शैक्षिक समाजशास्त्र और शिक्षण विधियाँ - Educational Sociology and Teaching Methods
शैक्षिक समाजशास्त्र और शिक्षण विधियाँ - Educational Sociology and Teaching Methods
जार्ज पैने ने शैक्षिक समाजशास्त्र में निम्नलिखित बिन्दुओं को शिक्षण विधियों में सम्मलित करने की बात कही है -
• शिक्षण विधियाँ सैद्धांतिक कम व व्यवहारिक अधिक होनी चाहिए।
• विद्यालय में आर्जित ज्ञान को छात्र अपने दैनिक (वास्तविक) जीवन से जोड़ सके।
• शिक्षण विधियों के द्वारा छात्रों को इतना सक्षय बनाया जाये कि वह स्वयं को सामाजिक वातावरण के अनुकूल ढाल सकें।
• छात्रों की सामाजिक शक्तियों को विकसित करने का प्रयास किया जाये। शिक्षा समाजशास्त्र में शोध करने की निम्नलिखित विधियाँ होती है
• ऐतिहासिक विधि-परंपरागत ऐतिहासिक विधि में महान पुरुषों और प्रमुख घटनाओं का अध्ययन किया जाता था जबकि आधुनिक ऐतिहासिक विधि में जनसाधारण की समस्याओं, स्थितियों महत्वाकांक्षाओं तथा घटनाओं का अध्ययन किया जाता है।
• तुलनात्मक विधि तुलनात्मक विधि में दो या दो से अधिक घटनाओं समस्याओं परिस्थितियों, व्यवस्थों, व्यक्तियों के बीच पाई जाने वाली समानताओं और असमानताओं का वर्णन किया जाता है।
• संरचनात्मक प्रकार्यात्मक विधि इस विधि में सबसे पहले हम समाज की संरचना में कर्ता की स्थिति का विश्लेषण करते हैं इसके अंतर्गत उसकी जाति, धर्म, वर्ग समूह, आयु राजनैतिक संगठन, आदि साए संबन्धित जानकारी एकत्र करते है।
इसके पश्चात कर्ता या संस्था के प्रकार्यों का विश्लेषण करते है।
• सांख्यिकी विधि - सांख्यिकी के विभिन्न सूत्रों के द्वारा गुणात्मक सामग्री को विश्लेषित किया जाताहै। प्रारम्भ में इसका प्रयोग कम होता था किन्तु बाद में प्रयोग बड़ गया और कम्प्युटर ने उसे और सरल बना दिया है।
• आदर्श प्रकार विश्लेषण विधि इस विधि में जिस व्यक्ति संस्था का विश्लेषण करने जा रहे है. पहले उसके रूप की कल्पना, विचार मंथन अनुभव एवं अध्ययन के आधार पर एक आदर्श चित्र बनाया जाता है। फिर इस आदर्श तस्वीर से हम उसकी तुलना करते है।
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