धर्म के लक्षण एवं विशेषताएँ - Charecteristics of Religion

 धर्म के लक्षण एवं विशेषताएँ - Charecteristics of Religion


धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियानिग्रहः। धी विद्या सत्यम क्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्॥


भारतीय दर्शन में धर्य, क्षमा, दम, अस्तेय, पवित्रता, इन्द्रिय निग्रह, ज्ञान, विवेक, सत्य और अक्रोध यह धर्म के दस लक्षण बताये है।


धर्म का स्वरुप


धर्म का उपरी या बाह्य स्वरूप (Outer Form) एवं भीतरी या आतंरिक स्वरूप होता है। व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला आचरण आंतरिक एवं बाह्य व्यवहार की फलश्रुति होता है। आचार एवं विचार यह क्रमशः धर्म के आतंरिक एवं बाह्य स्वरूप है। आचार स्थुल प्रकृति का होता है और विचार सूक्ष्म प्रकृति का होता है। पूजापाठ, व्रत, उपासना, इश्वर की आराधना, रीतिरिवाज, कर्मकांड, तीर्थाटन, उत्सव त्यौहार आदि धर्म का बाह्य स्वरूप है। साधना संयम पवित्रता आदि हृदय को पवित्र बनाने वाले विचार धर्म का आतंरिक स्वरुप है। विश्व के सभी धर्म मानव कल्याण के लिए निर्माण हुए है।

विश्व के विभिन्न धर्मो के उदय का कारण, आराध्य दर्शन एवं दार्शनिक, धर्मग्रंथ, उपासना पद्धति, पूजापाठ की विधि, त्यौहार पर्व, तीर्थस्थान, प्रतीक, नियम आदि में भिन्नता होते हुए भी सभी धर्मों के आधारतत्व समान है। विश्व कल्यान, मानव कल्याण, सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय यह मूलाधार है। अर्थात सभी धर्म के रास्ते अलग है किन्तु मंजिल एक ही है। अपने सर्वशक्तिमान दैवत को अल्लाह वाहेगुरु, ईश्वर, अहर्त, ईसा, तथागत कहता है।


विभिन्न धर्मो का दर्शन


भारत में हिंदू, बौद्ध, जैन, शिख, इस्लाम, ईसाई आदि धर्म के अनुयायी है। सभी लोग अपने अपने धर्म के अनुसार धर्म का पालन करते है। सभी धर्मो के विभिन्नता में एकात्मता है। विविध धर्मो का दर्शन निम्नवत है


• हिंदू धर्म 


हिंदू धर्म प्राचीन सनातन धर्म है। वेद, उपनिषद, भगवतगीता, पुराण, मनुस्मृति आदि पर आधिष्टित है। ब्रम्ह, विष्णु, महेश, राम, कृष्ण, शंकर, हनुमान आदि तैतीस कोटि देवी देवता है। इन देवी देवताओं की उपासना की जाती है। भगवान निर्गुण एवं सगुन दोनों रुप में पुजा जाता है। जप-तप, पूजा पाठ व्रत. उपासना, इश्वर की आराधना, रीतिरिवाज, कर्मकांड, तीर्थाटन, भजन- पूजन, उत्सव-त्यौहार करते हैं। हिन्दू धर्म का पालन करने वाला आपने जीवन में गर्भाधान, नामकरण, अन्नप्राशन, चूडाकर्म, कर्णवेद, विद्यारंभ, उपनयन, वेदारंभ, केशांत, समावर्तन, विवाह तथा अंत्येष्टि आदि संस्कारों का पालन करता है। हिंदू धर्म में आहार-विहार, आचार-विचार, पवित्रता के संदर्भ में विशेष नियम है। हिंदू धर्म के लोगों को उन नियमों का पालन करना पड़ता है। तुलसी एवं बरगद का पेड़ पूज्यनीय माना जाता है। मोक्षप्राप्ति यह हिंदू धर्म के धार्मिक अधिष्ठानों का लक्ष्य होता है।


