आनुभविक अनुसंधान अभिकल्प - empirical research design
आनुभविक अनुसंधान अभिकल्प - empirical research design
आनुभविक अनुसंधान अभिकल्प, जैसा कि पहले भी बताया जा चुका है, आनुभविक साक्ष्यों पर आधारित अनुसंधान अभिकल्प है। यह प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष अवलोकन अथवा अनुभव के साधनों व प्रविधियों की सहायता से ज्ञान अर्जित करने का प्रारूप है। आनुभविक साक्ष्यों को गुणात्मक अथवा गणनात्मक प्रकार से विश्लेषित किया जा सकता है। तथ्यों के विश्लेषण हेतु गुणात्मक अथवा गणनात्मक किसी भी प्रकार के प्रश्नों अथवा प्रकृति का प्रयोग किया जा सकता है। यदा कदा अनुसंधानकर्ता द्वारा दोनों प्रकारों का प्रयोग एक साथ भी किया जाता है। यहाँ यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि गुणात्मक और गणनात्मक दोनों ही किसी भी अनुसंधान की प्रकृति को स्पष्ट करते हैं। समान्यतः अनुसंधानकर्ता के पास कुछ तर्क अथवा सिद्धांत रहते हैं, जिनके इर्द-गिर्द वह अपने विषय के अनुरूप शोधकार्य करता है।
उसी तर्क अथवा सिद्धांत के आधार पर अनुसंधानकर्ता उपकल्पना अथवा तर्कवाक्य तैयार करता है तथा इसी का परीक्षण वह अपने अनुसंधान के माध्यम से करता है। इस उपकल्पना अथवा अनुमान की सहायता से कुछ विशिष्ट घटनाओं अथवा समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। इन उपकल्पनाओं की जांच हेतु कुछ उचित वैज्ञानिक प्रयोग/ प्रेक्षण किए जाते हैं। •परीक्षण से प्राप्त निष्कर्ष के आधार पर ही उपकल्पना सही अथवा गलत साबित होती है तथा कोई भी सिद्धांत पुष्ट अथवा अस्वीकृत होता है। किसी भी सिद्धांत की स्वीकृति अथवा अस्वीकृति हेतु आनुभविक शोध की भूमिका उल्लेखनीय रूप से आवश्यक रहती है। इस अभिकल्प की सहायता से ही सिद्धांत की निर्मिति, पुनर्निर्मिती तथा अस्वीकृति निर्धारित होती है। यह इनके वैधता के प्रति पूर्व में ही प्रारूप प्रस्तुत करने में जवाबदेही प्रस्तुत करता है।
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