निदर्शन की परिभाषा एवं विशेषताएँ - Definition and Characteristics of Sampling
निदर्शन की परिभाषा एवं विशेषताएँ - Definition and Characteristics of Sampling
निदर्शन केवल वैज्ञानिक अनुसंधान की विशेषता नहीं है बल्कि हमारे संपूर्ण जीवन में यह सदैव क्रियाशील रहने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। मानव का यह स्वभाव है कि वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कुछ घटनाओं को देख कर एक सामान्य निष्कर्ष निकालने का प्रयत्न करता है। पकाए गए चावलों के कुछ दानों को देख कर ही यह ज्ञात कर लिया जाता है कि बर्तन में भरे हुए सभी चावल पक चुके हैं अथवा नहीं। इसी प्रकार किसी समूह के बारे में एक विशेष धारणा बनाने अथवा व्यक्तियों की विशेषताओं को समझने के लिए हम कुछ व्यक्तियों से मिलकर ही संपूर्ण समूह की विशेषताओं को समझने का प्रयत्न करते हैं। इसके बाद भी अध्ययन की एक प्रविधि के रूप में निदर्शन की प्रकृति दिन प्रतिदिन के जीवन के प्रतिचयन से कुछ भिन्न है। सांख्यिकी रूप से निदर्शन एक ऐसा प्रयास है जिसके अंतर्गत हम कुछ स्वीकृत और पूर्व निर्धारित प्रणालियों की सहायता से संपूर्ण समग्र में से कुछ प्रतिनिधि इकाइयों का चयन करते हैं।
सामाजिक घटनाओं के अध्ययन में निदर्शन पद्धति के व्यवस्थित प्रयोग का इतिहास अधिक पुराना नहीं है। बीसवीं शताब्दी के आरंभ में सर्वप्रथम बॉउले (A. L. Bowley) ने इस पद्धति का प्रयोग करके सामाजिक तथ्यों के अध्ययन को एक नई दिशा प्रदान करने का प्रयत्न किया। बॉउले ने विभिन्न समूहों में से एक-एक परिवार का चयन करके उनके अध्ययन के आधार पर जो निष्कर्ष प्रस्तुत किए वे बहुत बड़ी सीमा तक उस स्थान की संपूर्ण जनसंख्या की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। बाद में चार्ल्स बूथ एवं राउंट्री ने उस समुदाय का व्यापक स्तर पर अध्ययन करके जो प्रस्तुत किए, वे बॉउले के निष्कर्षों से बहुत मिलते जुलते थे। इस आधार पर बॉउले द्वारा अपनाई गई निदर्शन की प्रणाली से यह स्पष्ट हो गया कि निदर्शन के द्वारा न केवल बहुत अधिक समय और धन की बचत की जा सकती है बल्कि इसके द्वारा प्राप्त निष्कर्षों में विश्वसनीयता और उपयोगिता में भी कोई कमी नहीं होती। इस पृष्ठभूमि में आज निदर्शन पद्धति को सामाजिक घटनाओं के अध्ययन में एक अत्यधिक महत्वपूर्ण और उपयोगी विधि के रूप में देखा जाने लगा है।
सामान्य रूप से यह समझा जाता है कि निदर्शन का तात्पर्य समस्त इकाइयों में से कुछ इकाइयों का चयन करना है। ऐसी धारणा बहुत सामान्यीकृत और अपूर्ण है। वास्तव में, निदर्शन एक ऐसी पद्धति है जिसके द्वारा हम समस्त इकाइयों में से कुछ इकाइयों का चयन अनेक स्वीकृत कार्यविधियों की सहायता से इस प्रकार करते हैं जिससे चुनी गई इकाइयां संपूर्ण समग्र की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व कर सकें। इसका तात्पर्य यह है कि हम संपूर्ण समग्र को कितने भागों में विभाजित करेंगे. प्रत्येक भाग में से कितने इकाइयों का चयन करेंगे तथा चयन का यह कार्य किस प्रणाली के द्वारा किया जाएगा। सब कुछ अध्ययनकर्ता की इच्छा पर आधारित नहीं होता बल्कि प्रत्येक स्तर पर किए जाने वाले कार्य के संबंध में कुछ निश्चित और पूर्व निर्धारित नियम होते हैं। इस दृष्टिकोण को लेकर विभिन्न विद्वानों ने निदर्शन को अनेक प्रकार से परिभाषित किया है:
