प्रसंग-समूह के परिणाम - Consequences of reference-group behaviour
प्रसंग-समूह के परिणाम - Consequences of reference-group behaviour
मर्टन ने प्रसंग-समूह के परिणामों को पूर्व तैयारी की अवधारणा से देखा है। व्यक्ति जब प्रसंग समूह की सदस्यता ग्रहण करने का इच्छुक होता है तो उसके क्या परिणाम निकलते हैं। भविष्य में सामाजिक स्तर प्राप्त करने के लिए व्यक्ति सचेत होकर पहले से तैयारी करने लगता है। जो सदस्यता अभी नहीं मिली है उसकी तैयारी पहले से ही करने लगना, प्रसंग-समूह व्यवहार का परिणाम है।
मर्टन ने प्रसंग-समूह व्यवहार के एक और परिणाम की व्याख्या तकनीकी ढंग से की है। प्रत्येक व्यक्ति की एक मुख्य भूमिका होता है, जैसे कोई व्यक्ति डाक्टर है। डाक्टर की भूमिका के साथ कुछ अन्य भूमिकाओं की शृंखला जुड़ी हुई है। जब वह कक्षा में पढ़ाता है तो वह अध्यापक की भूमिका में होता है। जब नर्स और दूसरे मातहतों से मिलता है, तो वह आफिसर की भूमिका में होता है। मरीज को देखते समय वह चिकित्सक की भूमिका में होता है। दवा विक्रेता एजेंट से बातीचत करते समय वह ग्राहक की भूमिका में होता है। यहाँ समझने की बात यह है कि ये भूमिकाएँ उसकी मुख्य भूमिका के साथ जुड़ी हुई है। इसलिए यह भूमिकाओं का सेट है।
प्रसंग-समूह में आने के इच्छुक व्यक्ति की भूमिका शृंखला दूसरे व्यक्तियों के भूमिका-शृंखला से जुड़ी हुई होती है। अतः दूसरे प्रसंग समूह में जाने के लिए या तो प्रोत्साहित करेंगे या हतोत्साहित करेंगे, जैसे कोई किसी संगठन में समय से पहले. प्रोत्साहित करेंगे या हतोत्साहित करेंगे। जैसे, किसी संगठन में समय से पहले, अपने सहयोगियों को पार करता हुआ कोई व्यक्ति उच्च पद पर पहुँचना चाहता है, तो उसके सहयोगी उसकी टाँग पकड़कर खींच सकते हैं या उसे समर्थन देकर प्रोत्साहित कर सकते हैं। यह व्यक्ति का भाग्य है कि किस प्रकार के भूमिका शृंखलाओं के जाल में फँसता है।
पूर्व- तैयारी के आधार पर मर्टन ने जीवन क्रम की विवेचना की है। समय के अंतर्गत, व्यक्ति तीन दिशाओं में भूमिका ग्रहण कर सकता है, समय की भूमिका. वर्तमान की भूमिका और भविष्य की भूमिका। यदि वह प्रतिगामी है तो अतीत की भूमिका की ओर झुकेगा। जैसे, कुछ बूढ़े लोग अपने अतीत के मोह रखते हैं। अतीत के सांस्कृतिक गौरव में रुचि रखते हैं। युवक वर्तमान की भूमिका के साथ-साथ भविष्य की भूमिका की भी तैयारी करते रहते हैं। अधेड़ उम्र वाले व्यक्ति का प्रसंग-समूह भविष्य में बुढ़ापे की प्रसंग-समूह होता है। अतः बुढ़ापे की भूमिका में सफल होने के लिए वह पहले से अपना समाजीकरण प्रारंभ कर देता है। मर्टन के प्रसंग-समूह व्यवहार के अपनाने का मुख्य परिणाम पूर्व तैयारी में प्रकट होता है।
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