सामाजिक शोध की अवधारणा एवं परिभाषाएं - Definition & Concept of Social Research
सामाजिक शोध की अवधारणा एवं परिभाषाएं - Definition & Concept of Research
कुछ विद्वान यह मानते हैं कि सामाजिक शोध का तात्पर्य मानवीय क्रियाओं के सभी पक्षों से संबंधित यथार्थ ज्ञान का निरंतर संग्रह करना है। यदि हम इस व्याख्या को स्वीकार कर लें तो हमारे सामने तुरंत एक दूसरा प्रश्न यह उत्पन्न हो जाता है कि मानवीय क्रियाओं का यथार्थ ज्ञान किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है? इस संबंध में एक सरल तरीका यह हो सकता है कि विभिन्न विचारक जिन सैद्धांतिक मान्यताओं के आधार पर मानवीय क्रियाओं एवं व्यवहारों की व्याख्या करते रहे हैं, उन्हीं की सहायता से हम कुछ सामान्य सिद्धांतों का प्रतिपादन करने का प्रयत्न करें। ऐसा करने में सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि हमारा ज्ञान एक संकुचित दायरे में ही सिमित रहेगा और हम नए ज्ञान का सृजन नहीं कर सकेंगे। इसके निराकरण के रूप में कुछ विद्वान यह मानते हैं कि वैज्ञानिक शोध का तात्पर्य अनुभवसिद्ध तथ्यों को ज्ञात करके निरीक्षण, परीक्षण और सत्यापन के आधार पर मानव व्यवहार से संबंधित सामान्य नियमों को ढूँढना है। इसका तात्पर्य यह है कि शोध का संबंध सैद्धांतिक विश्लेषण से न होकर अनुभवसिद्ध ज्ञान से है।
सामाजिक शोध सामाजिक जीवन की खोज, विश्लेषण और सत्यापन करने की एक व्यवस्थित पद्धति है, जिसका उद्देश्य सदैव ज्ञान का विस्तार एवं प्रमाणीकरण करना और मानव व्यवहार से संबंधित सामान्य नियमों का पता लगाना है। सामाजिक शोध तात्पर्य वैज्ञानिक विधि की सहायता से मानवीय समाज से संबंधित प्रश्नों के हल निकलना है। इसमें व्यवस्थित अवलोकन, निरीक्षण, परीक्षण एवं विश्लेषण व सामान्यीकरण की पद्धति पर जोर दिया जाता है। संक्षेप में, यह कहा जा सकता है कि सामाजिक शोध में वैज्ञानिक विधि का प्रयोग करते हुए किसी विषय का व्यवस्थित अवलोकन एवं सत्यापन का विशेष रूप से सहारा लिया जाता है। पूर्व में सामाजिक घटनाओं को समझने के लिए अनुमान, तर्क एवं कल्पना आदि का सहारा लिया जाता था जिससे प्राप्त निष्कर्ष प्रायः विश्वसनीय नहीं माने जा सकते थे और उनकी सत्यता की जाँच संभव नहीं होती थी। इसलिए इनके स्थान पर वैज्ञानिक विधि की सहायता से सामाजिक तथ्यों को ज्ञात किया जाने लगा। वैज्ञानिक विधि कल्पना, तर्क एवं अनुमान से परे, निरीक्षण, परीक्षण और विश्लेषण व सामान्यीकरण के चरणों से होकर गुजरने वाली पद्धति है, जो इन चरणों से होकर सत्यता की जाँच को संभव बनाने का प्रयास करती है। इस प्रकार वैज्ञानिक पद्धति से प्राप्त तथ्य सत्यापन एवं विश्वसनीयता की कसौटी पर खरे उतरते हैं। केवल कल्पना के आधार पर प्राप्त निष्कर्षों को ज्ञान की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है।
सूक्ष्म स्तर पर यदि सामाजिक शोध के अर्थ को समझने का प्रयास किया जाए तो यह देखा जाता है कि सामाजिक शोध दो शब्दों से मिलकर बना है- प्रथम समाजिक, जिसका अर्थ है समाज से संबंधित तथा द्वितीय शोध, जिसका अर्थ है पूर्वज्ञान का परिमार्जन अथवा नए तथ्यों की खोज। संक्षेप में, हम यह कह सकते हैं कि जब भी सामाजिक घटनाओं तथा सामाजिक जीवन के विभिन्न क्रियाकलापों से संबंधित उपलब्ध ज्ञान का परिमार्जन अथवा उनसे संबंधित नए तथ्यों की खोज का कार्य किया जाता है, इस क्रिया विधि को हम सामाजिक शोध कहते हैं। सामाजिक शोध पूर्ण रूप से सामाजिक जीवन, सामाजिक समस्याओं. सामाजिक घटनाओं सामाजिक संरचना और