परंपरागत भारतीय ग्रामीण समुदाय का पतन और नवीन परिवर्तन - Downfall of Traditional Village Community and New Changes

परंपरागत भारतीय ग्रामीण समुदाय का पतन और नवीन परिवर्तन - Downfall of Traditional Village Community and New Changes 


ब्रिटिश राज्य की स्थापना से ग्रामीण समुदायों की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक व प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन आया। अंग्रेजों से पूर्व भूमि बिक्री की वस्तु नहीं थी। भूमि पर सारे गांव का सामूहिक स्वामित्व होता था। ग्राम पंचायत उसकी देखभाल करती थी तथा राजा को भूमि का राजस्व दे दिया जाता था। अब भूमि एक बिक्री की वस्तु हो गई और वे व्यक्ति भी जो स्वयं कृषि नहीं करते थे, भूमि खरीद कर मजदूरों से कृषि कराने लगे। परिणाम स्वरूप जमीदारी प्रथा का उदय हुआ और भूस्वामी और भूमिहीन मजदूर दोनों वर्ग पनपे ।


परंपरागत समुदाय में उत्पादन का मुख्य उद्देश्य उपभोग था ना कि बाजार अंग्रेजों के शासन काल में ग्रामीण अर्थव्यवस्था संपूर्ण देश से ही नहीं विश्व से जुड़ गई थी। विश्वव्यापी आर्थिक गतिविधियों का प्रभाव गांवों पर भी पड़ने लगा। औद्योगीकरण एवं फैक्ट्री प्रणाली के कारण ग्रामीण कुटीर व्यसाय चौपट होने लगे।

कृषि और उद्योगों का संतुलन बिगड़ गया। लोग गांव छोड़कर व्यवसाय की तलाश में नगरों में जाने लगे। अंग्रेजों की प्रशासकीय एवं न्याय संबंधी नीतियों ने भी ग्रामीण समुदाय को कमजोर बनाया। न्याय कार्य नगरों के न्यायालयों में पढ़े लिखे न्यायधीशों, वकीलों आदि के द्वारा होने लगा। परंपरागत ग्राम पंचायत पंचायतों के अधिकार छीन गए और वे निष्क्रिय हो गई।


आजादी के बाद हमारी सरकार ने गांवों का महत्व समझा और केंद्रीय व राज्य सरकारों ने उत्थान और विकास की अनेक योजनाएं बनायी। पंचवर्षीय योजनाओं, सामुदायिक विकास योजनाओं और समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम के द्वारा ग्राम विकास पर जोर दिया गया। पंचायती राज के अंतर्गत ग्राम पंचायतों को नए अधिकारों एवं कर्तव्य से सुसज्जित किया गया। इनसे गांव में अनेक परिवर्तन आए हैं किंतु साथ ही साथ नवीन समस्याएं भी पैदा हुई हैं। गांव में गुटबंदी और दलगत राजनीति ने भाईचारे की भावना समाप्त कर दिया है। नया नेतृत्व उभरा है

जो अभी संक्रमणकाल में है। विकास योजनाओं का लाभ अधिकाशतः उन्हीं लोगों को मिला है जो जमींदार या बड़े भूस्वामी थे। भूमिहीन मजदूरों के लिए जो कुछ भी किया गया, वह काफी कम है यद्यपि केंद्र सरकार इस दिशा में विशेष रूप से प्रत्यनशील है।


नई न्याय व्यवस्था एवं प्रशासन, सामुदायिक विकास योजना, समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम, यातायात एवं संचार के नवीन साधन, नई शिक्षा प्रणाली, औद्योगिकरण एवं नगरीकरण, कृषि में हरित क्रांति आदि कारकों के प्रभाव के कारण परंपरागत भारतीय ग्रामीण समुदाय में अनेक परिवर्तन हुए हैं। ए परिवर्तन निम्नांकित है


(1) संयुक्त परिवारों का विघटन


(2) जजमानी प्रथा की समाप्ति


(3) जाति प्रथा से संबंधित दोषों में कमी


(4) नई अर्थव्यवस्था का उदय


(5) नवीन प्रजातांत्रिक नेतृत्व का उदय


(6) गांव में गुटों एवं दलगत राजनीति का उदय


(7) द्वितीयक संबंधों की प्रधानता


(8) परंपरागत भारतीय मूल्यों के स्थान पर नवीन मूल्यों का उदय 


(9) प्राथमिक संस्थाओं एवं संबंधों का महत्व कम होना


(10) सामाजिक नियंत्रण के साधनों में द्वितीय संस्थाओं जैसे राज्य, कानून, पुलिस


(11) जेल इत्यादि का महत्व बढ़ना