जनजाति की विशेषताएं - Characteristics of the Tribe

 जनजाति की विशेषताएं - Characteristics of the Tribe


जनजाति को वस्तुतः उनकी विशेषताओं के आधार पर ही, एक विशेष सामाजिक समूह के रुप में चिंहित किया जाता है। जनजाति की प्रमुख विशेषताएं निम्नानुसार हैं -


(1) परिवारों का समूह - प्रत्येक जनजातीय समुदाय कुछ परिवारों का समूह है, इन समुदायों में भी सबसे छोटी इकाई परिवार ही है। किसी भी जनजातीय समुदाय के सभी परिवारों में एकरुपता पाई जाती है। यह एकरुपता संरचना, सत्ता, वंश, परंपरा इत्यादि के माध्यम से देखी जा सकती है।


(2) निश्चित भू-भाग एक जनजाति विशेष का सकेंद्रण, एक स्थान विशेष में होता है, अर्थात ये एक निश्चित भू-भाग में निवास करती हैं। भारत में विभिन्न जनजातीय समुदाय, अलग-अलग स्थानों पर निवास करते हैं

साथ ही एक ही जनजाति जब अलग-अलग स्थानों पर निवास करती है, तो इन्हें स्थान विशेष के नाम पर अलग सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय के आधार पर पृथक किया जा सकता है। जैसे मध्य प्रदेश के गोंड एवं आंध्र प्रदेश के गोंड, अलग समुदाय के रुप में जाने जाते हैं।


(3) विशिष्ट नाम प्रत्येक जनजातीय समुदाय की, विशिष्टता उसके नाम में परिलक्षित होती है, प्रत्येक जनजाति के नाम के साथ उसकी समृद्ध संस्कृति का भी बोध होता है अर्थात प्रत्येक जनजाति का एक विशिष्ट एवं अलग नाम होता है, जिससे उन्हें पहचाना जाता है। समुदाय के "नाम" का अपना इतिहास भी होता है, उप-जनजातियों के नाम में मुख्य समुदाय के साथ उसके जुड़ाव का भी बोध होता है।


(4) सामान्य भाषा - प्रत्येक जनजाति की एक भाषा या बोली होती है, जो सामान्य रूप से पूरे समुदाय के सदस्य बोल-चाल में उपयोग करते हैं। यह भाषा या बोली, दूसरे समुदाय से भिन्न होती है। जैसे गोंड जनजाति की बोली गोंडी, भील जनजाति की बोली भीली है।


(5) सामान्य संस्कृति सामान्य संस्कृति से तात्पर्य है कि एक जनजाति की संस्कृति, उसके समस्त सदस्यों द्वारा अनुकरणीय होती है। प्रत्येक जनजाति समुदाय की अपनी संस्कृति होती हैं, जिसका पूरा समुदाय अनुसरण करता है। परिवार का आकार प्रकार, विवाह का स्वरूप, पद्धति एवं प्रकार, नातेदारी, धर्म, जीवन यापन की विधि इत्यादि इनकी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।


(6) राजनैतिक संगठन - परंपरागत सामाजिक संरचना में प्रत्येक जनजातीय समुदाय की अपनी राजनैतिक व्यवस्था होती थी। एंतिहासिक रूप से प्रत्येक जनजातीय समुदाय का एक राजनैतिक संगठन होता था, जिसमें समुदाय की परंपरागत पंचायत महत्वपूर्ण स्थान रखती थी। इसमें समुदाय के बुजुर्ग व्यक्ति, ओझा, धार्मिक क्रिया-कलाप करने वाले एवं मुखिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी।


(7) आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था जनजातियों की अर्थव्यवस्था प्राकृतिक संसाधनों के चारों तरफ घूमती थी एवं यह आत्म निर्भर होती थी,

अर्थात यह अर्थव्यस्था अपने आप में पूर्ण एवं इनकी सभी आवश्यकताएं पूरी करने में सक्षम होती थी, वर्तमान में यह आत्म निर्भर अर्थव्यवस्था नहीं है, परंतु समुदाय की अधिकांश आवश्यकताएँ आज भी प्राकृतिक संसाधनों पर ही निर्भर हैं।


(8) ) विशेष धार्मिक व्यवस्था जनजातीय समुदाय अपनी विशिष्ट धार्मिक पद्धति के लिए भी जाने जाते हैं।


जनजातीय धर्म में प्राकृतिक संसाधनों (प्रायःवन) का विशेष स्थान है। जनजातीय धर्म अपने आप में स्वतंत्र धार्मिक व्यवस्था है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों की पूजा एवं क्रिया-कलापों का केंद्रीय स्थान होता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक समुदाय की अपनी विशेष धार्मिक गतिविधियां एवं क्रियाकलाप होते हैं।


इस प्रकार जनजाति भौगोलिक स्थिति, भाषा, परिवार, धर्म, संस्कृति एवं आजीविका के स्वरूप इत्यादि से संबंधित विशेषताओं के आधार पर चिंहित होती हैं।