वर्ग संघर्ष एवं वर्ग युद्ध - class struggle and class war

वर्ग संघर्ष एवं वर्ग युद्ध - class struggle and class war


वर्ग संघर्ष का तीव्रतम रूप वर्ग युद्ध है। मार्क्स ने कहा कि विरोधी वर्गों के हित समन्वय के लायक नहीं होते हैं। वर्ग संघर्ष के आरंभ होने के बाद यह लगातार अक्रमिक रूप से तीव्र होता जाता है। अंततः पूरा समाज ही दो विरोधी खेमों में विभाजित हो जाता है। इन खेमों में हिंसात्मक संघर्ष होता है जिसे वर्ग युद्ध कहते हैं। वर्ग युद्ध सामाजिक क्रांति का आवश्यक अंग है। वर्ग संघर्ष एवं वर्ग युद्ध मार्क्स के अनुसार इतिहास की चालक शक्ति है। वर्ग संघर्ष से परिवर्तन होता है। समाज के वर्गों की स्थिति, उनका महत्व, उनकी भूमिका बदल जाती है। वर्ग संघर्ष सामान्यतः तीव्रतर होते जाते हैं। ऐसा होना मशीनी नहीं है। उन्नीसवीं शताब्दी में अमेरिका में बड़े वर्ग संघर्ष हुए।

शिकागों में मजदरों के संघर्ष की याद में पूरी में दुनिया में मजदूर पहली मई को मजदूर दिवस मनाते हैं। अब लंबे समय से अमेरिका में वर्ग संघर्ष की बात नहीं सुनी जाती है। द्वंद्ववाद के सिद्धांत के अनुसार वर्ग संघर्ष कभी अधिक परिवर्तन करते हैं एवं कभी कम करते हैं। मार्क्स ने वर्ग विभाजित समाजों के इतिहास को वर्ग संघर्ष का इतिहास कहा है। मार्क्स ने सबसे अधिक पूँजीवादी समाज के वर्ग संघर्ष की चर्चा की है। वर्ग युद्ध क्रांति का वाहक है। उत्पादन की शैली जब एक ठहराव की स्थिति में आ जाती है तब उत्पादन के संबंधों को बदले बिना उनमें परिवर्तन नहीं हो सकता है। ऐसी स्थिति में वर्ग संघर्ष अपनी चरम अवस्था में पहुँच जाता है और वर्ग युद्ध की स्थिति आ जाती है, परंतु यह मशीनी रूप से नहीं होता है। यदि वर्ग युद्ध होता है तब क्रांति होती है। यह सफल भी हो सकती है और असफल भी। सामाजिक क्रांति एक समाज को आमूल चूल बदल देती है।