बहुपत्नी विवाह के कारण - Causes of Polygyny
बहुपत्नी विवाह के कारण - Causes of Polygyny
1. पुत्र प्राप्ति के लिए:- एक स्त्री से संतान न होने पर अथवा पुत्र न होने पर भी इसका विवाह किए जाने की प्रथा है। इसे समाज तथा स्मृतिकारों ने भी मान्यता प्रदान की है।
2. आर्थिक कारण:- विषय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति परिवार के कई सदस्यों के सहयोग से ही संभव हो पाता है। परिवार में अधिक स्त्रियाँ होने पर उन्हें भी खेती, उद्योग एवं गृह कार्यों में लगाकर उनसे आर्थिक सहयोग लिया जाता है।
3. अधिक पत्नियाँ रखना कुलीन समाजों में सामाजिक प्रतिष्ठा का द्योतक है।
4. लिंग असमानता / विषमता के कारण जहाँ पुरूषों की संख्या कम है वहाँ बहुपत्नी विवाह प्रचलित है।
5. कामवासना व यौन अनुभव ने भी बहुपत्नी प्रथा को विकसित किया है।
6. बहुत समाजों में साली प्रथा" भी प्रचलित है जिसमें एक व्यक्ति को अपनी पत्नी के सभी बहनों से शादी करना होता है।
7. युद्ध एवं आक्रमण के समय भी स्त्रियों को अपहरण करके विवाह कर लिया जाता था जिसे बहुपत्नी विवाह का ही स्वरूप माना जाता है।
बहुपत्नी विवाह के लाभ (Merits of Polygyng)
1. बच्चों का लालन-पालन एवं समाजीकरण आसानी से होता है।
2. परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहयोग प्राप्त होता है।
दोष या हानियाँ (Demerits of Polygyny)
बहुपत्नी विवाह के लाभ अत्यंत कम हैं परंतु इसके दोष बहुत ज्यादा है जो इस प्रकार हैं
1. बहुपत्नी विवाह के कारण परिवार में संघर्ष, ईर्ष्या एवं वैमनस्य का वातावरण उत्पन्न होता है।
2. कई पत्नियाँ होने पर परिवार में संतानों की संख्या बढ़ जाती है। अधिक संतानों की शिक्षा-दीक्षा एवं देखभाल करना प्रायः कठिन होता है।
3. ऐसे विवाहों के कारण स्त्रियों की सामाजिक प्रतिष्ठा समाज में गिर जाती है और उनका शोषण बहुत बढ़ जाता है।
4. एकाधिक पत्नियाँ होने पर स्त्रियों की संपूर्ण संतुष्टि नहीं हो पाती जिससे व्यभिचार बढ़ने की संभावना रहती है।
5. समाज में विधवा स्त्रियों की संख्या में वृद्धि हो जाती है।
(3) द्विपत्नी विवाह ( Biogamy )
इस प्रकार के विवाह में एक पुरूष एक साथ दो स्त्रियों से विवाह करता है। कई बार पहली स्त्री से संतान न होने पर दूसरी स्त्री से विवाह कर लिया जाता है। झारेगन तथा एस्कीमो जनजातियों में यह प्रथा प्रचलित है। परंतु वर्तमान में इस विवाह पर भी कानूनी प्रतिबंध लगा हुआ है। यह अपराध की श्रेणी में आता है।
(4) समूह विवाह (Group Marriage):
समूह विवाह में पुरूषों का एक समूह, स्त्रियों के एक समूह से विवाह करता है और समूह का प्रत्येक पुरूष समूह की प्रत्येक स्त्री का पति होता है। परिवार और विवाह की प्रारंभिक अवस्था यही रही होगी. ऐसा उद्विकासियों का मानना है। यह प्रथा आस्ट्रेलिया की जनजातियों में पायी जाती है। वेस्टरमार्क का मत है कि ऐसे विवाह तिब्बत. भारत एवं श्रीलंका के बहुपतित्व वाले समाजों में पाये जाते हैं।
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