मानवाधिकार का समकालीन परिदृश्य - Contemporary Scenario of Human Rights

 मानवाधिकार का समकालीन परिदृश्य - Contemporary Scenario of Human Rights


मानवाधिकारों की लम्बे समय से विकसित हो रही अवधारणा के अनुसार वर्तमान विश्व के संदर्भ में महत्वपूर्ण रूप से परिवर्तित हो रही है। इस अवधारणा में एक नया आयाम कुछ अन्तरालों पर महसूस किया जाने लगा और यह माना जाने लगा कि मानवाधिकारों की रक्षा केवल उन राज्यों की चिन्ता का विषय नहीं है, जहाँ पर इनका उल्लंघन होता हैं। अब तो पूरी दुनिया मे मानवाधिकारो के संरक्षण और प्रोत्साहन को सुनिश्चित करना सम्पूर्ण मानवता की चिन्ता का विषय बन गया हैं। मानवाधिकारों के लिए यह अंतरराष्ट्रीय चिन्ता हाल का विकास और संचार के विकास के साथ दुनिया के सिकुड़ने का परिणाम हैं।


मानवाधिकार सम्बन्धी दस्तावेजों के कई प्रावधानों को लेकर अनेक देशों को आपत्ति हैं। उदाहरण के लिए, सिविल और राजनैतिक अधिकारों के अंतरराष्ट्रीय करार के अनुच्छे में आत्मनिर्णय का अधिकार दिया गया हैं जिसके अनुसार सभी लोगों को अपने राजनैतिक स्तर का निर्णय करने का अधिकार हैं। सोवियत संघ में शामिल यूक्रेन, बेलारूस, कजाकिस्तान आदि इलाकों की जनता में सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक रूप से मूलभूत अंतर थे इसलिए लम्बे समय तक इन्हें बल प्रयोग से एकीकृत नहीं रखा जा सका और अंततः सोवियत संघ में से अनेक स्वतंत्र राष्ट्र यूक्रेन. तुर्कमेनिया आदि अलग हुए। पाकिस्तान भी अपने हिस्से के रूप में पूर्वी पाकिस्तान को सिर्फ राजनैतिक बल के आधार पर शामिल नहीं रख सका, क्योंकि दोनो हिस्सों में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक भिन्नता थी इसलिए अंतत: बंग्लादेश के रूप में पूर्वी पाकिस्तान अलग हो गया।

मार्क्सवाद ने मानवाधिकार की प्राकृतिक कानून' वाली धारणा को मानने से इन्कार किया है। पूँजीवादी व्यवस्था में उत्पादन पर पूँजीपतियों द्वारा कब्जा कर लिया जाता है। व्यक्तिवादी अधिकार और कुछ नहीं हैं, बल्कि बुजुर्ग वर्ग अधिकारों की व्याख्या हैं। आर्थिक साधनों पर कुछ लोगों के अधिकार से बहुसंख्यक सर्व सर्वहारा के हितों की पूर्ति नहीं हो सकती।


प्रमुख नियम, अधिनियम


भारतीय संविधान तथा विभिन्न दण्ड संहिताओं में भी कई ऐसे नियम विनियम, अधिनियम आदि बनाए गए हैं जिनकी सहायता से महिलाओं के हितों की रक्षा की जा सकती है। इसके अलावा अंग्रेजों के कारण महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार देखने को मिले, जैसे सती प्रथा उन्मूलन अधिनियम, विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, सिविल मैरिज अधिनियम, बाल विवाह अवरोधक अधिनियम आदि। कुछ प्रमुख अधिनियम नीचे दिए गए हैं:


• भारतीय दण्ड संहिता, 1860


• हिन्दु उत्तराधिकार अधिनियम, 1956


• हिन्द विवाह अधिनियम, 1956


• मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1939


• महिलाओं एवं लड़कियों के अधिनियम, 1956


• चलचित्र अधिनियम, 1952


• स्त्री अशिष्ट अधिनियम (प्रतिबंध). 1986


• मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961


• विशेष विवाह अधिनियम, 1954


• अपराधिक कानून यमअधिनि (संशोधन). 1986