सामाजिक अंतःक्रिया में अंतर - Difference in Social Interaction

सामाजिक अंतःक्रिया में अंतर - Difference in Social Interaction


गांवों एवं नगरों में सामाजिक अंतःक्रिया के आधर पर भी भेद पाया जाता है। गांवों में प्राथमिक एवं प्रत्यक्ष सहयोग अधिक पाया जाता है। नगरों में श्रम विभाजन एवं विषेषीकरण के कारण द्वैतीयक एवं अप्रत्यक्ष सहयोग पाया जाता है। गांवों में प्रतिस्पर्द्धा बहुत कम अथवा नहीं पाई जाती है, क्योंकि वहां व्यक्ति का समाज में स्थान निर्धारण, परिवार, जाति एवं वंश के आधार पर होता है। नगर में धन एवं काम का अधिक महत्व होने को कारण प्रत्येक व्यक्ति अपनी स्थिति को ऊंचा उठाने के लिए प्रतिस्पर्द्धा करता है। गांवों में प्रत्यक्ष संघर्ष पाया जाता है और लोग शीघ्र ही मरने-मारने पर उतारू हो जाते हैं। वहां भूमि, स्त्री व संपत्ति को लेकर संघर्ष अधिक होते हैं।

कभी कभार परिवार जाति तथा ग्रामों में भी परस्पर संघर्ष देखने को मिलता है। नगरों में अप्रत्यक्ष संघर्ष अधिक पाया जाता है। अतः वहां मानसिक संघर्ष की स्थिति अधिक देखने को मिलती है। गांव की अपेक्षा नगरों में सहिष्णुता अधिक होती है। अतः वहां विभिन्न व्यक्तियों एवं समूहों के बीच सामंजस्य अधिक पाया जाता है। ग्रामीण लोग रुढिवादी एवं परंपरावादी होते है। अतः वे नये कानूनों एवं परिवर्तन को शीघ्र स्वीकार नहीं करते है। नगरों में नये कानून एवं अविष्कार स्वीकार कर लिए जाते है। ग्रामों की अपेक्षा नगरों में आत्मसात की प्रक्रिया तीव्र होती है। वहां विभिन्न सांस्कृतिक समूहों के बीच आदान-प्रदान एवं व्यवस्थापन की प्रक्रिया अधिक चलती है।