पैरकसिस की धारणा - concept of paresis
पैरकसिस की धारणा - concept of paresis
मानव अपने इतिहास का निर्माण स्वयं करता है, परंतु यह निर्माण वह अपनी इच्छा से जैसा चाहे वैसा नहीं कर सकता है। यह एक परिस्थिति विशेष में होता है, जो स्वयं उसके द्वारा बनाई नहीं जाती है। इस सिलसिले में मार्क्सवादियों में क्रियात्मकता की धारणा प्रचलित है। पैरकसिस शब्दावली का प्रयोग मार्क्स ने नहीं किया। इसका अर्थ है सिद्धांत एवं कार्य की एकरूपता । केवल सिद्धांत से कुछ नहीं होता है, प्रयास, व्यवहार और सक्रिय कार्य अनिवार्य है। दूसरी ओर प्रयास को सिद्धांत निष्ठ होना चाहिए। मार्क्स ने कहा ऐसा कार्य जो सिद्धांत द्वारा निदेशित नहीं है वह अंधा कार्य है और ऐसा सिद्धांत जो व्यवहार से लैस नहीं है वह लंगड़ा सिद्धांत है। द्वंद्वात्मकता के अनुसार यह माना जाता है कि परिणामों में अनिश्चितता होती है। इसका अर्थ है कि सामंतवादी संघर्ष में यह तो तय है कि अंततः सामंत पराजित होंगे, परंतु अंतर्वर्ती संघर्षों में कभी सामंत और कभी नई शक्तियाँ जीत सकती हैं। यह उनकी तैयारी, संगठन, प्रयास, नेतृत्व की क्षमताओं एवं परिस्थितियों के उपयोग पर निर्भर करता है।
इस अनिश्चितता एवं उठा-पटक के साथ, यह भी हो सकता है, मार्क्स ने यह भी कहा कि प्रत्येक परिवर्तन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होता है। द्वंद्वात्मकता के संदर्भ में मार्क्स ने कहा हम अपने तात्कालिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में तत्काल सफल हो सकते हैं, परंतु हम न तो लंबी अवधि में होने वाले अनपेक्षित परिणामों को रोक सकते हैं और न ही उनका पूर्वानुमान कर सकते हैं। पूँजीवाद के संदर्भ में मार्क्स ने कहा कि यह अनेक व्यक्तियों को क्रियाओं का ऐसा परिणाम है, जिसका पूर्वानुमान उन्हें नहीं था। पूँजीपति वर्ग अधिक-से-अधिक मुनाफा एवं धन संग्रह के क्रम में यह अनुमान नहीं कर सका कि वह एक मजदूर वर्ग का भी निर्माण कर रहा है जो उसके विनाश का कारण होगा। मार्क्स ने कहा समाज में परिवर्तन का क्रम भी बहुधा अवक्रमित हो जाता है। वर्तमान समय में अफ्रीकी देश एक ही उछाल से आदिवासी स्थिति में आ रहे हैं। गैर अनुमानित परिणामों की चर्चा मैक्स बेबर ने बहुत अधिक की है। ने वर्नान वेनेवल के अनुसार मार्क्स ने द्वंद्ववाद के आधार पर यह कहा कि हम अपनी चेतन इच्छाओं को तत्काल सामने लाने में सफल हो जाते हैं, परंतु हम लंबी अवधि के परिणामों को सही-सही नहीं जान पाते और वे अनपेक्षित होते हैं। उनके अनुसार आगामी युग के बीज यानी प्रौद्योगिकी के अंश पुराने युग के गर्भ में ही उत्पन्न हो जाते हैं। इनका विकास इस युग में संभव नहीं है।
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