दूर शिक्षा की परिभाषा - definition of distance education
दूर शिक्षा की परिभाषा - definition of distance education
दूर शिक्षा को परिभाषित करने के अनेक प्रयास किए गए हैं तथा अब भी निरंतर किए जा रहें हैं किन्तु इसकी किसी सर्वमान्य एवं इसके सभी पक्षों को समाहित करने वाली परिभाषा पर पाहुचना एक कठिन कार्य है। इन विचारकों द्वारा दी गयी परिभाषाओं में अंतर का प्रमुख कारण उनके द्वारा दूरवर्ती शिक्षा के किसी विशेष पहलू पर ही अत्यधिक बल देना है। कुछ प्रमुख विचारकों द्वारा दी गयी परिभाषा इस प्रकार है
बोर्जी होंबर्ग (1981) के अनुसार शिक्षा के सभी स्तरों पर अध्ययन के विभिन्न प्रकार जो अध्यापक के निरंतर, तत्कालीन निरीक्षण में नहीं है, उन्हें योजना निर्देशन शिक्षण की संस्थाओं के बराबर ही लाभ प्राप्त होता है।
होमबर्ग की परिभाषा में रूचिकर बात यह है कि इसमें दूरवर्ती शिक्षा को एक संगठित शैक्षिक कार्यक्रम के रूप में माना गया है।
बैडमैयर के अनुसार (1977)
बैडमैयर ने अपने कार्य में 'मुक्त अध्ययन' 'दूरवर्ती शिक्षा तथा स्वतंत्र अध्ययन आदि शब्दों का प्रयोग किया है परंतु स्वतंत्र अध्ययन पर अधिक बल दिया है। इनहोने स्वतन्त्र अध्ययन को इस प्रकार परिभाषित किया है. स्वतंत्र अध्ययन, शिक्षण अधिगम कि विभिन्न अवस्थाओं कि व्यवस्था करता है, जिससे शिक्षक तथा छात्र एक दूसरे से अलग रहकर आवश्यक कार्यों तथा उत्तरदायित्व को निभाते हैं, विभिन्न तरीकों से संचारित करते हैं। इसका उद्देश्य विद्यालय के छात्रों को कक्षा के अनुपयुक्त स्थान व प्रारूप से मुक्त करना है. तथा विद्यालय के बाहर के छात्रों को उनके अपने वातावरण में अध्ययन जारी रखने का अवसर प्रदान करना है तथा सभी छात्रों में स्वतः निर्धारित अधिगम की क्षमता विकास करना है।
‘स्वतंत्र अध्ययन’ अर्थात स्वाध्याय के प्रकारों के लिए यह सुझाव है। पहला विद्यालय के छात्रों के लिए जो नियमित रूप से कक्षा में नहीं जाना चाहते हैं या उपस्थिती को आवश्यक नहीं समझते हैं,
दूसरा विद्यालय से बाहर के छात्रों के लिए जो स्वयं अध्ययन करते हैं। लेकिन यह दोनों प्रकार अधीनस्थ हैं। शिक्षा के अंतिम सामाजिक उद्देश्य के लिए पक्षपात हीन शिक्षा स्वतंत्र शिक्षा के लिए सामाजिक सुधार है। इस प्रकार एसकी प्रशंशा करना कठिन नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में क्यों दूरवर्ती शिक्षा तथा पत्राचार शिक्षा को स्वतंत्र अध्ययन के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। पीटर्स (1973) के अनुसार – पीटर्स ने (1973) में दूरवर्ती शिखा को ज्ञान कौशल तथा अभिवृत्ति प्रदान करने की एक विधि के रूप में परिभाषित किया है। जो आधारित है
पीटर्स की परिभाषा रुचिकर है क्योंकि इसमें तकनीकी माध्यम व सभी की शिक्षा के अतिरिक्त विशेष आधारों को महत्व दिया गया हो। यह दूरवर्ती शिक्षा की प्रकृति को औद्योगिक समाज से जोड़ती है।
