लोकतंत्र शासनप्रनाली में शिक्षा - education in democracy
लोकतंत्र शासनप्रनाली में शिक्षा - education in democracy
लोकतंत्रात्मक शासनप्रनाली यह विश्व की सर्वाधिक लोकप्रिय एवं आदर्श शासनप्रनाली मानी जाती है। परिवार विद्यालय, सामाजिक संस्था एवं राजनितिक संस्था आदि में लोकतंत्रात्मक शासनप्रनाली का प्रयोग किया जाता है। जीवन के विभिन्न अंगो में लोकतंत्रात्मक पद्धति का प्रयोग किया जाता है। लोकतंत्र में सर्व सामान्य जनता के सर्वांगिक विकास पर बल दिया है। लोकतंत्र में लिंग, जन्मस्थान, वंश, जाति, धर्म, पंथ, वर्ग, क्षेत्र आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। सभी मानव समान है यह लोकतंत्र का मूलाधार है। सभी व्यक्तियों को अपनी क्षमता के अनुसार विकास के अवसर प्रदान किये जाते है। लोकतंत्र में सभी को स्वतंत्रता प्रदान की जाती है किन्तु सामाजिक जीवन की मर्यादाओं का पालन व्यक्तियों करना है। जियो और जीने दो' इस तत्व का पालन व्यक्तियों द्वारा करना अपेक्षित है।
राजनितिक दृष्टि से लोकतंत्र के क्रियान्वयन में दोष होंगे किन्तु शिक्षा की दृष्टी से लोकतंत्र सर्वोत्तम है। लोकतंत्र केवल शासनप्रनाली नहीं, यह एक जीवनप्रनाली है। न्याय, स्वातंत्र, समता, बंधुभाव आदि पर लोकतंत्र की आधारशिला है। उक्त मूल्यों की शिक्षा लोकतांत्रिक शिक्षा प्रणाली में अपेक्षित है। लोकतंत्र में लिंग, जन्मस्थान, वंश, जाति, धर्म, पंथ, वर्ग, क्षेत्र आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। सभी के शैक्षिक विकास के समान अवसर प्रदान किये जाते हैं। लोकतांत्रिक विधि का प्रयोग शिक्षा में किया जाता है। अभिक्रमशिलता, साहस, उद्यमिता, चिकाटी, श्रमप्रतिष्ठा आदि मूल्यों का समावेश लोकतांत्रिक शिक्षा में किया जाता है। लोकतंत्र के प्रभाव के कारण शिक्षा शिक्षक केंद्रित न रहते विद्यार्थी केंद्रित बनी है। विशिष्ट बालकों के लिए विशेष शिक्षा का प्रबंधन किया जाता है। दिव्यांगो के लिए विशेष शिक्षा का प्रावधान विद्यालयों में किया जाता है। अल्पसंख्यांक, आर्थिक एवं सामाजिक पिछड़े वर्गों के लिए छात्रवृत्ति दी जाती है। उच्च शिक्षा, शोध हेतु विशेष छात्रवृत्ति का प्रावधान किया है।
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