भारत में औपनिवेशिक इतिहास लेखन: पहला चरण - Colonial Historiography in India: First Phase

 भारत में औपनिवेशिक इतिहास लेखन: पहला चरण - Colonial Historiography in India: First Phase


भारत में वैज्ञानिक इतिहास लेखन की शुरुआत कमोबेश अठ्ठारहवीं शताब्दी या ब्रिटिश राज के बाद हुई। ब्रिटिश शासकों और प्रशासकों ने भारतीय समाज रीति रिवाजों, प्रथाओं, धर्म और संस्कृति को बेहतर तरीके से समझने के लिए भारत का इतिहास लिखना शुरू किया। इस संबंध में विलियम जोन्स (1746 1794), माउंट स्टुअर्ट एल्फिनस्टोन (1779-1859), जेम्स प्रिंस (1799-1840) तथा विंसेंट स्मिथ (1848 1920) जैसे विद्वानों का इतिहास लेखन काफी महत्वपूर्ण है। इनमें से अधिकांश विद्वानों ने भारतीय सभ्यता और इतिहास को अपने ईसाई दृष्टिकोण से देखा और भारतीय सभ्यता की अवनति का कारण स्त्री का दोयम दर्जे पर होने को बताते हुए इसका दोषी ठहराया। मैक्समूलर (1823-1900), एच.टी. कॉलब्रुक (1765 1837) जैसे प्राच्यविद् भारत में वैदिक युग के बारे में स्वर्ण युग' के सिद्धांत के साथ आए। पाश्चात्य विद्वानों ने पश्चिम में औदयोगीकरण और भौतिकवाद से व्यथित होकर भारतीय अतीत को आदर्श माना। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि वैदिक युग भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग है और इस युग में स्त्रियाँ अपनी उच्चस्थिति को प्राप्त थी। यही सिद्धांत आगे चलकर राष्ट्रवादी विद्वानों द्वारा पोषित पल्लवित किया गया।