शिक्षा की अवधारणा - concept of education

 शिक्षा की अवधारणा - concept of education


शिक्षा, समाज की एक पीढ़ी द्वारा अपने से निचली पीढ़ी को अपने ज्ञान के हस्तांतरण का प्रयास है। इस विचार से शिक्षा एक संस्था के रूप में काम करती है. जो व्यक्ति विशेष को समाज से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा समाज की संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती है। बच्चा शिक्षा द्वारा समाज के आधारभूत नियमों, व्यवस्थाओं, समाज के प्रतिमानों एवं मूल्यों को सीखता है। बच्चा समाज से तभी जुड़ पाता है जब वह उस समाज विशेष के इतिहास से अभिमुख होता है।


दूसरे अर्थों में शिक्षा व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता तथा उसके व्यक्तित्व को विकसित करने वाली एक गतिशील प्रक्रिया है। इ

स प्रक्रिया के द्वारा उसे समाज में एक वयस्क की भूमिका निभाने के लिए तथा सामाजिक मानकों, नियमों मान्यताओं की समझ विकसित कर समाज में समायोजित होने के लिए तैयार करती है तथा समाज के सदस्य एवं एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए व्यक्ति को आवश्यक ज्ञान तथा कौशल उपलब्ध कराती है।


यदि शाब्दिक अवधारणा को दृष्टिगत रखे तो शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा की शिक्ष” धातु में 'अ' प्रत्यय लगाने से बना है। ‘शिक्ष' का अर्थ है सीखना और सिखाना। 'शिक्षा' शब्द का अर्थ हुआ सीखने सिखाने की क्रिया।


विभिन्न शिक्षाशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों मनोवैज्ञानिकों व नीतिकारों ने शिक्षा के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त किये हैं।

शिक्षा के अर्थ को समझने में ये विचार भी हमारी सहायता करते हैं। कुछ शिक्षा सम्बन्धी मुख्य विचार यहाँ प्रस्तुत किए जा रहे हैं:


* महात्मा गाँधी के अनुसार “शिक्षा से मेरा तात्पर्य बालक और मनुष्य के शरीर, मन तथा आत्मा के सर्वांगीण एवं सर्वोत्कृष्ट विकास से है "


* स्वामी विवेकानंद के अनुसार मनुष्य की अन्तर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है') ॐ शिक्षा व्यक्ति के समन्वित विकास की प्रक्रिया है - जे. कृष्णमूर्ति


* जान डीवी के अनुसार - शिक्षा व्यक्ति की उन सभी आंतरिक शक्तियों का विकास है जिससे वह अपने वातावरण पर नियंत्रण रखकर अपने उत्तरदायित्त्वों का निर्वाह कर सके


* हर्बर्ट स्पेंसर के शब्दों में शिक्षा का अर्थ अन्तः शक्तियों का बाह्य जीवन से समन्वय स्थापित करना है'


* पेस्तालाजी के अनुसार शिक्षा मानव की सम्पूर्ण शक्तियों का प्राकृतिक, प्रगतिशील और सामंजस्यपूर्ण विकास है"


* शिक्षा राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक विकास का शक्तिशाली साधन है. शिक्षा राष्ट्रीय सम्पन्नता एवं राष्ट्र कल्याण की कुंजी है। (राष्ट्रीय शिक्षा आयोग, 1964-66)


* शिक्षा बच्चे की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन है। (सभी के लिए शिक्षा पर विश्वव्यापी घोषणा, 1990)