भारतीय संविधान में शिक्षा - education in indian constitution

भारतीय संविधान में शिक्षा - education in indian constitution


स्वतन्त्र भारत के संविधान में शिक्षा के संबंध में अनेक प्रावधान किए गये हैं। राज्यों व केन्द्रों के संवैधानिक कर्तव्यों तथा अधिकारों को स्पष्ट किया गया है। 


1 शिक्षा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में शिक्षा के अधिकार को एक विकसित अधिकार के रूप में सम्मलित किया गया है। वर्ष 2002 में 46 वें संविधान संशोधन के द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21 क को जोड़कर प्रारम्भिक शिक्षा को नागरिकों का मूल अधिकार बना दिया। इस के अनुसार राज्य 6 से 14 वर्ष के आयु के सभी छात्रों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था करें।


2 शैशवपूर्ण देशभाल तथा शिक्षा संविधान के अनुच्छेद 45 के अनुसार 6 वर्ष तक के सभी बच्चों को शैशवपूर्ण देखभाल तथा शिक्षा प्रदान करने का उत्तरदायित्व राज्यों को सौंपा गया। 


3 अल्पसंख्यकों की शिक्षा संविधान के अनुच्छेद 30 के अनुसार धर्म तथा भाषा के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय अपनी पसन्द की शिक्षा प्राप्त करने के लिए शिक्षा संस्थाएं खोल सकते है।


4 शिक्षा के समान अवसर अनुच्छेद 29 के अनुसार व्यवस्था की गई है कि जाति, धर्म, - भाषा आदि के आधार पर किसी भी व्यक्ति को शिक्षा संस्था में प्रवेश के लिए नहीं रोका जा सकता है। 


5 अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की शिक्षा संविधान के अनुच्छेद 46 में अनुसूचित जाति, जन जाति तथा समाज के अन्य कमजोर वर्गों की शैक्षिक व आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने का उत्तरदायित्व राज्य को दिया गया।


6 धार्मिक शिक्षा की स्वतंत्रता संविधान के द्वारा शिक्षा संस्थाओं में किसी धर्म विशेष की शिक्षा प्रदान करने पर पाबन्दी लगाई गई हैं। अनुच्छेद 28 में यह व्यव्स्था करते हुए छात्रों को धार्मिक शिक्षा की स्वतंत्रता से मुक्त किया गया है।


7 मातृभाषा में शिक्षा संविधान के अनुच्छेद 350-A में भाषायी अल्पसंख्यको के लिए उनकी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने का संवैधानिक उत्तरदायित्व राज्य को सौंपा गया है। 


8 हिन्दी भाषा का विकास संविधान के अनुच्छेद 351 में हिन्दी भाषा के विकास व प्रचार प्रसार का उत्तरदायित्व केन्द्र सरकार को दिया गया है।


9 स्त्रियों एवं पिछड़ा वर्ग की शिक्षा - संविधान के अनुच्छेद 15 ( 3 व 4) में महिलाओं तथा शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान करने पर किसी प्रकार की रोक न लगाने की व्यवस्था की गई है।


10 केन्द्र एवं राज्यों के शैक्षिक अधिकार संविधान में कुछ विशिष्ट बातों को छोड़कर शिक्षा सम्बन्धी कानून व व्यवस्था के अधिकार राज्यों को दे दिये गये थे। केन्द्र को राष्ट्रीय महत्व की शिक्षा संस्थाएं केन्द्रीय विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा व अनुसन्धान के स्तर आदि विषयों पर कानून बनाने तथा व्यवस्था करने का अधिकार दिया गया था। परन्तु सन 1977 में किये गये संविधान संशोधन के द्वारा शिक्षा को समवर्ती सूची में सम्मिलित कर दिया गया। अतः अब शिक्षा सम्बन्धी विषयों पर केन्द्र व राज्य को ही अपने-अपने ढंग से कानून व व्यवस्था का अधिकार प्राप्त है। परन्तु केंद्र व राज्यों के कानूनों में विरोध होने पर केन्द्र का कानून प्रभावी माना जायेगा।