य क्रियाएं करने की प्रेरणा देते हैं। इन चालकों के प्रभाव से जो बाह्य क्रियाएं की जाती है उनका स्वरूप भी संवेगात्मक ही होता है। 


(4) सामाजिकता से संबंधित विशिष्ट चालक (Residues of Sociability)


यह वे विशिष्ट चालक है जो व्यक्ति को अपने विचारों और व्यवहारों को समूह के अनुरूप बनाकर उसे एक सामाजिक प्राणी बनने की प्रेरणा देते हैं। अर्थात इस श्रेणी के अन्तर्गत उन विशिष्ट चालकों को सम्मिलित किये जाते हैं जो कि मनुष्य को एक सामाजिक प्राणी बनाते है। उनके द्वारा हमें इस बात की प्रेरणा भी मिलती है कि हम अपने आचरणों या व्यवहारों को अपने उस छोटे या बड़े समूह के अनुरूप बनाये जिसके हम सदस्य हैं।

इस श्रेणी के विशिष्ट चालकों को पैरेटो ने 6 उपवर्गों में विभाजित करके स्पष्ट किया। पैरेटो द्वारा किये गये वर्गीकरण के आधार पर यह कहा जा सकता है कि विभिन्न प्रेरणाओं के रूप में यह विशिष्ट चालक व्यक्ति को कुछ विशिष्ट समाजों का सदस्य बनने की प्रेरणा देते है। दूसरों के प्रति दया, त्याग, बलिदान को प्रोत्साहन देते हैं। पैरेटो ने इस श्रेणी के विशिष्ट चालकों के जिन उपवर्गों और उपखण्डों का उल्लेख किया है उन्हें सरल ढंग से अग्रांक्ति रूप से समझा जा सकता है।


इस श्रेणी के विशिष्ट चालकों के पहले उपवर्ग में पैरेटो ने उन विशिष्ट चालकों को सम्मिलित किया जा विशिष्ट समाजों के रूप में व्यक्ति को अनेक संघों का सदस्य बनने की प्रेरणा देते है। यह संघ अथवा समितियों उस समूह से भिन्न होती है जिससे व्यक्ति जन्म लेता है। क्रीड़ा समिति तथा अनेक दूसरे संगठन इसी तरह की समितियाँ है जो व्यक्ति के उन संवेगों को प्रभावपूर्ण बनाती है

जो सामाजिक जीवन को निरन्तरता प्रदान करने वाली होती है। दूसरे उपवर्ग के विशिष्ट विशिष्ट चालक व्यक्ति को अपने विचारों, विश्वासों और व्यवहारों में दूसरे सदस्यों के समान बनने की आवश्यकता पर बल देते हैं। इसके लिए व्यक्ति न केवल स्वयं पर अनुशासन की भावना से प्रेरित होता है बल्कि वह दूसरों को भी अनुशासन में रखने का प्रयत्न करता है। इसके साथ ही समरूपता को बनाये रखने के लिए कुछ विशिष्ट चालक व्यक्ति को अपने समाज के आदर्श नियमों, जैसे-रूढ़ियों तथा प्रथाओं के अनुसार व्यवहार करने की प्रेरणा देते हैं।


सामाजिकता की भावना से संबंधित, विशिष्ट चालकों का तीसरा उपवर्ग वह है जिसमें दया और क्रूरता की भावना को प्रभावित आने वाले विशिष्ट चालक आते हैं। इन्ही के प्रभाव से व्यक्ति दूसरे के प्रति दया का भाव विकसित करता है अथवा क्रूर भावनाओं के प्रति घृणा प्रदर्शित करता है। इनमें से कुछ चालक मनुष्य को क्रूर भावनाओं का संगठित रूप से तिरस्कार करने की भी प्रेरणा देते हैं। चौथा उपवर्ग उन विशिष्ट चालकों से संबंधित है