सामाजिक जटिलताओं से संबंधित होता है। सामाजिक शोध एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सामाजिक घटनाओं से संबंधित कार्य-कारण संबंधों को जानने व समझने का न केवल प्रयास किया जाता है बल्कि उनकी खोज व व्याख्या भी की जाती है। साथ ही, कार्य-कारण संबंधों के फलस्वरुप प्राप्त होने वाले परिणामों की भी व्याख्या वैज्ञानिक रूप से की जाती है। अंततः यह कहा जा सकता है कि सामाजिक शोध सामाजिक घटनाओं के संबंध में विद्यमान पुराने ज्ञान का परिमार्जन या सत्यापन तथा नवीन ज्ञान व तथ्यों को प्राप्त करने अथवा खोज निकालने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
पी. वी. यंग के अनुसार, “सामाजिक अनुसंधान तार्किक एवं क्रमबद्ध पद्धतियों द्वारा नवीन तथ्यों के अन्वेषण अथवा पुराने तथ्यों के पुनः परीक्षण एवं उनके क्रमों, आपस के पारस्परिक संबंधों, कार्य-कारण की व्याख्याओं एवं उनको संचालित करने वाले स्वाभाविक नियमों का विश्लेषण करने के उद्देश्य को ध्यान में रखकर बनाई गई एक वैज्ञानिक योजना है।"
बोगाडर्स कहते हैं, एक साथ रहने वाले लोगों के जीवन में क्रियाशील अंतर्निहित प्रक्रियाओं की खोज करना ही सामाजिक अनुसंधान कहलाता है।"
फिशर के अनुसार, "किसी समस्या को हल करने, एक उपकल्पना की परीक्षा करने एवं नवीन घटना व नए संबंधों की खोज करने के उद्देश्य से सामाजिक परिस्थिति में सुनिश्चित कार्य प्रणालियों का प्रयोग ही सामाजिक अनुसंधान है।"
मोज़र के विचार में, "सामाजिक घटनाओं एवं सामाजिक समस्याओं के विषय में नूतन या नवीन ज्ञान की प्राप्ति के लिए किए गए एक व्यवस्थित अनुसंधान कार्य को ही हम सामाजिक अनुसंधान कहते हैं।"
समाजशास्त्रीय शब्दकोश के अनुसार, सामाजिक परिस्थिति से संबंधित किसी समस्या को हल करने, किसी उपकल्पना का परीक्षण करने, नई घटनाओं की खोज करने एवं विभिन्न घटनाओं के मध्य नवीन संबंधों का पता लगाने के उद्देश्य के लिए उपयुक्त पद्धतियों का प्रयोग करना ही सामाजिक अनुसंधान है।"
उपर्युक्त परिभाषाओं के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक अनुसंधान का संबंध सामाजिक घटनाओं एवं सामाजिक संरचना के अध्ययन से है। इसके माध्यम से सामाजिक घटनाओं से संबंधित नवीन तथ्यों की खोज की जाती है, जिसके लिए वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग अत्यंत आवश्यक माना गया है। सामाजिक शोध के माध्यम से न केवल नए ज्ञान एवं नए तथ्यों की खोज व उनका पता लगाया जाता है, बल्कि सामाजिक जीवन से संबंधित विभिन्न विषयों के संबंध में जितनी भी जानकारी पहले से उपलब्ध है उसकी सत्यता का परीक्षण भी किया जा सकता है। सामाजिक शोध विभिन्न सामाजिक घटनाओं के मध्य पाए जाने वाले कार्य-कारण संबंधों का पता लगाने एवं उनकी व्याख्या करने की एक वैज्ञानिक पद्धति है। सामाजिक शोध न केवल सामाजिक जीवन से संबंधित जानकारी एकत्र करने की विधि है बल्कि सामाजिक घटनाओं को नियंत्रित व निर्देशित करने वाले कारणों को खोजने नियमों का पता लगाने, उन्हें स्थापित करने और उनके प्रभावों की विवेचना और व्याख्या करने का भी कार्य करता है। संक्षेप में, सामाजिक शोध सामाजिक घटनाओं व तथ्यों के संबंध में नवीन ज्ञान की प्राप्ति तथा पुराने ज्ञान के सत्यापन या परिमार्जन की विधि है, वैज्ञानिक विधि के प्रयोग द्वारा सामाजिक जीवन की घटनाओं समस्याओं के कार्य-कारणों. उन को संचालित करने वाले नियमों को खोजने उनका अध्ययन करने व विश्लेषण करने का प्रयास किया जाता है।
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