अभिजात वर्गः अर्थ एवं परिभाषाएँ - The Elite: Meaning and Definitions

अभिजात वर्गः अर्थ एवं परिभाषाएँ - The Elite: Meaning and Definitions


सत्रहवीं शताब्दी में अभिजात जन शब्द का प्रयोग सबसे अल्प वस्तुओं या वस्तुओं की किसी खास अच्छाई के लिए किया जाता था। इस सीमित अर्थ में अभिजात या संभ्रांत जन शब्द का प्रयोग केवल वज्र सैनिक दस्तों (Crack Miltary Units) अथवा कुलीन वर्ग के उच्चतर स्तर के लोगों के लिए किया जाता था। अंग्रेजी भाषा में अभिजात (Elite) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम ऑक्सफोर्ड अंग्रेजी शब्दकोश में 1823 में सम्मिलित किया गया था जिसका शाब्दिक अर्थ "श्रेष्ठ होता है। समाजशास्त्र में इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम पैरेटो ने किया था। पैरेटो द्वारा समाजशास्त्रीय सिद्धान्तों में इस शब्द को अपनाये जाने के पश्चात यूरोप तथा अमेरिका में इस शब्द का काफी प्रचलन हो गया।


पैरेटो ने अभिजात वर्ग की अवधारणा का मौलिक ढंग से विवेचन किया है। उन्होंने मुख्य रूप से शासन सम्बन्धी अभिजात वर्ग का वर्णन किया है। पैरेटो का मत है कि सभी व्यक्ति समान नहीं होते हैं। इनकी अवसरों, क्षमताओं, योग्यताओं और कुशलताओं में अंतर होता है। इस अंतर के कारण समाज में स्तरीकरण हो जाता है। इस स्तरीकरण के कारण विभिन्न श्रेणियों का गठन हो जाता है।

कुछ व्यक्ति उच्च में श्रेणी में कुछ निम्न श्रेणी में रखे जाते हैं। सर्वोच्च योग्यता वाले व्यक्ति का अन्य व्यक्तियों से पृथक होने के कारण उनका एक पृथक वर्ग हो जाता है। पैरेटो इसे (अभिजात वर्ग ( कहते हैं। पैरेटो ने हर क्षेत्र में अभिजात वर्ग की विस्तृत विवेचना नहीं की है बल्कि मुख्य रूप से शासन से संबंधित अभिजात या सभ्रांत जनों की व्याख्या की है। इनके अनुसार प्रत्येक मानवीय क्रिया जैसे न्यायालय, व्यापार, कला, राजनीति, बौद्धिकता आदि में अगर हम व्यक्तियों की गतिविधि के क्षेत्र में इन सूचकों को अंक दे दें तो वे व्यक्ति जो सर्वोच्च अंक प्राप्त करते हैं तो वे अभिजात जन कहलाते हैं। पैरोटो के अनुसार, "मानवीय गतिविधियों के किसी अवशिष्ट क्षेत्र में जिन व्यक्तियों को सर्वाधिक अंक मिले, उनका यदि एक वर्ग बनाया जाये तो उसी को अभिजात वर्ग कहा जायेगा।" दूसरे शब्दों में किसी विशिष्ट कार्यक्षेत्र में सर्वोच्च योग्यता रखने वाले व्यक्तियों को हम अभिजात जन की संज्ञा प्रदान कर सकते हैं। "इस संदर्भ में कुछ अन्य परिभाषाएँ भी इस प्रकार हैं


पेरी गारिएन्ट (Pary Gariant Political Elite, 1969) कहते हैं, “कुछ अल्पसंख्य को विषिश्ट क्षेत्रों में समाज के मामलों में अद्वितीय प्रभावशाली भूमिका का निर्वहन करते हैं, अभिजन कहलाते है।" 


