मनोवृत्ति के घटक - components of attitude
मनोवृत्ति के घटक - components of attitude
जैसा कि उपरोक्त परिभाषाओं से स्पष्ट होता है कि मनोवृत्तिमें तीन घटक शामिल होते हैं : भावात्मक संघटक, संज्ञानात्क संघटक एवं व्यवहारात्मक संघटका इन तीनों घटकों को इनके अंग्रेजी अनुवाद के प्रथम अक्षर के आधार पर ABC प्रतिरूप कहा जाता है। जहां A अर्थात Affect (भाव), B अर्थात Behavior (व्यवहार) तथा C अर्थात Cognition (संज्ञान) है।
उदाहरण के लिये,सुबह टहलने के प्रति मेरी मनोवृत्तिःचूंकि मेरा विश्वास है कि टहलना स्वास्थ्य के लिये लाभप्रद है, इसलिये में इसे पसंद करता हूँ इसीलिये में प्रातः काल टहलनेका इरादा रखता हूं और टहलने जाता हूँ।
ये तीनों घटक है: भावात्मक संघटक, संज्ञानात्मक संघटक तथा व्यवहारात्मक संघटक ।
● भावात्मक संघटक: भावात्मक घटक से तात्पर्य किसी मनोवृत्तिवस्तु के प्रति व्यक्ति के भाव से है अर्थात सुखद-दुखद भाव अथवा पसंद ना पसंद। मनोवृत्तिकी तीव्रता का संबंध भावात्मक घटक से है।
जैसे- डर, सहानुभूति, घृणा, पसंद आदि / उदाहरण के लिये, आप अपने अधिकारी या शिक्षक के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक भाव रख सकते हैं। आप किसी कविता को पसंद या ना पसंद कर सकते हैं। स्वाभाविक है कि ये भावनायें अपनी तीव्रता में भिन्न हो सकती हैं। जैसे कि मै समाज शास्त्र को बहुत पसंद करता हूँ। मैं संगीत को बहुत पसंद करता हूँ। मैं अमुक राजनैतिक पार्टी को बहुत ना पसंद करता हूँ। ये भावनायें हमारे पुराने अनुभवों से बनती है और भविष्य में हमारे द्वारा होने वाले व्यवहारों को प्रयवित तथा निर्देशित करती हैं। जैसे यदि आप समाजशास्त्र को पसंद करते हैं तो आप समाजशास्त्र के प्रोफेसर के व्याख्यान को सुनने जायेंगे या समाजशास्त्र की पुस्तकों को एकत्र करेंगे और उनका अध्ययन करेंगे। इसी प्रकार जिस राजनैतिक पार्टी या नेता को आप ना पसंद करते हैं उसे आने वाले चुनाव में वोट नहीं करेंगे। मनोवृत्तिपर अध्ययन करने वाले अधिकतर शोध इसी घटक पर अधिक बल देते हैं। कम्पनियां अपने विज्ञापनों में संवेगात्मक अपील को जोड़ती हैं इसी तरह किस उत्पाद आपको दूर करना होगा अथवा जिसका उपयोग आपके लिये हानिकारक होता है, उनको आप उपयोग न करें, इसके लिये ही शराब, और धूम्रपान जैसे उत्पादों के ऊपर “शराब स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है" “धूम्रपान से कैंसर होता है" इत्यादि लिखा जाता है। उपरोक्त उदाहरणों में भावात्मक घटक पर बल दिया गया है। शोधों के परिणामों से स्पष्ट है कि भाव मनोवृत्ति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
● संज्ञानात्मक घटक: मनोवृत्तिमें भावना से भी ज्यादा कुछ शामिल होता है। जो है ज्ञान अथवामनोवृत्ति- वस्तु के प्रति / बारे में हमारा विश्वास । उदाहरण के लिये, आपका विश्वास है कि समाजशास्त्र की पढ़ाई करने के बाद आप व्यक्ति और समाज को ठीक से समझ पाओगे, सामाजिक संरचना को जान पाओगे तो आप समाजशास्त्र के अध्ययन में अधिक रूचि लेंगे। समाजशास्त्र के बारे में आपकी मनोवृत्तिका यही संज्ञानात्मक घटक है। संज्ञानात्मक घटक इस ओर संकेत करता हैकि मनोवृत्ति वस्तु के प्रति हमारी धारणा अथवा विश्वास क्या है? संज्ञान का मतलब जानना, पहचान करना होता है। इससे स्पष्ट होता है कि मनोवृत्तिका संज्ञानात्मक घटक एक भण्डारण घटक जैसा है। जहाँ पर मनोवृत्तिवस्तु के बारे में सूचनाओं को संगठित अथवा भण्डारित करते हैं। इसमें हमारे विचार, विश्वास, मत इत्यादि सग्रहित होते हैं। फिशबोब और एजेन (1975) के अनुसार संभाव्यता के बारे में विश्वास एक संज्ञान हैं जो एक वस्तु और/या घटना में दिये हुये गुण के साथ साहचर्यित होता है।