गुड़े तथा हॉट ने निदर्शन की अत्यधिक संक्षिप्त परिभाषा देते हुए कहा है, "निदर्शन किसी विशाल समग्र का एक छोटा प्रतिनिधि है।"
इस परिभाषा से स्पष्ट होता है कि निदर्शन का तात्पर्य एक बड़े क्षेत्र में से कुछ इकाइयों का चयन कर लेना ही नहीं होता बल्कि इसका तात्पर्य इकाइयों का इस प्रकार चयन करना होता है जो संपूर्ण अध्ययन के क्षेत्र की विशेषताओं का वास्तविक प्रतिनिधित्व करती हों।
बोगार्डस के अनुसार, "निदर्शन किसी पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार इकाइयों के एक समूह में से एक निश्चित प्रतिशत का चयन करना है।"
सिन पाओ येंग के शब्दों में, "एक सांख्यिकीय निदर्शन संपूर्ण समूह का प्रतिनिधि अंश है।"
इस परिभाषा में येंग ने निदर्शन को सांख्यिकीय निदर्शन शब्द द्वारा इसलिए स्पष्ट किया है जिससे इसका प्रयोग करते समय प्रत्येक समय यह ध्यान रखा जा सके कि निदर्शन अनेक सांख्यिकीय कार्य प्रणालियों पर आधारित है।
पी.वी. यंग का कथन है कि "एक सांख्यिकीय निदर्शन उस संपूर्ण समूह अथवा योग का एक लघु चित्र अथवा प्रतिनिधि अंश है जिसमें से वह निदर्शन लिया गया है।"
इस कथन से भी स्पष्ट होता है कि निदर्शन द्वारा प्राप्त इकाइयां तब तक अपने से संबंधित संपूर्ण समूह का वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं करती, जब तक इन चुनी गई इकाइयों को एक सांख्यिकीय निदर्शन के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती।
निदर्शन की प्रकृति को समझते समय एक प्रमुख जिज्ञासा यह उत्पन्न होती है कि संपूर्ण जनसंख्या अथवा समूह में से कुछ इकाइयों का चयन करके ही उन्हें संपूर्ण समग्र का प्रतिनिधि किस से प्रकार माना जा सकता है?
वास्तव में, इस समस्या का समाधान निदर्शन से संबंधित आधारभूत मान्यताओं की सहायता से किया जा सकता है। निदर्शन की सर्वप्रमुख मान्यता यह है कि समान विशेषताएं प्रदर्शित करने वाली इकाइयों में से यदि किसी एक इकाई का चयन करके उसका समुचित अध्ययन कर लिया जाए तो ऐसा अध्ययन अपने वर्ग की सभी इकाइयों की विशेषताओं को स्पष्ट करेगा। यही कारण है कि एक व्यावहारिक निदर्शन को प्राप्त करने के लिए केवल सभी इकाइयों में से कुछ इकाइयों का ही चयन नहीं करते बल्कि सबसे पहले संपूर्ण समग्र को कुछ वर्गों में इस प्रकार विभाजित कर लेते हैं जिससे एक-एक वर्ग में समान विशेषताओं वाली इकाइयों को रखा जा सके।
निदर्शन की दूसरी मान्यता यह है कि सामाजिक घटनाओं की परिवर्तनशीलता के कारण संपूर्ण समग्र के अध्ययन में इतना अधिक समय लग सकता है कि उससे संबंधित निष्कर्ष प्रस्तुत करने के समय तक समग्र की विशेषताएं बदल चुकी हो। इसका तात्पर्य है कि सामाजिक घटनाओं से संबंधित अध्ययन कम समय में ही पूरे किए जाने चाहिए। यह कार्य केवल निदर्शन पद्धति के द्वारा ही संभव है। निदर्शन की तीसरी मान्यता यह है कि सजातीय इकाइयों में से प्रत्येक इकाई दूसरी की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करती है। लुण्डबर्ग ने लिखा है कि "यदि तथ्यों में अत्यधिक सजातीयता हो अर्थात समस्त तथ्यों की विभिन्न इकाइयों में अंतर बहुत कम हो तो संपूर्ण में से एक या कुछ इकाइयां समस्त इकाइयों का प्रतिनिधित्व करेंगी।" इन मान्यताओं के आधार पर स्पष्ट होता है कि निदर्शन एक वैज्ञानिक विधि हैं तथा निदर्शन के आधार पर प्राप्त निष्कर्ष प्रामाणिक और सही हो सकते हैं जितने की समस्त इकाइयों के अध्यन पर आधारित निष्कर्ष सही होते हैं।
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