सामाजिक गतिशीलता और स्थायित्व में अंतर , आर्थिक जीवन में अंतर - Difference in social mobility and stability, difference in economic life

सामाजिक गतिशीलता और स्थायित्व में अंतर , आर्थिक जीवन में अंतर - Difference in social mobility and stability, difference in economic life


ग्रामीण जीवन स्थायित्व का प्रतीक है तो नगरीय जीवन गतिशीलता का सोरोकिन और जिमरमैन लिखते हैं, “ग्रामीण समुदाय एक घड़े में शांत जल के समान है और नगरीय समुदाय केतली मे उबलते हुए पानी के समान स्थायित्व एक का विशेष लक्षण है जबकी गतिशीलता दूसरे का गुण है।" नगरवासी साहसी होते है और किसी भी प्रकार का जोखाम उठाने को तैयार होते है। अतः वे नवीनता. विकास एवं प्रगति के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर गमन करते हैं जबकि गांव के लोग स्थान त्यागना नहीं चाहते। बाढ. भूकंप, महामारी और प्राकृतिक विपदाओं के आने पर ही वे अपना स्थान छोड़ने को तैयार होते है।


7. आर्थिक जीवन में अंतर (Difference in Economic Life) 


नगरीय और ग्रामीण आर्थिक जीवन में काफी अंतर है। सिम्स लिखते हैं कि जीविकोपार्जन के दो मौलिक रूप से भिन्न रीतियों ने ग्रामीण और नगरीय संसार को अलग कर दिया है।

गाँव मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है तो नगर व्यवसाय पररांगांव वासियों का जीवन स्तर नगर वासियों की तुलना में भिन्न होता है। इनके अलावा गांव की अपेक्षा नगरों में श्रम विभाजन एवं विशेषीकरण अधिक पाया जाता है।


8. गांव की सांस्कृतिक जीवन में स्थिरता पाई जाती है जबकि नगर की संस्कृति परिवर्तनशील होती है। 


9. गांव में व्यक्तिगत सामाजिक विघटन कम है जबकि शहरों में नैतिक और सामाजिक विघटन बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है।


10. ग्रामीण लोक सामुदायिक भावना को अधिक महत्व देते हैं जब की नगरों में व्यक्तिवादी भावना प्रबल होती है। यह सामूहिकता के स्थान पर व्यक्तिगत हितों को अधिक महत्व देते हैं। 


11. नगरों में फैशन का प्रचलन अधिक पाया जाता है।


12. गांव की अपेक्षा नगरों में राजनीतिक चेतना अधिक पाई जाती है।