अनिवार्य तथा निःशुल्क शिक्षा - compulsory and free education
अनिवार्य तथा निःशुल्क शिक्षा - compulsory and free education
स्वतंत्र भारत के संविधान की धारा 45 में प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य व निः शुल्क बनाने का संकल्प किया। इसमें कहा गया कि संविधान लागू होने के 10 वर्ष के अन्दर राज्य अपने क्षेत्र के 14 वर्ष तक के सभी बालकों निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करेगा" परन्तु यह प्रयास पूरा नहीं हो पाया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में भी प्रारम्भिक शिक्षा के सार्वजनीकरण को विशेष प्राथमिकता दी गई थी परन्तु 6-14 वर्ष तक की आयु के सभी बालक/बालिकाओं को स्कूल भेजने तथा अपनी प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सका। इस स्थिति पर विचार करते हुए सन् 2002 में 46 वें संविधान संगोधन के द्वारा अनुच्छेद 45 को शैशवपूर्ण देखभाल व शिक्षा तक सीमित करते हुए अनुच्छेद 21 (क) को जोड़कर प्राथमिक शिक्षा को एक मूल अधिकार बना दिया गया। इसके साथ-साथ अनुच्छेद 51 क (ट) जोड़कर 6 से 14 वर्ष की आयु के पाल्यों के सभी माता-पिता व संरक्षको के लिए पाल्यों को 6 से 14 वर्ष की आयु तक शिक्षा की व्यवस्था करने का दायित्व को नागरिकों का मूल कर्तव्य घोषित कर दिया गया। तथा सन् 2009 में भारतीय संसद ने “अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009" को पारित करके इसे कानूनी दर्जा दे दिया।
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