ईसाई सामाजिक व्यवस्था - Christian social order
ईसाई सामाजिक व्यवस्था - Christian social order
ईसाई सामाजिक व्यवस्था मूल रूप से ईसाई धर्म की ही देन है। ईसाई धर्म का आरंभ 'पैलेस्टाइन' नामक स्थान से माना जाता है तथा इसके संस्थापक/प्रवर्तक 'ईसा मसीह (जीसस क्राइट) हैं। यह धर्म पूर्ण रूप से ईसा मसीह द्वारा दिए गए उपदेशों. प्रवचनों, आदर्शों और उनके द्वारा प्रदान की गई शिक्षा का ही प्रतिरूप है। ईसा मसीह ने ईश्वर की एकता और उसकी निष्पक्षता को समाज के सामने रखा तथा प्रेम, त्याग, कल्याण, अहिंसा, मानव सेवा, परोपकार का संदेश लोगों को दिया। उन्होंने घोषणा की "तुम गरीब धन्य हो, क्योंकि ईश्वर का राज्य तुम्हारा ही है। तुम रोने वाले हो धन्य हो, क्योंकि तुम ही तो हसोगे। " ईसा मसीह ने दुखी और असहाय जनता को समझाया कि "संपदा में विश्वास करने वाले लोगों का ईश्वर के राज्य में प्रवेश पाना दुष्कर है। जिस प्रकार से सुई के छेद में ऊंट प्रवेश नहीं कर सकता, उसी प्रकार ईश्वर के राज्य में धनी लोगों का प्रवेश नहीं कर सकता।" वे आगे कहते हैं कि अपने दुश्मनों से प्रेम करो। जो तुमसे घृणा करते हैं, तुम उनसे साथ प्रेम-विनम्र व्यवहार करो। जो तुम्हें अभिशाप देते हैं, तुम उन्हें आशीर्वाद दो, जो तुम्हें गलियाँ देते हैं, तुम उनके लिए दुआएं करो... स्वयं को पहचानों, अपने शत्रुओं से भी प्यार करो और उनकी सहायता करो।
कभी निराश न हो, तुम्हें उसका फल अवश्य मिलेगा।" ईसा मसीह के अनुसार "ईश्वर गरीब का है और वह उन्हें बहुत प्यार करता है। ईश्वर धन, संपत्ति और पद देखकर पक्षपात नहीं करता है। वह तो प्रेम का भूखा है। अतः सबसे प्रेम करो.. सबके प्रति तुम्हारा यह प्रेम भाव ही ईश्वर प्रेम में परिवर्तित हो जाएगा और तुम ईश्वर के राज्य में प्रवेश पाने के अधिकारी हो जाओगे।"
उक्त प्रस्तुत ईसा मसीह के कथनों से यह स्पष्ट होता है कि ईसाई धर्म बंधुत्व की भावना, प्रेम, त्याग, समर्पण, मनवातावादी विचारों, ईश्वर की आस्था, तार्किक ज्ञान, वैयक्तिक स्वतंत्रता आदि प्रकार की विशेषताओं से युक्त है। वर्तमान समय में ईसाई धर्म दो गुटों में वर्गीकृत हो चुका है- कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट। हालांकि ए दोनों सांप्रदायिक समूह अपने मूल में अलौकिक, रहस्यवादी तथा दिव्य शक्ति में विश्वास रखते हैं तथा उनके अनुयायियों में भी अंतर कर पाना काफी मुश्किल है। दोनों प्रकार के अनुयायियों की जीवन-विधि, व्यवहार प्रतिमान में काफी समानता देखने को मिलती है, अतः उनमें कोई विभाजक रेखा खींच पाना एक दुरूह कार्य है।
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