साम्यवाद शासन प्रणाली में शिक्षा - education in communism

साम्यवाद शासन प्रणाली में शिक्षा - education in communism


लेनिन के नेतृत्व में किसान एवं श्रमिकों की सोवियत सरकार स्थापित की। सोवियत सरकार को किसान, श्रमिक एवं सामान्य जनता का सहयोग प्राप्त हुआ था। लेनिनने बोल्शेविक पक्ष (बहुमतवाला पक्ष) का नाम बदलाकर कम्युनिस्ट (साम्यवादी) पक्ष कर दिया। साम्यवादी शासनप्रनाली को हुकुमशाही शासनप्रनाली का स्वरुप प्राप्त हुआ। साम्यवादी शासनप्रनाली में शिक्षा का स्वरूप मार्क्सवाद, साम्यवाद आदि पर आधारित था। श्रमिक किसानों एवं सामान्य जनता के हितों की रक्षा के लिए शिक्षा का आयोजन, नियोजन एवं क्रियान्वयन किया गया। प्रसार माध्यम, लेखन- भाषण स्वातंत्र्य, व्यक्ति स्वातंत्र्य आदि पर बंधन होते है। शिक्षा के द्वारा मार्क्सवाद एवं साम्यवाद का प्रचार प्रसार किया गया। साम्यवादी अपनी विचारधारा के अनुसार शिक्षा नीति का नियोजन करते हैं। साम्यवादी शिक्षा के केंद्र में श्रमिक, किसान, कामगार एवं सामान्य जनता होती है।

शिक्षा के द्वारा साम्यवाद को अनुकूल जनता के विचार बनाये जाते है। परिश्रम, विज्ञान, उत्पादन मूल्य, निरीश्वर, नैतिक शिक्षा आदि को शिक्षा में महत्ता दी जाती है। आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक, राजकीय, सांस्कृतिक आदि दृष्टिकोण से परिश्रम को महत्व दिया जाता है। शिक्षण यह साम्यवाद का शस्त्र एवं शिक्षक शिपाई होता है। मार्क्सवाद एवं साम्यवाद का प्रभाव रशिया में नहीं पुरे विश्व में दिखाई देता है। पंचवार्षिक योजना यह रशियन साम्यवाद की देन है। पंचवार्षिक योजना के अनुसार पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाता है। राष्ट्र की आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम (कृषि, अभियांत्रिकी, शस्त्र निर्मिति आदि) का चयन विद्यार्थियों को करना होता है। साम्यवादी विचारों से प्रेरित नागरिकों का निर्माण शिक्षा द्वारा किया जाता है। यही साम्यवादी शिक्षा का लक्ष्य होता है।