• बौद्ध धर्म


भगवान बुद्ध को माननेवाले 'बौद्ध' कहलाते है।

भगवान बुद्ध के विचारों पर आधारित त्रिपिटक तथा धम्मपद बौद्ध धर्म का मूल तत्वज्ञान है। महायान एवं हिनयान यह दो संप्रदाय प्रमुखतः से दीखते है। बौद्ध धर्मीय अपने जीवन में त्रिशरण, चार आर्यसत्य. पंचशील, आर्य अष्टांगिक मार्ग आदि का पालन करते है। प्रज्ञा, शिल, करुणा यह त्रिशरण है। दुःख, दुःख समुदाय, दुःख निरोध, दुःख निरोधगामिनी प्रतिपद यह चार आर्यसत्य है। हिंसा न करना, चोरी न करना, व्यभिचार न करना, झूठ न बोलना, शराब एवं नशीले न पदार्थ के सेवन का त्याग करना यह पंचशील है। सम्यक दृष्टी. सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी. सम्यक कर्मान्त, सम्यक अजीविक, सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति, सम्यक समाधी आदि आर्य अष्टांगिक मार्ग है। लुम्बिनी, बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, राजगृह, वैशाली यह बौद्ध धर्मियों के धार्मिक स्थल है। भारतीय धर्म-दर्शन, संस्कृति शिक्षा एवं मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान बौद्ध धर्म का रहा है।


• जैन धर्म


भगवान महावीर जैन धर्म के संस्थापक माने जाते है।

जैन धर्मीय लोग ईश्वर को मानते नहीं है। दिगंबर एवं श्वेताम्बर यह जैन धर्म के दो संप्रदाय है। दिगंबर संप्रदाय के अनुयायी नग्नता के पक्षधर है एवं शेताम्बर संप्रदाय के अनुयायी श्वेत वस्त्र परिधान करते है। जैन धर्मीय दशलक्षण पर्व एवं पर्युषण पर्व के रूप में आराधना करते हैं। क्षमा नम्रता, सरलता, सफाई, सत्य, संयम, तप, त्याग, ममता तथा ब्रम्हचर्य आदि तत्वों का पालन अपने जीवन में करते है। आहिंसा मूल्य पर जैन धर्मीय अधिक बल देते है। पर्युषण पर्व के अंतिम दिन सभी उपवास रखते है, जिसे संवत्सरी के नाम से मनाया जाता है। रात्रि के भोजन का त्याग, पानी छानकर पीना, मांस, मछली, मदिरा, मधु आदि का त्याग, बड, पीपल, कटहल, पाकर, गुलर आदि का त्याग करना चाहिए। हिंसा, चोरी, कुशील, परिग्रह आदि का त्याग करने पर बल दिया है। अर्हन्त, सिद्ध आचार्य, उपाध्याय, साधू को प्रतिष्ठित माने जाते है। देव दर्शन करना, पूजा आराधना करना, स्वाध्याय करना आदि जैन धर्मीय आपना कर्तव्य मानते है। भारतीय धर्म-दर्शन, संस्कृति, शिक्षा एवं मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान जैन धर्म का रहा है।


• शिख धर्म


शिख धर्म को माननेवाले लोग शिख' कहलाते है।

शिख का अर्थ शिष्य से है। गुरु-शिष्य की संबंध को प्राथमिकता देनेवाला यह धर्म है। नानकदेव, अंगद, अमरदास, रामदास, अर्जुनदेव, हरगोविंद, हरराय, हरकृष्ण, तेगबहाद्दुर, गोविन्दसिंह यह दस शिख धर्म के गुरु है। शिख धर्म के सभी गुरुओं ने शिख धर्म को मजबूती प्रदान की है। शिख धर्म का धर्मग्रंथ गुरुग्रंथसाहिब के प्रति शिखों को असीम श्रद्धा है। गुरुग्रंथसहिब का भक्तिभाव से पूजापाठ करते है। सतनाम वाह गुरू का शिख धर्मीय जप करते हैं। केश, कंघा, कच्छा, कड़ा, कृपाण इस पांच कंकार को शिख धर्मीय पवित्र मानते हैं। शिख धर्म में सत श्री अकाल, गुरुनानक, ग्रंथसाहिब की पूजा गुरुद्वारा में की जाती है। यह एकेश्वरवादी धर्म है। मूर्तिपूजा अमान्य है। शिख धर्म के प्रथम गुरु नानक देव ने कर्मकांड का विरोध किया है। भारतीय धर्म-दर्शन, संस्कृति, शिक्षा एवं मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान शिख धर्म का रहा है। 


