वर्ग चेतना - Class consciousness
वर्ग चेतना - Class consciousness
वर्ग चेतना की चर्चा एवं विश्लेषण बहुत अधिक होता है। मार्क्स की इस धारणा में वर्ग की संरचनात्मक स्थिति एवं वैचारिकी या चेतनात्मक समझ का संतुलन है। मार्क्स ने कहा वर्ग में वर्ग चेतना स्वतः नहीं आती है. यह विषयनिष्ठ रूप से विकसित होती है। इस संबंध में हंगरी के मार्क्सवादी विद्वान जिन्हें युवा मार्क्स कहा जाता है. उस पर ग्यार्ग लूकाच (जॉर्ज लूकाच) ने इतिहास एवं वर्ग चेतना नामक पुस्तक में विस्तृत चर्चा की। लूकाच ने लिखा कि पूँजीवाद से पहले जो वर्ग समाज में विभक्त थे उनके वर्गों में बहुत स्पष्ट वर्ग चेतना नहीं थी। पूँजीवाद में मजदूरों में वर्ग चेतना सही-सही रूप से पैदा होती है। बहुधा यह वर्ग चेतना उनमें स्वतः पैदा नहीं होती है, बल्कि प्रगतिशील बुद्धिजीवियों के द्वारा बाहर से लाई जाती है, परंतु मजदूर वर्ग ही वस्तुनिष्ठ रूप से उस अवस्था में होता है कि वह वास्तविक वर्ग चेतना विकसित कर सके। इसका कारण है कि मजदूर अपने पारंपरिक उपकरणों से वंचित हो जाते हैं, उनकी व्यक्तिगत विशिष्टता का आधार छूट जाता है, वे अपनी पारंपरिक जगहों से टूट जाते हैं एवं वे एक समूह में साथ-साथ कार्य करते हैं।
उनके हित वास्तव में एक जैसे होते हैं। कार्ल गार्क्स ने अपनी पुस्तक आर्थिक एवं दार्शनिक पांडुलिपियों में इसके संबंध में लिखा था। इस दृष्टि से देखने पर वर्ग चेतना का अर्थ होता है।
• एक वर्ग को यह अनुभव हो कि वे एक विशेष वर्ग के सदस्य हैं।
• वे आपस में सार्थक एकता स्थापित करते हैं इसलिए वर्ग के सदस्य समझ जाते हैं और उनके वर्गीय हित एक हैं। इटली के अंतोनीयो ग्रामची ने भी यह स्वीकार किया कि हितों की समानता का अनुभव और एक जुटता का अनुभव वर्ग चेतना के अनिवार्य तत्व हैं।
• वर्ग के सदस्यों को यह अनुभव होता है कि उनके हित, दूसरे वर्ग एवं वर्गों के हितों से अलग हैं। यह भी कि उनके वर्गों के हित एवं दूसरे के हित आपस में टकराते हैं।
• वर्ग चेतना का अर्थ यह भी है कि वर्ग के सदस्य यह भी अनुभव करें कि अपने वर्ग हितों को पूरा करने के लिए उन्हें संघर्ष करना होगा। इसका अर्थ यह भी है कि एक वर्ग चेतना के अभाव में आप में वर्ग होता है
वह वर्ग चेतना उत्पन्न कर लेने पर अपने लिए वर्ग बन जाता है।
वर्ग चेतना एक विषयनिष्ठ अथवा व्यक्तिनिष्ठ विशेषता और लक्षण है। कार्ल मार्क्स ने वर्ग चेतना के संबंध में यह कहा है कि पूँजीपति वर्ग उद्योगपति वर्ग कभी भी वास्तविक वर्ग चेतना विकसित नहीं कर पाता है। उनकी वर्ग चेतना अवास्तविक वर्ग चेतना (False class consciousness) होती है। इसका कारण है कि पूँजीपति मुनाफे के लिए बराबर एक-दूसरे से प्रतियोगिता करते हैं। उनमें सार्थक एकता नहीं पाती है।
इस धारण के संबंध में बहुत विवाद है। वास्तविक अवस्थाओं में यह देखा गया कि मजदूर वर्ग अपनी एकता स्थापित नहीं कर पाते हैं। इनके बहुत अधिक संगठन यह कहते हैं कि मजदूर वर्ग में एकता स्थापित करना है। इसके विपरीत पूँजीपति वर्ग बहुत आसानी से संकट के समय अपनी एकता स्थापित कर लेते हैं। कोका कोला और पेप्सी कोला शीतल पेय बनाने वाली विश्व की दो बड़ी अमेरिकी कंपनियाँ हैं। विश्व पैमाने पर इसमें प्रतियोगिता है। भारत में एक स्वयंसेवी संगठन ने श्रम साध्य परीक्षणों से जब यह सिद्ध कर दिया कि इन दोनों शीतल पेयों में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व हैं तब ये दोनों कंपनियाँ जो एक-दूसरे से जबरदस्त प्रतियोगिता करती हैं, तत्काल अपनी व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए एकजुट हो गई।
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