अंतर्वस्तु विश्लेषण प्रविधि की परिभाषा - Definition of Content Analysis Method

 अंतर्वस्तु विश्लेषण प्रविधि की परिभाषा - Definition of Content Analysis Method


कथावस्तु विश्लेषण (कंटेंट एनालिसिस) एक ऐसी पद्धति है जिसके माध्यम से लिखित, वाचिक अथवा दृश्य संदेशों का विश्लेषण किया जाता है (Cole, 1988), इस विधि का सर्वप्रथम उपयोग समाचार पत्र पत्रिका, लेख, विज्ञापनों एवं भाषणों के विश्लेषण के लिए किया गया था (Harwood & Garry 2003), वर्तमान में इसका प्रयोग संचार, पत्रकारिता, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान व व्यापार में किया जा रहा है (Neundorf 2002).


कंटेंट एनालिसिस किसी घटना के वर्णन एवं विश्लेषण के लिए एक व्यवस्थित और वस्तुनिष्ठ शोध प्रविधि है (Krippendorff 1980, Downe Wamboldt 1992, Sandelowski 1995). इसे दस्तावेजों के विश्लेषण की विधि भी कहा जाता है.

कंटेंट एनालिसिस शोधार्थी की सैद्धांतिक मुद्दों के प्रति समझ को विस्तृत करने का कार्य करता है, विषयवस्तु विश्लेषण के माध्यम से हम बड़े शब्द समूहों को छोटे-छोटे सम्बंधित श्रेणियों में रख सकते हैं. ऐसा मान लिया जाता है कि एक श्रेणी के शब्दों. कथनों इत्यादि का अर्थ समान है (Cavanagh 1997). है।


विषय-वस्तु विश्लेषण आंकड़ों के लिए अनुकरणीय एवं वैध अनुमान की विधि जो आंकड़ों को उनके सन्दर्भ में विश्लेषित करती है, जिसका उद्देश्य ज्ञान का विस्तार, नई अन्तरदृष्टि, व्यवहार के लिए तथ्य एवं व्यावहारिक मार्गदर्शन उपलब्ध करवाना है Krippendorff 1980. परिघटना का संक्षिप्त एवं विस्तृत वर्णन.

जिसका परिणाम संप्रत्ययों एवं श्रेणियों के रूप में होता है. प्रायः ऐसे सम्प्रत्ययों या श्रेणियों का उद्देश्य एक मॉडल का निर्माण, विचार की पद्धति का विकास, वैचारिक नक्सा या श्रेणियों का निर्माण होता है. शोधार्थी के समक्ष्य संप्रत्यय एवं श्रेणी, दो विकल्प होते हैं जिनमे से वह किसी का भी प्रयोग कर सकता है (Kyngas & Vanhanen 1999), उदाहरण के लिए जब शोधार्थी का उद्देश्य सिद्धांत निर्माण होता है तो उसके लिए श्रेणी की अपेक्षा संप्रत्यय का उपयोग अधिक लाभदायक होता है जबकि विश्लेषण पद्धति को बताने के लिए श्रेणी का उपयोग किया जाता है.


पहले विषयवस्तु विश्लेषण विधि की आलोचना मात्रात्मक विधि से तुलना करके की जाती थी उनका कहना था की यह बहुत आसान विधि है तथा इसमें सांख्यिकी का कोई उपयोग नहीं होता है,

दूसरी तरफ विषयवस्तु विश्लेषण को पुर्णतः गुणात्मक भी नहीं मन जाता था (Morgan 1993), कुछ समय पूर्व से विषयवस्तु विश्लेषण का प्रयोग मात्रात्मक एवं गुणात्मक दोनों रूपों में किया जाता है। (Hsich & Shannon 1993) इसमें अर्थ, भाव, महत्व तथा सन्दर्भ को अधिक महत्त्व दिया जाता है (Downe-Wamboldt 1992).


सामाजिक विज्ञान में जब शोध सामग्री शाब्दिक, सांकेतिक या गुणात्मक प्रकृति की होती है, तब इस प्रकार की सामग्री को व्यवस्थित बनाने, उसका वर्गीकरण करने हेतु जिस विधि का प्रयोग किया जाता है, उसे अंतर्वस्तु विश्लेषण विधि के नाम से जाना जाता है। पी वी यंग (1977) के अनुसार, "यह साक्षात्कारों, प्रश्नावलियों, अनुसूचियां तथा अन्य लिखित एवं मौखिक अभिव्यक्तियों द्वारा प्राप्त शोध तथ्यों (सामग्री) की विषयवस्तु के व्यवस्थित, वस्तुपरक और परिमाणात्मक विश्लेषण की एक शोध विधि है।"


बर्लसन (1952) इसे परिभाषित करते हुए लिखा है, "अंतर्वस्तु विश्लेषण शोध की एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा संचार में व्यक्ति विषयवस्तु का वस्तुपरक, व्यवस्थित और परिमाणात्मक विश्लेषण किया जाता है।"


इसी प्रकार, होलेस्टि (1968) के अनुसार, "अंतर्वस्तु विश्लेषण एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा व्यवस्थित एवं वस्तुपरक तरीके से संदेशों की विशिष्ट विशेषताओं के अर्थ को ज्ञात किया जाता है।" एलेन ब्रायमैन (2001) के अनुसार, "अंतर्वस्तु विश्लेषण दस्तावेजों और अवतरणों के विशेषण का एक ऐसा उपागम या तरीका है जिसके द्वारा पूर्व निर्धारित श्रेणियों में व्यवस्थित एवं पुनरावृत्ति योग्य ढंग से अंतर्वस्तु का परिमाण किया जाता है।"


उपरोक्त परिभाषा ओं से स्पष्ट है कि इस विधि का प्रयोग मुख्यतः संचार सामग्री के विश्लेषण में किया जाता है। संचार या संप्रेषण का माध्यम मुद्रित, अखबार, पत्र-पत्रिकाएं, पंपलेट, पुस्तकें, सरकारी गैर सरकारी प्रलेख, दस्तावेज डायरियां क्षेत्र प्रलेख, बैठकों की कार्रवाई. आदि आती हैं तथा श्रव्य दृश्य सामग्री में रेडियो, टीवी, फिल्म, इंटरनेट से प्राप्त संचार सामग्री हो सकती है। संक्षेप में, इन संचार माध्यमों से प्राप्त सामग्री के वस्तु परक, व्यवस्थित और परिमाणात्मक विश्लेषण को ही अंतर्वस्तु विश्लेषण कहते हैं।