अनुष्ठानिक या उत्सवी विनिमय - ceremonial or celebratory exchange
अनुष्ठानिक या उत्सवी विनिमय - ceremonial or celebratory exchange
दुर्खीम के अनुगामी मार्शल मास ने अपनी पुस्तक द गिफ्ट' में सरल समाजों में उपहार के महत्व को बतलाने के लिए कुला तथा पोटलॉच नामक विनिमय संस्थाओं का सर्वप्रथम उल्लेख किया।
कुला प्रथा - इस प्रथा का विस्तार से वर्णन ब्रिटिश मानवशास्त्री मैलिनोवस्की ने किया है। यह प्रथा ट्रोब्रीयांड, न्यूगिनी, एम्फ्लेट द्वीप लौन्फ्ले द्वीप तथा डोब में पाई जाती है।
यह प्रथा न सिर्फ आर्थिक है, बल्कि राजनीतिक, संस्कारिक, जादुई, धार्मिक तथा मनोरंजन आदि का संकुल है। मैलिनोवस्की के अनुसार इस में दो पक्षों के बीच आभूषणों का विनिमय होता है। यह आभूषण दो प्रकार के होते हैं लाल शंख का हार जिसे सोलावा कहते हैं और सफेद शंख का बाजूबंद जिसे मवाली कहते हैं। इनमें का एक निश्चित क्रम होता है सोलावा सदैव घड़ी की सुई की दिशा में तथा म्वाली ठीक इसके विपरीत, घड़ी की सुई की विपरीत दिशा के क्रम में होता है।
कुला व्यापार की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं -
● कुला वस्तुओं का आर्थिक महत्व उतना नहीं जितना की धार्मिक, सांस्कृतिक महत्व होता है।
● इन वस्तुओं को रखने से सदस्यों की प्रतिष्ठा बढ़ जाती है।
● यह एक स्थाई संबंध है जिन लोगों में एक बार कुला संबंध स्थापित हो जाता है फिर वह सदैव बना में रहता है।
● कुला साझेदार आपस में भिन्न होते हैं और समय आने पर शत्रुओं से एक-दूसरे की रक्षा करते हैं।
● कुला यात्रा या अभियान में केवल पुरुष ही जाते हैं स्त्रियां नहीं।
● भांजा अपने मामा के कूला समूह का स्वतः सदस्य होता है।
●इसमें सौलावा तथा मवाली के विनिमय के साथ-साथ अनावश्यक वस्तुओं का विनिमय होता है।
कुला से मिलती-जुलती अन्य प्रथाएं
बासी - इसका उल्लेख मैलिनोवस्की ने किया है यह ट्रोब्रीयांड दीप समूह के भीतरी भाग में बसे गांव तथा तटीय गांव में होता है। ये गांव में रहने वाले मछलियां पकड़ते हैं और भीतरी गांव में रहने वाले कृषि पदार्थ याम उपजाते हैं। आपस में आदान प्रदान होता है इसे सगाली कहते हैं। वासी संबंधी स्थाई एवं परंपरागत होते।
गिमवाली घर गृहस्थी की छोटी-मोटी वस्तुओं का विनिमय होता है। एक व्यक्ति अपने कूला साझेदार से गीमवाली संबंध नहीं रख सकता है। जबकि इसमें बड़ी एवं महत्वपूर्ण वस्तुओं के विनिमय को लागा कहते हैं। जैसे भूमि का हस्तांतरण लागा एक संस्कारी खरीद है।
पोकाला और येवला- यह भी उपहार का एक तरीका है। जब कोई व्यक्ति अपने मुखिया को वस्तु भेंट करता है तब उसे पोकाला कहते हैं।
बदले में मुखिया द्वारा दी गई भेंट को यह येवला कहते हैं। उरिगुबे- ट्रोब्रीयांड दीप वासियों में वर्ष में एक बार भाई अपनी विवाहित बहन के पति को लगभग 3 चौथाई फसल भेंट करता है उसे उरिगुबे कहते हैं।
गिमाये तथा उमाये - साल्जबरी ने अपनी पुस्तक फ्रॉम स्टोन टू स्टील' में न्यूगिनी की पहाड़ियों की सियान जनजाति में अलग प्रकार के विनिमय प्रथा का उल्लेख किया। इसमें जब समूहों के बीच शंख, आभूषण, सुंदर पंखों वाले पक्षियों का विनिमय होता है तो उसे गिमाये कहते हैं। जब कम कीमत की दैनिक वस्तुओं का आदान प्रदान होता है तो उसे उमाये कहते हैं।
पोटलैच यह प्रथा अमेरिका के उत्तर पश्चिमी तट अलास्का और ब्रिटिश कोलंबिया में रहने वाली 4 - जनजातियों शिमशियन, क्वाकिउटल, हैदा तथा लिंगित में विशेष रूप से पाई जाती है। यह एक प्रकार का खर्चीला भोज होता है। इसमें लोगों को खूब खिलाया पिलाया जाता है। भेट दी जाती है और वस्तुएं नष्ट की जाती है। जो जितना अधिक समृद्धशाली होता है, उतनी अधिक वस्तुओं और संपत्तियों को नष्ट करता है और प्रतिष्ठित होने का दावा करता है। इस भोज को संपत्ति नष्ट करने का प्रदर्शन कह सकते हैं।
यह खर्चीला भोज इतना अधिक परंपरागत होता है इसे रोकने के लिए अमेरिकी सरकार के कई प्रयास विफल हो चुके हैं। हालांकि कई समाजशास्त्रियों ने इसके प्रकार्यात्मक पक्ष को पुनरवितरण के रूप में देखा। शिमशियन जनजाति में दाह संस्कार पोटलैच जो मुखिया का उत्तराधिकारी उसकी मृत्यु के बाद उसके पद को ग्रहण करने के लिए देता है।
क्वाकिउटल जनजाति में एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए प्रतिष्ठा प्रतिस्पर्धात्मक पोटलैच का प्रचलन है।
हैदा जनजाति में गृह प्रवेश पोटलैच जो कि नए घर के बनवाने पर दिया जाता है। इसी प्रकार लिंगित जनजाति भी आक्रमक अथवा प्रतिस्पर्धात्मक पोटलैच का प्रचलन है।
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