सामाजिक प्रणाली के रूप में सामूहिकता - Collectivism as a social system
सामाजिक प्रणाली के रूप में सामूहिकता - Collectivism as a social system
पारसन्स की सामूहिकता की धारणा एक सामाजिक प्रणाली के रूप में भूमिका की अवधारणा से जुड़ी है। सामूहिकता की धारणा को सामाजिक प्रणाली की सीमा के द्वारा ही पहचाना जा सकता है। इससे ही यह निर्धारित होता है कि सामूहिकता की सदस्यता के दयारे में किन सदस्यों को रखा जाए और किन सदस्यों को न रखा जाए। सभी सामूहिकताओं की अपनी सदस्यता की सीमाएँ होती हैं। (जैसे-नातेदारी, योग्यता, कौशल या धार्मिक विश्वास आदि)। यहाँ सीमा से हमारा मतलब उन सीमाओं से है, जिनकी दृष्टि से सामाजिक प्रणाली एक अलग सता या इकाई के रूप में कार्य करती है। सामाजिक प्रणाली के उदाहरण के रूप में नातेदारी व्यवस्था में इनके सदस्य उनकी भूमिकाएँ और प्रस्थिति है। ये दोनों उस समाज एक स्थिति से दूसरी स्थिति में अलग-अलग होती है। श्रेणी के समान सामूहिकता केवल समाज के सदस्यों का समूह नहीं है। किसी श्रेणी का निर्धारण आयु. लिंग या शिक्षा जैसी समायोजन बातों के आधार पर होता है। सामूहिकता केवल उन व्यक्तियों की बहुलता में नहीं है जो परिस्थतिवश समान रूप में एक-दूसरे पर निर्भर है यानी बाजार जैसी भौतिक स्थिति है।
सामूहिकता उपर्युक्त दोनों प्रकार के सामाजिक समुच्चयों से भिन्न है। क्योंकि इसकी बहुलता की विशेषता इसके सदस्यों की संकात्मकता है। जैसा कि नातेदारी के समूह में या किसी संघ में पाया जाता है। यह एकात्मकता समान मूल्यों के संस्थागत होने से पैदा होती है। जैसे किन्हीं निकट संबंधियों में सहयोग की भावना के रूप में या समान धार्मिक आचरणों या विश्वासों को मानने वाले लोगों के रूप में।
सामूहिकताओं के कुछ आंतरिक उप-विभाजन उप-सामूहिकताओं के रूप में हो सकते हैं, जहाँ सदस्यता का क्षेत्र परस्पर व्यापी हो सकता है। सामूहिकताएँ और उप-सामूहिकताएँ ये दोनों सामाजिक प्रणाली के रूप में है। पारसन्स के अनुसार समाज एक पूर्ण सामाजिक प्रणाली है, जो आत्मपोषी है या आत्मनिर्भर है और वह किसी बाहरी सामाजिक प्रणाली पर आश्रित नहीं है, लेकिन सामाजिक प्रणाली और समाज में अंतर आपेक्षित और विश्लेषण पर आधारित है।
अब तक आपने सामाजिक प्रणाली की अवधारणात्मक इकाई के बारे में पढ़ा है, जिसके अंतर्गत भूमिकाएँ, भूमिकाओं का संस्थागत होना और सामाजिक प्रणाली के रूप में सामूहिकता शामिल है। सामाजिक प्रणाली के रूप में सामूहिकता में व्यक्तियों को उपलब्ध अपनी पसंद की क्रियाओं की व्याख्या के लिए पारसन्स ने विन्यास प्रकारांतरों की अवधारणाओं का विकास किया।
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