विवाह:- विशेषताएं - characteristics of marriage

विवाह:- विशेषताएं - characteristics of marriage


1. विवाह एक मौलिक और सार्वभौमिक सामाजिक संस्था है जो प्रत्येक देश, काल, समाज और संस्कृति में पायी जाती है।


2. विवाह दो विषमलिंगियों का संबंध है अर्थात् विवाह के लिए पुरूष व स्त्री का होना आवश्यक है। ये हो सकता है कि कहीं एक पुरूष का एक या कई स्त्रियों से अथवा एक स्त्री का एक या अधिक पुरूषों के साथ विवाह हो।


3. विवाह को मान्यता उसी समय प्राप्त होती है जब उसे समाज की स्वीकृति मिलती है। यह स्वीकृति प्रथा कानून के द्वारा या धार्मिक संस्कार के रूप में हो सकती है।


4. विवाह संस्था के आधार पर लैंगिक या यौन संबंधों को मान्यता प्राप्त होती है।


5. बेस्टमार्ग ने विवाह को एक सामाजिक संस्था के अतिरिक्त एक आर्थिक संस्था भी माना है। इसका कारण यह है कि विवाह संबंध के आधार पर पति-पत्नी के सांपत्तिक अधिकार भी निश्चित होते हैं।


6. विवाह संस्था की एक विशेषता यह है कि यह यौन इच्छाओं की पूर्ति के साथ-साथ संतानोत्पत्ति एवं समाज के निरंतरता को बनाए रखने की आवश्यकता की पूर्ति भी करती है।


7. यह संस्था व्यक्ति के विकास की जैविक, मनोवैज्ञानिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं


8. विवाह संस्था व्यक्ति की सामाजिक स्थिति के निर्धारण में योग देती है।


9. विवाह से संबंधित पद्धतियाँ विभिन्न समाजों में भिन्न-भिन्न होती हैं। प्रत्येक समाज की विवाह पद्धति उस समाज की प्रथाओं, मान्यताओं और संस्कृति पर निर्भर करती है और ये अलग अलग समाजों में भिन्न-भिन्न होती है।


10. विवाह का संबंध स्थायी माना जाता है तथा परिवार की उत्पत्ति की मौलिक इकाई माना जाता है।