समाजशास्त्रीय सिद्धांत की परिभाषा - definition of sociological theory

 समाजशास्त्रीय सिद्धांत की परिभाषा - definition of sociological theory


प्रमुख विद्वानों ने समाजशास्त्रीय सिद्धांत को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया है- फेयरचाइल्ड के अनुसार, "सामाजिक घटना के बारे में ऐसा सामान्यीकरण जो पर्याप्त रूप में वैज्ञानिकता पूर्वक स्थापित हो चुका है तथा समाजशास्त्रीय व्यवस्था के लिए आधार बन सकता है।


मर्टन के अनुसार, "आज जिसे समाजशास्त्रीय सिद्धांत कहा जाता है,

उसके अंतर्गत आंकड़ों के प्रति सामान्य उन्मेष सम्मिलित है जिन पर किसी-न-किसी प्रकार से सोच-विचार करने की आवश्यकता पड़ती है। इसके अंतर्गत स्पष्ट तथा विशिष्ट चारों के बीच प्रमाण योग्य प्रस्तावनाओं की गणना नहीं की जाती है।" 


एबल के अनुसार, "सिद्धांत नियमों की व्याख्या करने के लिए निर्मित अवधारणात्मक योजनाएं हैं। सभी सिद्धांतों का सामान्य कार्य अवलोकित नियमतताओं की व्याख्या करना है। "


कैम्प बैल के अनुसार, "एक उपयोगी सिद्धांत में दो गुण होते हैं।

यह ऐसा होना चाहिए कि इसमें नियमों का पूर्वानुमान लगाया जा सके तथा यह इन नियमों की व्याख्या कुछ ऐसी उपमाओं द्वारा कर सके जो ऐसे नियमों पर आधारित है जो व्याख्या किए जा रहे नियमों से अधिक सामान्य है।"


उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर हम यह कर सकते हैं कि समाजशास्त्रीय सिद्धांत सामाजिक तथ्यों पर आधारित सामान्यीकरण ही है। यह समाज, सामाजिक जीवन व व्यवहार और सामाजिक घटनाओं से संबंधित तथ्यों की वह बौद्धिक व्यवस्था है, जिससे इनकी यथार्थ का ज्ञान होता है।