व्यक्ति अध्ययन के दोष - defects of person study
व्यक्ति अध्ययन के दोष - defects of person study
1. व्यक्ति अध्ययन विधि में आत्मनिष्ठता अधिक पायी जाती है. इस कारण निश्कर्ष की वैधता प्रभावित होती हैं। इस विधि में शोधकर्ता तथा अध्ययन के लिए चुने गये व्यक्ति तथा सामाजिक इकाई के बीच अधिक घनिष्ठता होने के कारण जो भी तथ्य प्राप्त किए जाते हैं उनका सही सही तथा वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन नहीं हो पाता है।
2. व्यक्ति अध्ययन विधि में शोधकर्ता की पूर्ण जवाबदेही इस बात की होती है कि वह व्यक्ति या सामाजिक इकाई का पूरा इतिहास तैयार करे। शोध अकर्ता सामाजिक इकाई के बारे में बहुत सारी सूचनाओं की तैयारी करता है
तथा उनका विश्लेषण करता है। शोधकर्ता द्वारा प्राप्त की गयी सूचनाओं की वैधता की जांच करने का कोई तरीका इस विधि में नहीं बतलाया गया है। इस कारण यह विधि पूर्णरूप से वैज्ञानिक विधि नहीं मानी जा सकती है।
3. इस विधि में समय बहुत लगता है क्योंकि शोधकर्ता को प्रयोज्य के सभी पहलुओं भूत, वर्तमान तथा भविश्य को ध्यान में रखकर अध्ययन करना होता है। यह एक खर्चीली विधि भी है क्योंकि इसमें धन की बर्बादी बहुत होती है।
4. इस विधि में शोधकर्ता व्यक्ति से उनके गत अनुभूतियों एवं घटनाओं के बारे में पूछकर इतिहास तैयार करता है। बाद में इन अनुभूतियों का विश्लेषण का निश्कर्श पर पहु ँचा जाता है। व्यक्ति अपने गत अनुभूतियों का विशेषकर उन अनुभूतियों जो काफी पहले घटित हुयी है उनको सही तरीके से नहीं बतला पाता है। सूचनाएं वैध नहीं हो पाती है।
5. शोधकर्ता किसी एक व्यक्ति या सामाजिक इकाई का अध्ययन कर निष्चित निश्कर्श पर पहुच जाना चाहता है। किसी एक केस के अध्ययन के आधार पर लिया गया निष्कर्ष सही नहीं होता। इस प्रकार से किए गये अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों का सामान्यीकरण नहीं किया जा सकता है।
किसी समुदाय का अध्ययन यदि हम व्यक्ति अध्ययन से करें तो इसको इस प्रकार से किया जा सकता है। एक साथ एक भौगोलिक स्थान में रहने वाले समूह के व्यक्तियों के बारे मे गहन अवलोकन तथा विश्लेषण किया जाता है। इस प्रकार के अध्ययन में किसी समुदाय के लोगों के विभिन्न तथ्यों जैसे रहने का स्थान. आर्थिक क्रियाकलाप, जलवायु तथा प्राकृति संसाधनों के बारे में, ऐतिहासिक विकास, जीवन शैली, सामाजिक संरचना, जीवन मूल्यों तथा ऐसे लोगों का अध्ययन जिनका उस समुदाय पर प्रभाव हो आदि का अध्ययन किया जाता है। इसमें उन सामाजिक संस्थाओं का मूल्यांकन भी किया जाता है जो मनुष्यों की मौलिक आवश्यकताओं को पूरा करती है।
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