बौद्ध कालीन शिक्षा की कमियाँ - Drawbacks of Buddhist Education

 बौद्ध कालीन शिक्षा की कमियाँ - Drawbacks of Buddhist Education


बौद्ध शिक्षा का जन्म वैदिक कालीन शिक्षा की कमियों को दूर करने के लिए आरंभ हुई थी इसलिए इसमें वैदिक काल की शिक्षा व्यवस्था की कमियाँ तो नहीं थी परन्तु यह मूल रूप में वैदिक कालीन शिक्षा के समान ही थी। परन्तु यह पूर्णत: दोष रहित नहीं थी इसमें भी बहुत सी कमियाँ थी जो निम्नानुसार है -


• बौद्ध शिक्षा धर्म से जुड़ी होने के कारण इसमें शिक्षक बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। इस शिक्षा में बौद्ध धर्म के विचारों के बाहर किसी बात की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी।

शिक्षा द्वारा जनसामान्य को कट्टर बौद्ध धर्मालम्बी बनाने का प्रयास किया जाता था।


• बौद्ध शिक्षा धर्म पर आधारित होने के कारण इसमें केवल आध्यात्मिक विकास पर बल दिया जाता था। इसमें सांसरिक शिक्षा पर कम बल दिया था।

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• बौद्ध धर्म में पहले स्त्रियों की शिक्षा व्यवस्था नहीं थी परन्तु बाद में स्त्रियों को मठों में शिक्षा हेतु प्रवेश दिया गया। परन्तु बौद्ध काल में सम्पन्न कुलीन उच्च वर्ग की महिलाओं के लिए ही शिक्षा की व्यवस्था थी।


• बौद्ध शिक्षा में हस्त कार्यों तथा शारीरिक श्रम पर ध्यान नहीं दिया गया परिणाम स्वरूप हस्त कार्यों एवं श्रम के प्रति आदर की भावना समाप्त हो गई।


• बौद्ध कालीन शिक्षा में समय के साथ-साथ मठो में भिक्षु एवं भिक्षुणियों के परस्पर सम्पर्क से व्यविचार आरंभ हो गया जो बौद्ध धर्म पतन का मुख्य कारण था। इस वातावरण ने बौद्ध शिक्षा को बड़ा आघात पहुँचाया।


• अहिंसा में विश्वास रखने के कारण बौद्ध काल में अस्त्र वस्त्र निर्माण सैनिक प्रशिक्षण पर कोई ध्यान नहीं दिया गया परिणाम स्वरूप देश सैनिक दृष्टि से कमजोर हो गया। उपरोक्त कमियों के कारण बौद्ध धर्म का पतन हो गया और बौद्ध मठों एवं विहारों में दी जाने वाली शिक्षा धीरे-धीरे कम होने लगी।