मुस्लिम काल में शिक्षा व्यवस्था - Education system in Muslim period
मुस्लिम काल में शिक्षा व्यवस्था - Education system in Muslim period
मुस्लिम काल 12 वीं शताब्दी से 18 वीं शताब्दी तक रहा मुस्लिम काल में शिक्षा का प्रसार उपयोग मुस्लिम धर्म के प्रचार-प्रसार में किया। इसकाल के सभी वंशों में शिक्षा के प्रति सकारात्मक मनोवृत्ति थी। अपने धर्म एवं प्रसार के लिए कई शासकों ने वैदिक संस्थाओं गुरुकुल मठ, बिहारों को नष्ट कर उनके स्थान पर मकतब व मदरसों की स्थापना की। कुतुबद्दीन अल्तमश रजिया नसीरूद्धीन व वलवन ने अपने अपने शासन काल में अनेकों मकतब मदरसों की स्थापना की जिसमें मुस्लिम धर्म की शिक्षा दी जाती थी। जलालुद्दीन एक उदार शासक था उसने सभी प्रकार की शिक्षा को प्रोत्साहित किया।
तुगलक वंश में फिरोज तुगलक के समय शिक्षा का प्रसार तेजी से हुआ। उसने 30 से अधिक मदरसों की स्थापना की उसने मुस्लिम शिक्षा के साथ साथ व्यवसायिक शिक्षा को भी विकसित किया।
मुगल काल में मुस्लिम शिक्षा के एक नये युग की शुरूवात हुई। बाबर ने शिक्षा संबंधी कई नई योजना बनाई तथा हुमायुं ने दिल्ली में एक विशाल पुस्तकालय बनवाया। अकबर के समय इस्लामी शिक्षा के विकास के कई अवसर प्राप्त हुए उसने मुस्लिम शिक्षा के साथ-साथ हिन्दुओं की शिक्षा की उचित व्यवस्था की। जहाँगीर एवं शाहजहाँ का काल इस्लामी शिक्षा के विकास की दृष्टि से सामान्य रहा। औरंगजेब के शासन काल में इस्लामी शिक्षा को विकसित करने का पर्याप्त अवसर मिला, उसने हिन्दु शिक्षण संस्थाओं को नष्ट कर मकतब व मदरसों की स्थापना की।
औरंगजेब के पश्चात् मुगलकाल धीरे-धीरे पतन की ओर चला गया। इस सबके पश्चात् हम यह कह सकते है कि इस्लाम काल में शिक्षा की उन्नति शासक की रूचि. मनोवृत्ति पर आधारित रही। सभी ने अपने-अपने तरह से शिक्षा का विकास किया।
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