वर्णनात्मक अनुसंधान - descriptive research
वर्णनात्मक अनुसंधान - descriptive research
वर्णनात्मक अनुसंधान मे वर्तमान परिस्थिति का वर्णन किया जाता है। वर्णनात्मक अनुसंधान मे शोधकर्ता क्या है? प्रश्न का हल ढूंढ़ने का प्रयास करता है। अर्थात् वर्णनात्मक अनुसंधान मे वर्णन हमेशा वर्तमान से संबंधित होता है।
जॉन डबल्यू. वेस्ट के अनुसार, वर्णनात्मक अनुसंधान को किसी घटना, संस्था, व्यक्ति अथवा दस्तावेज़ के सम्पूर्ण अथवा खंड के तौर पर खोज, पहचान और चयन की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
1. सम्पूर्ण का वर्णन
2. खण्ड में विभाजित करके
यहाँ इस बात पर ध्यान आकृष्ट करने की आवश्यकता है कि वर्णन (वह चाहे सम्पूर्ण के रूप में हो अथवा किसी खंड विशेष पर आधारित) वैज्ञानिक तरीके से अर्थात् क्रमबद्ध तरीके से किया जाता है तथा इस प्रकार से वर्णन मे वस्तुनिष्ठता विद्यमान रहती है. ताकि शोधकर्ता अध्ययन अथवा समस्या के प्रति पक्षपातपूर्ण न हो जाए।
वर्णनात्मक अनुसंधान का उद्देश्य किसी अध्ययन विषय के बारे मे यथार्थ तथा तथ्य एकत्रित करके उन्हें एक विवरण के रूप में प्रस्तुत करना होता है। सामाजिक जीवन से संबंधित अनेक विषय इस तरह के मे होते हैं जिनका अतीत में कोई अध्ययन प्राप्त नहीं होता। 1
ऐसी दशा में यह आवश्यक होता है कि अध्ययन से संबंधित समूह, समुदाय अथवा विषय के बारे में अधिक अधिक सूचनाएँ एकत्रित करके उन्हे जनसामान्य के समक्ष प्रस्तुत की जाए. ऐसे अध्ययनों के लिए जो अनुसंधान किया जाता है उसे वर्णनात्मक अनुसंधान कहते है।
साधारण शब्दों में वर्णानात्मक अनुसंधान को इस प्रकार समझा जा सकता है कि वर्णनात्मक अनुसंधान वह शोध है जिसका उद्देश्य समस्या के सम्बन्ध मे पूर्ण यथार्थ एवं विस्तृत तथ्यों की जानकारी प्राप्त करना है, इसमें वास्तविक तथ्यों का संकलन किया जाता है। और इन तथ्यों के आधार पर समस्या का वर्णनात्मक विवरण अथवा चित्रण प्रस्तुत किया जाता है।
• वर्णनात्मक अनुसंधान "क्या है" से संबंधित है न कि क्यो है।”
• समाजशास्त्रीय अध्ययन जैसे समुदाय की सामाजिक संरचना का वर्णनात्मक अध्ययन, पिछले पचास वर्षों में सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन अथवा किसी संगठन की कार्यशीलता का अध्ययन आदि वर्णनात्मक अनुसंधान के उदाहरण है।
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