सामाजिक नियंत्रण में अंतर - Difference between Social Control

  सामाजिक नियंत्रण में अंतर - Difference between Social Control


ग्रामीण एवं नगरीय समुदायों में सामाजिक नियंत्रण के साधनों के प्रकारों एवं प्रकृति में भी अंतर पाया जाता है। गांवों में सामाजिक नियंत्रण बनाये रखने में अनौपचारिक साधनों, जैसे परिवार, जाति, पंचायत, पडोस, प्रथा, जनरीति, धर्म, नैतिकता एवं जनमत, आदि का अधिक प्रभाव होता है। व्यक्तिगत एवं आमने-सामने के संपर्क के कारण वहां प्रत्येक व्यक्ति पुलिसमैन का कार्य करता है। बीसेन्ज और बीसेन्ज लिखते हैं, “ग्रामीण समुदाय में प्रजा राजा है, रीति-रिवाज और रुढियां अधिकतर व्यवहार को नियन्त्रित करती है।" नगर में नियंत्रण बनाये रखने के लिए औपचारिक साधनों, जैसे पुलिस, जेल, कानून, न्यायालय, गुप्तचर विभाग, सरकार, संविधान एवं द्वैतीयक समूहों, आदि का सहारा लिया जाता है। नगर अपरिचित लोगां का क्षेत्र है. भीड़-भाड युक्त वातावरण में वहां कोई किसी की परवाह नहीं करता जैसा कि डेविस कहते हैं. वह (नगरवासी) जब भी चाहे अपरिचितों के सागर में विलीन होकर किसी प्राथमिक समूह के कठोर नियंत्रण से बच सकता है।