नृजातीय अध्ययन की परिभाषा एवं स्वरुप - Definition and Nature of Ethnic Studies

नृजातीय अध्ययन की परिभाषा एवं स्वरुप - Definition and Nature of Ethnic Studies

नृजातीय अध्ययन (अंग्रेजी Ethnography) एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जिसका प्रयोग अक्सर सामाजिक विज्ञान में विशेष रूप से मानवशास्त्र और समाजशास्त्र में किया जाता है। इसके अंतर्गत अक्सर मानव समाज/संस्कृतियों पर अनुभवजन्य आँकड़े जुटाने का कार्य किया जाता है। आँकड़ा संग्रह का कार्य अक्सर प्रतिभागी अवलोकन, साक्षात्कार, प्रश्नावली, आदि के माध्यम से करता है।


नृजातीय अध्ययन का अंग्रेजी शब्द Ethnography ग्रीक भाषा के दो शब्दों के योग से बना है। पहला Ethnos जिसका अर्थ होता है लोक (Folk) लोग (People) या राष्ट्र (Nation) तथा दूसरा Grapho जिसका अर्थ है लिखना (Write).


स्वरुप


यह एक प्रकार से लोगों और संस्कृतियों का व्यवस्थित अध्ययन है। यह सांस्कृतिक घटनाओं का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है जहां शोधकर्ता अध्ययन के विषय के दृष्टिकोण से समाज का अवलोकन करता है। नृवंशविज्ञान या नृजातीय अध्ययन रेखांकन और समूह की संस्कृति को लिखने का एक साधन है। इस प्रकार इस शब्द का दोहरा अर्थ कहा जा सकता है, जो आंशिक रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि इसका उपयोग संज्ञा के रूप में किया जाता है।


यह अध्ययन आंशिक की अपेक्षा सम्पूर्णता की खोज करता है किसी व्यक्ति, संस्था, समाज, राष्ट्र आदि का अध्ययन उसके वास्तविक रूप में उसमे सम्मिलित होकर या उसका हिस्सा बनाकर उसके संदर्भ को ध्यान में रख करता है. अर्थात यह एक अपेक्षाकृत कठिन प्रविधि जिसके प्रयोग के लिए विशिष्ट योग्यता एवं अनुभव के साथ-साथ अमुक संस्कृति की समझ होना अति आवश्यक होता है. जैसा की ऊपर बताया गया है की यह एक प्रविधि मात्र नहीं अपितु यह अनेक गुणात्मक प्रविधियों का संगम है, घटना में बिना छेड़छाड़ के उसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत करना इसका मूल उद्देश्य होता है. नृवैज्ञानिक के


लिए एक साथ दो पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होता है पहला “व्यक्तियों पर तथा दूसरा "घटना" पर वर्तमान में नृजातीय अध्ययन के प्रयोग में काफी वृद्धि हुई है शोधकर्ताओं के मानस से यह भ्रम मिटा है की इसका प्रयोग महज मानव शास्त्र या समाजशास्त्र में ही होता है उदाहरण के तौर पर किसी विद्यालय में बच्चे कैसे शिक्षा अर्जित करें या कैसे एक समाजोपयोगी ज्ञान अर्जित करें इसका अध्ययन भी एक नृवैज्ञानिक कर सकता है. यह समय समय पर परिवर्तन पर जोर देते हैं और व्यक्ति को समाज की संरचना एवं संवेदना ग्रहण करने के लिए बाध्य करती है। उदाहरण विद्यालय में बच्चे पढ़ाई कैसे ग्रहण करते हैं और कैसे ज्ञानार्जन किया जाता है।


महत्त्वपूर्ण सावधानियां


• मनोवैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए शोधकर्ता के पास कानूनी रूप से स्वीकृति नहीं होती है।


• शोधकर्ता को किसी व्यक्ति के जीवन की व्यक्तिगत घटनाओं को जानने का अधिकार नहीं होता है। 


• वास्तव में कुछ ऐसे पहलू होते हैं जिन पर शोधकर्ता स्पष्ट नहीं पूछ सकता है अर्थात दांपत्य जीवन में दखल देना संभव नहीं होता है।


• इसमें अनुसंधानकर्ता को अपनी सोच या विचारधारा को प्रदर्शित करने से बचना चाहिए।


• शोधकर्ता अन्य व्यक्ति के भाव आदि से प्रत्यक्ष प्रभावित होता है जिससे अपने प्रयोज्य के पक्ष में सोचना प्रारंभ कर देता है।