उच्च एवं निम्न समूह मनोबल की कसोटी - Criteria of high and low group moral

उच्च एवं निम्न समूह मनोबल की कसोटी - Criteria of high and low group moral


किसी समूह का मनोबल ऊंचा हो सकता है तथा नीचा भी हो सकता है. समाज मनोवैज्ञानिकों ने कुछ कसौटी या सूचक का वर्णन किया है जिनके आधार पर हम आसानी से जान सकते हैं कि समूह का मनोबल ऊंचा है या नीचा है. किसी समूह में यदि निम्नांकित सूचक मौजूद हो तो समूह का मनोबल ऊंचा समझा जाता है परंतु यदि समूह में विपरीत स्थिति होती है, तो समूह का मनोबल नीचे समझा जाता है. 


1: समूह में एकता तथा एकात्मकता - समूह के सदस्यों में एकता तथा एकात्मकता कि भावना किसी बाय दबाव के कारण नहीं बल्कि आंतरिक समग्रता के कारण होती है, तो वैसी परिस्थिति में समूह का मनोबल ऊंचा समझा जाता है. आंतरिक समग्रता के आधार पर एकता होने पर सदस्य अपनी इच्छा अनुसार एक दूसरे से मिलकर समूह लक्ष्य की प्राप्ति की ओर अग्रसर होते हैं फलता समूह का मनोबल ऊंचा होता है. किसी समूह में कभी कभी किसी बाहरी प्रसिद्धि के कारण भी थोड़े समय के लिए एकता उत्पन्न हो जाती है

परंतु इसके आधार पर हम या नहीं कहेंगे कि समूह मनोबल ऊंचा है क्योंकि बाहरी परिस्थिति में पड़ने वाला दबाव समाप्त होते ही समूह की एकता भी समाप्त हो जाती है.


ii: विभाजन - संघर्ष का न्यूनतम स्तर जिस समूह के सदस्यों में भेदभाव एवं फूट डालने वाली प्रवृत्ति कम होती है वह समूह अधिक संगठित होता है तथा साथ ही साथ उसका मनोबल ऊंचा होता है. परंतु जी समूह में विभाजक शक्तियां अधिक होती है, उनके सदस्यों में संगठन काफी कम होता है, जिसके कारण समूह का मनोबल काफी नीचा होता है.


III: समूह को सदस्यों एवं नेतृत्व के प्रति अनुकूल - मनोवृति जब समूह में सदस्यों की मनोवृत्ति एक दूसरे के प्रति एवं समूह के नेता के प्रति अनुकूल होती है तो समूह का मनोबल ऊंचा होता है. ऐसी परिस्थिति में समूह के सदस्य एक दूसरे के प्रति तथा साथ ही साथ समूह के नेता के प्रति काफी नष्ट होते हैं. इसके विपरीत जब सदस्यों की मनोवृत्ति एक दूसरे के प्रति एवं साथ ही साथ समूह के नेता के प्रति नकारात्मक होती है तो इस स्थिति भयावह हो जाती है और समूह का मनोबल काफी नीचे समझा जाता है.


iv: नई एवं परिवर्तनशील परिस्थितियों के प्रति अनुकूलता - जब समूह के सदस्यों में नई एवं परिवर्तनशील परिस्थितियों के प्रति अपने आप को अनुकूल करने की क्षमता अधिक होती है, तो वैसी परिस्थिति में सदस्यों में आंतरिक संघर्ष होने की संभावना कम होती है, जिसके फलस्वरूप मनोबल काफी ऊंचा होता है. की तरफ यदि सदस्यों में नई एवं परिवर्तनशील परिस्थिति के साथ अनुकूलन करने की क्षमता नहीं होती है तो वैसी परिस्थिति में समूह में आंतरिक संघर्ष अधिक होता है और समूह का मनोबल नीचे समझा जाता है


