तथ्यों का संपादन, संकेतन, वर्गीकरण एवं सारणीयन - Editing, Notation, Classification and Tabulation of Facts
तथ्यों का संपादन, संकेतन, वर्गीकरण एवं सारणीयन - Editing, Notation, Classification and Tabulation of Facts
तथ्यों का संकलन करने के पश्चात सामाजिक शोध का अगला चरण शोधकर्ता द्वारा संकलित तथ्यों का संपादन करना होता है। तथ्यों के संपादन का अभिप्राय एकत्रित तथ्यों का सूक्ष्म निरीक्षण करके उनमें दिखाई देने वाली अशुद्धियों, त्रुटियों और कमियों को यथासंभव दूर करना है। इसके लिए आवश्यक है कि विभिन्न सूचनाओं की जांच करके अनावश्यक तथ्यों को निकाल दिया जाए तथा उपयोगी सूचनाओं को क्रमबद्ध रूप से व्यवस्थित किया जाए। संकेतन के अंतर्गत शोधकर्ता व्याख्यात्मक उत्तरों को अनेक संकेतों, प्रतीकों तथा अंको की सहायता से संक्षिप्त और व्यवस्थित बनाने का प्रयत्न करता है। वर्गीकरण से तात्पर्य सामान प्रकृति के तथ्यों को एक-एक वर्ग में विभाजित करने से है।
वर्गीकरण के आधार पर ही घटनाओं अथवा दशाओं के बीच तुलना करना और उनके सहसंबंध को ज्ञात करना संभव होता है। यही वर्गीकरण केवल संख्यात्मक तथ्यों से ही संबंधित नहीं होता बल्कि गुणात्मक तथ्यों का भी वर्गीकरण करना उतना ही महत्वपूर्ण है। तथ्यों का वर्गीकरण कर लेने के पश्चात उनका सारणीयन करना आवश्यक होता है। सारणीयन का तात्पर्य विभिन्न तथ्यों को संख्यात्मक रूप में अनेक पदों में इस प्रकार व्यवस्थित करना होता है जिससे एक विशेष वर्ग से संबंधित बहुत सी संख्याओं अथवा विशेषताओं को संक्षिप्त सारणियों की सहायता से समझा जा सके। सारणीयन एक अरुचिकर कार्य अवश्य है लेकिन यह कार्य जितना अधिक सावधानीपूर्वक किया जाता है, वैज्ञानिक निष्कर्ष प्राप्त करने की संभावना उतनी ही अधिक हो जाती है।
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