● व्यवहारात्मक घटकः इस घटक को क्रिया घटक भी कहते हैं। मनोवृत्तिका एक अन्य महत्वपूर्ण घटक है। व्यक्ति की स्पष्ट तथा दिखाई देने वालीक्रियाओं को सामान्यतः व्यवहार के रूप में परिभाषित किया जाता है।
व्यवहारत्मक घटक से तात्पर्य मनोवृत्तिके उस घटक से है जिसमें व्यक्ति की मनोवृत्ति वस्तु के प्रति क्रिया या व्यवहार घटित होता है।
● मनोवृन्ति, मूल्य एवं विश्वास
मनोवृत्तिके स्वरूप को ठीक से स्पष्ट करने के लिये इससे संबंधित या मिलते-जुलते कुछ प्रमुख संप्रत्ययों को समझ लेना आवश्यक है। ये मुख्य सम्प्रत्यय इस प्रकार हैं।
● मूल्य: मूल्य या ज्ञान का तात्पर्य लक्ष्य से होता है जिसे एक समाजविशेष का सदस्य प्राप्त करना चाहता है। इसमें सकारात्मक अथवा नकारात्मक भाव सम्मिलित होता है। वर्के का तथा कूपर (1979) ने मूल्य को इस प्रकार परिभाषित किया है- मूल्य से तात्पर्य वस्तु या विचार से संबंधित सकारात्मक या नकारात्मक भाव से है। मनोवृत्ति और मूल्य दोनों में यह समानता है कि दोनो सीखे हुये होते हैं अर्थात यह जन्मजात न होकर. अर्जित होते हैं। फिर भी दोनों में भिन्नतायें भी होती हैं। मूल्य में भावात्मक पक्षअभिवृत्ति की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होता है, /मूल्य में अभिवृत्ति की अपेक्षा परिवर्तन कठिन होता है क्योंकि यह लगभग स्थिर होते हैं।
मनोवृत्तिको सकारात्मक अथवा नकारात्मक में बांटा जा सकता है लेकिन मूल्य कई प्रकार के होते है जैसे- सामाजिक मूल्य, आर्थिक मूल्य, धार्मिक मूल्य इत्यादि।
● मनोवृत्ति एवं विश्वासः मनोवृत्तिका विश्वास से भी गहरा संबंध है किन्तु दोनों ही सम्प्रत्यय अलग अलग हैं। विश्वास किसी मनोवृत्तिवस्तु की सम्भावना के बारे में संज्ञान है। कुछ सिद्धांतकार, विशेषकर आधुनिक मनोवैज्ञानिक विश्वास को मनोवृत्तिका एक घटक मानते हैं। फिर भी. मनोवृत्ति और विश्वास में भिन्नता है। मनोवृत्ति को विश्वासों के योगफल के रूप में माना जा सकता है। किसी घटना के प्रति व्यक्ति कई तरह के विश्वास रख सकता है, उस व्यक्ति की उस घटना के प्रति मनोवृत्तिउसके इन विश्वासों के मूल्यांकन के आधार पर हो सकती है। क्रेक एवं क्रचाफिल्ड (1948) के अनुसार, “व्यक्ति द्वारा संसार के किसी पक्ष के बारे में प्रत्यक्ष एवं संज्ञान के स्थायी संगठन को विश्वास कहा जाता है।"
मनोवृत्तितथा विश्वास में समानता है फिर भी, ये एक दूसरे से भिन्न हैं।
मनोवृत्तिमें तीन घटक अर्थात संज्ञानात्मक, भावात्मक तथा व्यवहारात्मक घटक होते हैं जबकि विश्वास में ये तीनों घटक नहीं होते। इसमें केवल संज्ञानात्मक घटक ही प्रमुख होता है जबकि भावात्मक घटक नही होता है तथा व्यवहारात्मक घटक गौण होता है। मनोवृत्तिमें परिवर्तन तेजी से होता है जबकि विश्वास में परिवर्तन तेजी से नहीं होता है।
● मनोवृत्ति तथा मत: मनोवृत्तिका संबंध मत से भी होता है। कई लोग इनको एक दूसरे के स्थान पर प्रयोग करते हैं जबकि ऐसा करना सही नहीं है। हालांकि मनोवृत्तिमें मत सम्मिलित होता है। इसलिये इन दोनों सम्प्रत्ययों में संबंध भी गहरा है। चेपलिन (1975) के अनुसार “मत एक विश्वास है, विशेषकर ऐसा विश्वास जो अस्थाई होता है और जिसमें परिमार्जन की संभावना बनी रहती है।"
मत में भी संज्ञानात्मक तत्व निहित होता है। चूकिं मनोवृत्ति में भी संज्ञानात्मक घटक होता है इसलिये इन दोनों में समानता है फिर भी दोनों एक-दूसरे से भिन्न हैं। कई भिन्नतओं में से जो एक मुख्य अन्तर है वह है, भावात्मक घटका मनोवृत्तिमें संज्ञानात्मक घटक के अलावा भावात्मक घटक भी होता है लेकिन मत में भावात्मक घटक नहीं होता।
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