V: सदस्यों में पर्याप्त मात्रा में मैत्री भाव- अगर समूह के सदस्यों के बीच मैत्री भाव पर्याप्त मात्रा में है तो समूह का मनोबल ऊंचा होता है. ऐसी परिस्थिति में समूह के सदस्यों में एक दूसरे के प्रति पसंदगी भी अधिक होती है. दूसरी तरफ यदि समूह के सदस्यों में मैत्री भाव का अभाव होता है तो सदस्यों में एक दूसरे के प्रति नापसंदगी अधिक होती है और समूह का मनोबल नीचा होता है.


vi: व्यक्तिक सदस्यों के उद्देश्यों की समानता - समूह में प्रत्येक सदस्य का अपना अपना एक विशेष उद्देश्य होता है. वैसे समूह का मनोबल ऊंचा समझा जाता है जिसकी अधिकतम सदस्यों का व्यक्ति का उद्देश्य करीब करीब एक ही समान हो. इस समानता के कारण सदस्यों में एकजुट होकर कार्य करने की प्रवृत्ति अधिक होती है जिससे उनमें एकता की वृद्धि होती है और समूह का मनोबल ऊंचा होता है. दूसरी तरफ यदि व्यक्ति के सदस्यों के उद्देश्यों में और समानता पता होती है तो इससे सदस्यों में आपस में मनमुटाव बढ़ता है और समूह का मनोबल नीचा समझा जाता है.


(vii: समूह समग्रता- जब समूह के सदस्यों में समूह में बने रहने के लिए आकर्षण अधिक होती है, तो उस समूह का मनोबल ऊंचा होता है. दूसरी तरफ जब सदस्यों के लिए समूह आकर्षक नहीं रह जाता जिसके परिणामस्वरूप वे सदस्यता को स्वेच्छा से त्यागने के लिए तैयार रहते हैं. तो समूह का मनोबल नीचे समझा जाता है.


viii: अहम-संहिता- जब समूह में सदस्यों में अहम संहिता का भाव अधिक होता है, तो वह समूह के साथ एक तरह का तादात्म्य या एकीकरण स्थापित कर लेता है, वह समूह के लिए ही जीता है या मरता है। ऐसे समूह का मनोबल ऊंचा ही होता है. दूसरी तरफ जब सदस्यों में अहम की भावना कम होती है तो वह समूह के सदस्यों के रूप में जो आवश्यक औपचारिकता होती है, मात्र उसे किसी तरह निभा देता है, इसके परिणाम स्वरूप ऐसे समूह का मनोबल प्रायः नीचा होता है.


ix: उत्तरदायित्व की एवं समूह में होने की भावना किसी समूह के उच्च मनोबल की एक पहचान यह भी है कि उसके सदस्यों में उत्तरदायित्व की भावना अधिक होती है तथा साथ ही साथ वह यह भी समझता है कि समूह हमारा है या हम समूह के हैं. दूसरी तरफ जब समूह का मनोबल नीचा होता है तो उसके सदस्यों में उत्तरदायित्व की भावना कम होती है और वे समूह की सदस्यता को एक बार एवं औपचारिकता समझते हैं.


x: उत्पादकता कुछ समाज मनोवैज्ञानिकों का विचार है कि उत्पादकता के आधार पर भी मनोबल की पहचान की जा सकती है. यदि समूह की उत्पादकता अधिक है तो ऐसा समझा जाता है कि अवश्य ही उस समूह का मनोबल भी ऊंचा होगा. दूसरी तरफ यदि समूह की उत्पादकता कम हो तो ऐसा समझा जाता है कि समूह का मनोबल भी नीचा होगा,परंतु आधुनिक समाज मनोवैज्ञानिकों ने उत्पादकता है तथा मनोबल के बीच इस तरह के धनात्मक संबंध का खंडन किया है. इन लोगों का कहना है कि समूह का मनोबल कम रहने पर भी अन्य कारणों से समूह की उत्पादकता अधिक हो सकती है. जैसे- मेयर्स 1987 के अनुसार यदि समूह में अधिक उत्पादकता के लिए विशेष पुरस्कार की घोषणा कर दी जाती है तो मनोबल कम रहने पर भी समूह की उत्पादकता बढ़ जाती है।


उपरोक्त मानदंडों के आधार पर हम यहां आसानी से पहचान कर सकते हैं कि किसी समूह का मनोबल ऊंचा है या नीचा है.