राइट मिल्स (C.Wright Mills: Power Elite, 1956), "अभिजन जनसमुदाय के सर्वोत्कृष्ट लोगों का एक समूह है जो कि धन, शक्ति और प्रतिष्ठा के सर्वोपरि है एवं जो अन्यों के विरोध के पश्चात भी अपनी इच्छा को आरोपित करने (समाज पर) समर्थ होते हैं।"


राम अहूजा (Ram Ahuja Recruitment and Role in Modernçation), "मैं अभिजन को एक प्रभुता सम्पन्न समूह कहता हूँ जिसके पास वैशिष्ट्य और अनन्यता एवं अलगपन होती है।” स्वयं पैरेटो ही ये कहते हैं कि अभिजन वे सफल लोग हैं जो सबसे ऊपर (समाज में) आ जाते हैं। 


रेमण्ड एरॉ ( Raymond Aron) के अनुसार, “अभिजात वर्ग से हमारा तात्पर्य समाज के उस छोटे से वर्ग से है जिसके सदस्य अपने से संबंधित व्यवसायिक संस्तरण से उच्चतम स्थान प्राप्त करते हैं।


एन.एस. टिमाशेफ (N.S. Timashffe). "अभिजात वर्ग के अन्तर्गत वे व्यक्ति आते हैं जो समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उच्चतम् कार्यों का निर्वाह करते हैं अथवा अपने-अपने क्षेत्र में जिनकी स्थिति बहुत उच्च होती है।"


गायतानो मोस्का (Gaetane Mosca):- पहले विद्वान है जिन्होंने सभ्रांत जन तथा जनसाधारण शब्दों का प्रयोग विशेष अर्थों में किया। इनके अनुसार उन विकासशील समाजों में जिनमें सभ्यता का विकास अभी मुश्किल से हो पाया है, से लेकर अत्यधिक विकसित और शक्तिशाली समाजों में दो प्रकार के वर्ग पाये जाते हैं- शासक वर्ग व शासित वर्ग। प्रथम वर्ग के लोग अल्पसंख्यक होते हुए भी समस्त राजनीतिक कार्यों को निभाते हैं, सारी सत्ता उनके हाथ में केन्द्रित होती है तथा सत्ता के लाभों का रस भी उन्हें मिलता है जबकि इसके विपरीत दूसरा वर्ग बहुसंख्यक होते हुए भी प्रथम वर्ग द्वारा कभी वैधानिक तरीकों से चालित और नियन्त्रित होता है।"


टी.बी. बॉटोमोर ने भी विद्वानों द्वारा दी गई संभ्रांतजन की परिभाषाओं से इस आधार पर असहमति प्रकट की है कि उन्होंने सभ्रांतजन के सिद्धांत में निहित विचारधारा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।


इनका कहना है कि संभ्रांतजन की अवधारणा जनतन्त्र के महत्व के विरोध में विकसित हुई है। इन्होंने संभ्रांतजन की परिभाषा इस प्रकार दी है- “अभिजात जन शब्द का प्रयोग आमतौर पर वस्तुतः उन प्रकार्यात्मक, मुख्यतः व्यावसासिक, समूहों के लिए किया जाने लगा है। जिनको समाज में (किसी कारणवश) उच्च स्थिति प्राप्त है।"


उपर्युक्त विवेचन के आधार पर कहा जा सकता है कि संभ्रांतजन की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है तथा मुख्य रूप से अभिजात जन उन व्यक्तियों का एक वर्ग है जो कि सामाजिक, आर्थिक तथा राजीनितक दृष्टि से अन्य व्यक्तियों की अपेक्षा उच्च स्थिति रखते हैं। इस विवेचना से यह निष्कर्ष निकलता है कि अभिजात जन कई प्रकार के होते हैं। जैसे शासक वर्ग (Gaetano Mosca) शक्ति अभिजातजन (Power Elite). बुद्धजीवि वर्ग (Intellectuals). मैनेजर (Manager), उच्च अधिकारी (Bureaucats) तथा सैनिक अधिकारी (Military Elite) इत्यादि ।