शिक्षा राजनितिक विचारधाराएं एवं भौगोलिक सीमाएं - Education Political Ideologies and Geographical Limits
शिक्षा राजनितिक विचारधाराएं एवं भौगोलिक सीमाएं - Education Political Ideologies and Geographical Limits
राजनीति एवं शिक्षा का प्राचीन काल से गहरा संबंध रहा है। राजनीतिक मूल्यों एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए शिक्षा का नियोजन आयोजन किया जाता था। राजनितिक संस्थाओं के द्वारा शिक्षा के लिए सहायता प्रदान की जाती थी। इस कारणवश शिक्षा के उद्देश्य नीतियाँ पाठ्यक्रम एवं क्षेत्र आदि पर राजनीती का प्रभाव होता है। राजेशाही महाजनशाही, सरदारशाही, सरंजामशाही, हुकुमशाही, साम्यवादी अध्यक्षीय शासनप्रनाली, लोकशाही आदि प्रकार की शासनप्रनाली विश्व के विभिन्न देशों में पायी जाती है। वर्तमान में अधिकतर देशों ने प्रजातंत्र का स्वीकार किया है। अब शिक्षा को प्रजातंत्र के निर्माण, पोषण एवं विकास का महत्वपूर्ण साधन माना है। जिस देश में प्रजातंत्र के अलावा अन्य शासनप्रनाली है उन देशों में भी राजनितिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार का साधन शिक्षा ही माना है।
अपनी राजनितिक विचारधाराओं के प्रसारण के लिए शिक्षा का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार शिक्षा और राजनितिक विचारधाराओं का परस्पर संबंध है।
शिक्षा में शासन संस्था की आवश्यकता होती है। व्यक्ति के विकास में परिवार, मित्रमंडल, समाज, विद्यालय. शासनप्रनाली आदि का प्रभाव पड़ता है। बालक के सहजप्रवृत्ति का विकास परिवार, मित्रमंडल, समाज, विद्यालय, शासनप्रनाली आदि के द्वारा होता है।
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