जो व्यक्ति को आत्मोत्सर्ग और बलिदान करने की प्रेरणा सामाजिकता में वृद्धि करते हैं। इस तरह के चालकों के प्रभाव से व्यक्ति या तो अपने जीवन को खतरे में डालकर दूसरों के हित का कार्य करता है अथवा वह अपनी वस्तुओं में दूसरों को भागीदार बनाकर स्वयं को अधिक से अधिक सामाजिक बनाने का प्रयत्न करता है। पाँचवे उपवर्ग के विशिष्ट चालक सामाजिक संस्तरण के प्रति व्यक्ति में विश्वास उत्पन्न करते हैं। इसके अन्तर्गत व्यक्ति अपने से उच्च प्रस्थिति के लोगों तथा अपने से निम्न प्रस्थिति के लोगों के प्रति कुछ विशेष भावनाएं विकसित करता है तथा इन्हीं के अनुरूप सामाजिक रूप से स्वीकृत व्यवहार करने का प्रयत्न करता है। अंतिम यानि छठाँ उपवर्ग उन विशिष्ट चालकों का है जो व्यक्ति को समाज के प्रति अपने दायित्वों को देखते हुए समाज से पलायन करने की भावना को प्रोत्साहन देते हैं। इनके प्रभाव से व्यक्ति सुखों का त्याग करके स्वयं कष्टप्रद जीवन को चुनना भी बुरा नहीं समझता। स्पष्ट है कि सामाजिकता से संबंधित यह सभी विशिष्ट चालक समाज को स्थायी तथा सन्तुलित बनाने का प्रयत्न करते हैं।


(5) व्यक्तित्व के संगठन के विशिष्ट चालक (Residues of Personality Integrity )


इस श्रेणी के विशिष्ट चालकों में पैरेटो ने इन प्रेरणाओं का उल्लेख किया है

जो व्यक्तित्व के विभिन्न तत्वों को संगठित करती है। इन्हीं विशिष्ट चालकों के प्रभाव से हम ऐसी सभी दशाओं का विरोध करते हैं जो व्यक्तित्व सम्बन्धी संगठन को नष्ट करने वाली होती है तथा उन दशाओं को स्वीकार करते हैं जिनसे व्यक्तित्व के अधिक संगठित बनने की सम्भावना हो। पैरेटो ने इस विशिष्ट चालकों को मनुष्य रूप से चार उपवर्गों में विभाजित करके स्पष्ट किया। पहले उपवर्ग में वे विशिष्ट चालक आते हैं जो व्यक्तियों को सामाजिक सन्तुलन में परिवर्तन लाने वाले तत्वों का विरोध करने की प्रेरणा देते हैं। व्यक्ति यह विरोध में इसलिए करता है जिससे उसकस व्यक्तित्व परम्परागत मूल्यों के अनुकूल बना रहे। दूसरा उपवर्ग उन चालकों का है जो हमें अपने व्यक्तित्व में नैतिक मूल्यों का समावेश करने की प्रेरणा देते हैं। इन्हीं के प्रभाव से हम किसी भी अनैतिक दबाव का विरोध करते हैं तथा उन व्यवहारों से बचने का प्रयत्न करते हैं जिन्हें अनैतिक समझा जाता है। कुछ विशिष्ट चालक इस प्रकार के होते हैं जो व्यक्ति को परिवर्तनकारी गतिविधियों के बीच इस तरह एकीकरण करने की प्रेरणा देते हैं जिससे व्यक्तित्व के विकास में बाधाएँ उत्पन्न न हो सके। तीसरे उपवर्ग में पैरेटो ने इन विशिष्ट चालकों का उल्लेख किया है जिनके प्रभाव से व्यक्ति अपनी स्थिति में परितर्वन करने के लिए बहुत से वास्तविक और काल्पनिक उद्देश्यों के बीच इस तरह सामंजस्य करने का प्रयत्न करता है जिससे उसका व्यक्तित्व अधिक संगठित प्रतीत हो सके।

पैरेटो का कथन है कि इस चौथे उपवर्ग से संबंधित सभी विशिष्ट चालक व्यक्तिगत हित से संबंधित हैं। यह सभी चालक वे हैं जो व्यक्तित्व को संगठित रखने के उद्देश्य से समाज के सन्तुलन में जोने वाले किसी भी परिवर्तन का विरोध करते हैं.