• इस्लाम धर्म


अल्लाह तथा हजरत मुहम्मद पैगम्बर साहब को मामनेवाले 'मुस्लमान एवं उनके धर्म को इस्लाम' कहते है।

'कुरान शरीफ' इस्लाम का पवित्र ग्रंथ है। इस्लाम धर्म समाज में अंतर्निहित अनिष्ठ प्रथाओं पर कड़ा प्रहार करता है। मानवजाति की एकता पर बल दिया जाता है। इस्लाम में एकेश्वर को मानते हुए मूर्तिपूजा अमान्य की है। ईमान, नमाज, रोजा, जकात, हज का इस्लाम धर्म में विशेष स्थान है। मुसलमानों का ईमान केवल अल्लाह के प्रति है। हजरत मुहम्मद उनके पैगंबर मने जाते है। मूर्तिपूजा इस्लाम में अमान्य है। मक्का-मदीना, अजमेर, दिल्ली, लखनऊ, इमामबाड़ा आदि पवित्र स्थल मने जाते हैं। अल्लाह से बंदगी करना नमाज कहलाता है। इस्लाम के अनुयायी दिन में पांच बार नमाज अदा करते है। 


रमजान का महिना पवित्र माना जाता है। रमजान के दिनों में रोजा रखा जाता है। अंत में ईद की नमाज अदा की जाती है। जकात का अर्थ है कि अपनी आमदनी का ढाई फीसदी हिस्सा गरीबो, अनाथ, अस्पतालों में दान करना है।

हज को जाना मुस्लिमों का महत्वपूर्ण उद्देश्य एवं कर्तव्य माना जाता है। मक्का मदीना, दिल्ली की जामा मस्जिद, अजमेर का ख्वाजा नवाज साहब का दरगाह, लखनऊ का इमामबाड़ा आदि पवित्र स्थल है। भारतीय धर्म-दर्शन, संस्कृति, शिक्षा एवं मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान इस्लाम धर्म का रहा है।


• ईसाई धर्म 


ईसा मसीहा को माननेवाले लोग ईसाई' कहलाते हैं। 'बाईबल' ईसाई का धर्मग्रंथ 'गिरिजाघर ईसाई का पवित्र पूजास्थल, 'क्रास' ईसाई का पवित्र चिन्ह माना जाता है। ईसाई धर्म एकेश्वरवादी एवं मूर्तिपूजा अमान्य है। ईसा के जन्म एवं मृत्यु के स्थान तीर्थस्थल मने जाते है।

मानव प्रेम, दया, न्याय, मित्रता, सहानुभूति, परोपकार, क्षमा, दान, नम्रता आदि सदगुणों के विकास पर बल दिया जाता है। भारतीय धर्म-दर्शन, संस्कृति, शिक्षा एवं मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान ईसाई धर्म का रहा है।


भारत में हिंदू, बौद्ध, जैन, शिख, इस्लाम, ईसाई आदि विविध धर्मो का दर्शन एवं शिक्षा का घनिष्ठ संबंध है। भारतीय धर्म-दर्शन, संस्कृति, शिक्षा एवं मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान हिंदू, बौद्ध, जैन, शिख, इस्लाम, ईसाई आदि विविध धर्म का रहा है। आदर्श आचरण करने वाले व्यक्ति का आचरण समाजहित में ही रहता है। सत्य बोलना चोरी नहीं करना. ब्रम्हचर्य पालन, संयम, हिंसा न करना, अनावश्यक संग्रह आदि मूल्यं सभी धर्मोमे सम्मिलित है जो सर्वसामान्य व्यक्तियों के लिए व्यवहार में लाना संभव है। उक्त छोटी-छोटी चीजे व्यक्ति एवं समाज को जनकल्यानात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है। राष्ट्रिय एवं भावात्मक एकात्मता, अंतरराष्ट्रीय सदभाव, विश्वकल्याण के लिए संस्कारित मानव का विकास करना शिक्षा का प्रधान लक्ष्य है।