औओद्यगिक समाज की नई तथा उभरती हुई विशिष्ट आवश्यकताओं की प्रणाली के रूप में भी दूर वर्ती शिक्षा को समझना संभव है जिसमें शिक्षा के साथ लगभग सभी क्रियाएँ समय अनुसूची पर आधारित है जोकि कठोर कार्य तथा अधिगम की परिस्थितियों पर निर्भर है।
मुरे (1976) के अनुसार- दूरवर्ती शिक्षा की विशेषताओं के संदर्भ में मुरे बहुत सुनिश्चित है। इसके अनुसार दूरवर्ती शिक्षण को अनुदेशन विधियों के परिवार के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसमें शिक्षण व्यवहार अधिगम व्यवहारों से अलग होकर किए जाते हैं, छात्र की उपस्थिती में वह संलग्न परिस्थितियों भी क्रियान्वित की जाती हैं, जिससे शिक्षक तथा छात्र के मध्य मुद्रित इलेक्ट्रानिक यंत्र संबन्धित तथा अन्य साधनों के द्वारा संचार को सुगम बनाया जा सकता है।
दूरवर्ती शिक्षा की इस परिभाषा में तीन रूप स्पष्ट दिखाई देते हैं
1 शिक्षण व्यवहार, अधिगम व्यवहारों से अलग रहता है। (उदाहरण के लिए पत्राचार पाठ्यक्रम)
2 आमने सामने के शिक्षण तथा अधिगम प्रणाली का एक भाग बनाते हैं (उदाहरण के लिए संपर्क कार्यक्रम)
3 इलेक्ट्रानिक व अन्य माध्यम प्रभावशाली शिक्षण व अधिगम के लिए उपयोगी किए जा सकते हैं
(उदाहरण के लिए दृश्य तथा श्रव्य कैसिट का प्रयोग)
डोहमैन (1977) के अनुसार डोहमैन जर्मन दूरवर्ती शिक्षा संस्थान के निर्देशक थे. 1977 में डोहमैन ने दूरवर्ती शिक्षा को इस प्रकार परिभाषित किया यह स्वतः अध्ययन का एक क्रमिक संगठित रूप है,जिसमें छत्र परामर्श, अधिगम सामाग्री का प्रस्तुतिकरण तथा छात्रों की प्रगति का निरीक्षण अध्यापकों के समूह द्वारा किया जाता है, जिसमें प्रत्येक उत्तरदायी होता है। माध्यम के उपयोग से इसमें दूर से ही विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा को संभव बनाया है।
इस परिभाषा में स्वतः अध्ययन को महत्व दिया गया है। दूरवर्ती शिक्षा के इस रूप को बैडमेयर की परिभाषा में भी महत्व दिया गया है। बैडमेयर तथा मुरे के समान, डोहमैन ने माध्यम को सही उपयोग को महत्व दिया है। शिक्षा के इच्छुक व्यक्तियों तक दूरवर्ती शिक्षा के द्वारा शिक्षा पहुंचायी जा सकती है। इन तीनों विचारकों ने दूरवर्ती शिक्षा के डो प्रत्ययों को कुछ सुनिश्चित व कुछ अनिश्चित रूप बताया है। जो यहाँ निम्नलिखित हैं
1 स्वाध्याय तथा
2 शैक्षिक संचार के लिए माध्यम का उपयोग
इस प्रकार जो बिन्दु सामने आए हैं वह इसके विरुद्ध हैं कि पारंपरिक कक्षा शिक्षण में जिस मौखिक संचार का उपयोग किया जाता है, वह स्वतः अध्ययन की प्रक्रिया नहीं है. दूरवर्ती शिक्षा स्वतः अध्ययन के लिए मुद्रित इलेक्ट्रानिक तथा मौखिक आमने-सामने की स्थितियों का उपयोग करती है जो दूरवर्ती शिक्षा का आधार है।
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