(6) (काम) सम्बन्धी विशिष्ट चालक (Residues of Sex)


पैरेटो का कथन है कि संसार के प्रत्येक धर्म ने काम सन्तुस्टि के लिए कुछ न कुछ निषेधों तथा नियन्त्रणों को प्रभावपूर्ण बनाने का प्रयत्न किया है लेकिन फिर भी काम सम्बन्धी व्यवहारों का विस्तार प्रत्येक मानव समूह की विशेषता है। इसका कारण वे विशिष्ट चालक है जो काम सम्बन्धी भावनाओं को उत्पन्न और प्रेरित करते हैं। साधारणतया काम सम्बन्धी विशिष्ट चालकों को वैयक्तिक समझा जाता है लेकिन पैरेटो ने इनसे उत्पन्न व्यवहारों के सामाजिक प्रभाव की चर्चा करते है हुए इनकी व्यापकता को स्पष्ट किया। ये चालक जहाँ एक ओर यौन सम्बन्धी व्यवहारों के प्रेरक होते हैं वहीं दूसरी ओर यह पाँचवी श्रेणी के विशिष्ट चालकों से संयुक्त होकर यौन नैतिकता को विकसित करने की भी प्रेरणा प्रदान करते है।


विभिन्न श्रेणियों के विशिष्ट चालकों की प्रकृति को स्पष्ट करके पैरेटो ने यह बतलाया कि अपने व्यवहारिक जीवन में हम किसी व्यवहार को उसकी तार्किकता या अतार्किकता के आधार पर नहीं करते बल्कि यह विशिष्ट चालक ही है जो हमें कुछ विशेष क्रियाओं या व्यवहारों को करने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

वास्तव में प्रत्येक समाज ये विशिष्ट चालक हमारे व्यवहारों का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लेकिन विभिन्न समूहों और विभिन्न व्यक्तियों में इन विशिष्ट चालकों के प्रभाव की सीमा अलग-अलग हो सकती है। इसका तात्पर्य है कि कुछ लोगों के व्यवहार (संयोजन के विशिष्ट चालकों से अधिक प्रभावित होते हैं जब कि कुछ लोगो के व्यक्तित्व के संगठन के विशिष्ट चालक) अधिक प्रभावित कर सकते है। इससे यह होता है कि व्यक्ति के व्यवहारों पर विशिष्ट चालकों का प्रभाव बहुत कुछ सामाजिक दशाओं तथा समय कारक से प्रभावित होता है।


पैरेटो ने स्पष्ट किया है कि ये विशिष्ट चालक मानवीय व्यवहार के निर्धारण में महत्वपूर्ण है। क्योंकि मानवीय क्रियाएं और व्यवहार इनके द्वारा ही संचालित होत हैं, इसकारण ये विशिष्ट चालक सामाजिक व्यवस्था में सन्तुलन बनाये रखने में भी सहायक सिद्ध होते हैं। ये विशिष्ट चालक प्रायः परस्पर विरोधी होते हैं। साथ ही इनका कोई तार्किक आधार भी नहीं होता है। इस कारण इन विशिष्ट चालकों को अतर्कसंगत तत्व मान लेना उचित होगा। चूँकि ये विशिष्ट चालक अतर्कसंगत तत्व है इस कारण इनके द्वारा संचालित व्यवहारों को भी तार्किक आधार पर उचित प्रमाणित करना सम्भव नहीं होता। वास्तविकता यह है कि हम किसी व्यवहार को उसकी सत्यता या असत्यता तार्किक या अतार्किक आधार पर स्वीकार नहीं करते बल्कि विशिष्ट चालक हमें कुछ विशेष व्यवहारों या क्रियाओं को करने या स्वीकार करने की जो प्रेरणा देते हैं, हमारे अनेक व्यवहार उसी का परिणाम होते हैं।